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मूसा: नील नदी से लाल सागर तक

मूसा परमेश्वर पर अपना भरोसा रखना सीखता है।
योगदानकर्ता रेव. हेनरी मार्टिन
CC BY-NC-ND
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जब फ़िरौन मिस्र का राजा था, तब वह याकूब की सन्तानो से डरता था, जो अब इस्राएली कहलाते थे। उसने कहा, 'इस्राएली बहुत मजबूत हो रहे हैं,' और 'अगर कोई युद्ध होता है, तो वे हमसे लड़ सकते हैं और हमें हरा सकते हैं।' – स्लाइड 1
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ऐसा होने से रोकने के लिए, फिरौन ने उन्हें गुलाम बना लिया और उन्हें कड़ी मेहनत करने के लिए मजबूर किया। लेकिन उनका काम कितना भी कठिन क्यों न हो, इस्राएलियों की संख्या में वृद्धि जारी रही, इसलिए उसने एक क्रूर कानून पारित किया जिसमें इस्राएली माता-पिता से पैदा हुए सभी बच्चों को नील नदी में फेंकने का आदेश दिया गया था। – स्लाइड 2
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ऐसा हुआ कि एक इस्राएली परिवार में एक बच्चे का जन्म हुआ। उसकी माँ जानती थी कि उसे बचाने के लिए उसे कुछ करना होगा। उसने नदी के पास उगने वाले नरकटों से एक बड़ी टोकरी बनाई। उसने उसे चिपचिपे टार से सील कर दिया ताकि वह पानी में न डूबे। फिर उसने बच्चे को टोकरी में डालकर किनारे से नदी में छोड़ दिया। बच्चे की बहन, मरियम, कुछ दूरी पर खड़ी थी और बच्चे को देख रही थी। – स्लाइड 3
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उस शाम फिरौन की बेटी नदी में नहाने चली आई। उसने नदी में तैरती अजीब टोकरी को देखा। उसने अपनी दासी से कहा, 'वह टोकरी ले आओ'। जब उसने बच्चे को देखा तो वह उससे प्यार करने लगी। मिरियम छिपकर बाहर आई और उससे पूछा, 'क्या तुम चाहती हो कि मैं एक इसराएली महिला से इस बच्चे की देखभाल करवाऊं?' 'राजकुमारी ने उत्तर दिया, हां, जरूर'। – स्लाइड 4
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मरियम घर वापस भागी और अपनी माँ को वह सब कुछ बताया जो कुछ हुआ था। तब वह अपनी माता को फिरौन की बेटी से मिलने के लिये उस के साथ ले गई। राजकुमारी ने कहा, 'बच्चे की देखभाल करो और जब वह बड़ा हो जाए तो उसे मेरे पास वापस ले आओ। बच्चे की मां अपने बच्चे के साथ मिलकर बहुत खुश हूई। – स्लाइड 5
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जब बालक बड़ा हुआ, तब उसकी माता उसे फिरौन की बेटी के पास ले गई, और वह उसका पुत्र हुआ। उसने उसका नाम यह कहकर मूसा रखा, कि मैं ने उसे जल में से निकाला। मूसा ने फिरौन के महल में बड़े होते – होते बहुत कुछ सीखा। – स्लाइड 6
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यद्यपि वह मिस्र के एक महल में पला-बढ़ा, मूसा जानता था कि वह जन्म से एक इस्राएली था। एक दिन उसने एक मिस्री को एक इस्राएली को पीटते हुए देखा। क्रोध में आकर उसने मिस्री को मार डाला और उसके शरीर को रेत में छिपा दिया। फिरौन को जब पता चला कि मूसा ने क्या किया तो उसने घोषणा किया कि मूसा को मरना होगा। मूसा मिस्र से भागकर मिद्यान देश को गया। – स्लाइड 7
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एक दिन मूसा अपनी भेड़ों को होरेब की ओर ले जा रहा था, कि एक झाड़ी में आग लगी हुई दिखाई दिया, परन्तु झाड़ी नहीं जली। जलती हुई झाड़ी में से परमेश्वर ने मूसा से बातें कीं। 'हे मूसा, अपनी जूती उतार दे, क्योंकि तू पवित्र भूमि पर खड़ा है। मैं इब्राहीम, इसहाक और याकूब का परमेश्वर हूं। मैं ने मिस्र में अपना प्रजा की प्रार्थना सुनी है, और मैं तुझे मिस्र से निकालकर उस देश में ले जाने के लिए भेजता हूं, जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं। मूसा परमेश्वर के लोगों का अगुवा बनने के लिए अनिच्छुक था लेकिन उसने सीखा कि वह परमेश्वर पर भरोसा कर सकता है। – स्लाइड 8
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परमेश्वर के चुने हुए अगुवे के रूप में, मूसा ने परमेश्वर को कई बड़े चमत्कार करते हुए देखा। एक बड़ा चमत्कार तब हुआ जब इस्राएल के बच्चे लाल सागर के रास्ते मिस्र की सेना से बच निकले। परमेश्वर ने पानी को अलग कर दिया ताकि इसरायली सूखी भूमि पर सुरक्षित रूप से गुजर सके। जब मिस्र की सेना ने पीछा किया, तो परमेश्वर ने समुद्र को बंद कर दिया और पूरी सेना समुद्र में डूब गई। जब परमेश्वर आपसे कुछ करने के लिए कहता है तो वह आपको कभी निराश नहीं करेगा। – स्लाइड 9
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