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मूसा और मिस्र की विपत्तियाँ

परमेश्वर मिस्रवासियों पर विपत्तियाँ भेजता है।
योगदानकर्ता सू बेंटली
CC BY-SA
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मूसा और हारून फिरौन के पास गए और उससे कहा की कि वह परमेश्वर के लोगों को जाने दे ताकि वे जंगल में उसकी आराधना कर सकें। फ़िरऔन ने कहा, 'नहीं'। उसका हृदय कठोर था और वह लोगों को जाने नहीं देता था। वह इस्राएलियों को अपना दास बनाकर रखना चाहता था। – स्लाइड 1
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फ़िरौन ने अपने कार्यभार संभालने वालों से कहा कि वे इस्राएली दासों से और भी अधिक परिश्रम करवाएँ। दासों को न केवल ईंटें बनानी पड़ती थीं बल्कि उन्हें अपनी ज़रूरत का भूसा भी ढूँढ़ना पड़ता था। – स्लाइड 2
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इस्राएलियों को और भी अधिक परिश्रम करना पड़ा। और जब उन्होंने पर्याप्त ईंटें नहीं बनाईं तो काम करने वालों ने उन्हें पीटा। – स्लाइड 3
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इस्राएल के पुरनिये मूसा और हारून के पास आकर शिकायत करने लगे कि सब इस्राएलियों के साथ कितना क्रूर व्यवहार किया जा रहा है। उन्होंने मूसा और हारून को दोषी ठहराया क्यूंकि उन्होंने फिरौन को यह बताकर कि परमेश्वर ने कहा था कि उसे दासों को जाने देना चाहिए, उनके जीवन को और बदतर बना दिया। – स्लाइड 4
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इसलिए मूसा ने परमेश्वर से प्रार्थना की और उससे पूछा कि उसने फिरौन को इस्राएलियों के लिए परेशानी पैदा करने की अनुमति क्यों दी और उसने उन्हें क्यों नहीं बचाया। परमेश्वर ने उत्तर दिया कि वह उन्हें मिस्रियों से छुड़ाएगा और उन्हें उस देश में लाएगा जिसे उसने उन्हें देने का वादा किया था। वादा किए गए देश में वे आज़ाद होंगे। – स्लाइड 5
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मूसा और हारून फिरौन के पास गए और उससे परमेश्वर के लोगों, इस्राएलियों को जाने देने के लिए कहा। परमेश्‍वर की शक्ति दिखाने के लिए हारून ने अपने हाथ में रखी छड़ी को ज़मीन पर फेंक दिया और वह एक साँप बन गया। फिरौन के जादूगरों ने अपने जादू से उनकी छड़ियों को भी साँप बना दिया। – स्लाइड 6
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परन्तु हारून के साँप ने दूसरे साँपों को निगल लिया। ईश्वर किसी से भी अधिक शक्तिशाली है लेकिन इस चमत्कार को देखने के बाद भी फिरौन ने ईश्वर के लोगों को जाने से मना कर दिया। – स्लाइड 7
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मूसा और हारून फिरौन के पास गए। इस बार हारून ने नील नदी पर अपनी छड़ी से प्रहार किया और पानी खून में बदल गया और मिस्र में पीने का सारा पानी भी खून से लाल हो गया। फिरौन के जादूगरों ने भी यही काम करने के लिए अपने जादू का प्रयोग किया। फिरौन ने परमेश्वर की बात नहीं मानी और न ही इस्राएली दासों को जाने दिया। – स्लाइड 8
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सात दिनों तक पानी लहू में बदल गया और फिर परमेश्वर ने मिस्र पर एक और विपत्ति फैला दी। इस बार उसने हारून को सभी नदियों और नालों पर अपनी लाठी बढ़ाने की आज्ञा दी। अचानक मेंढक प्रकट हुए और पूरी ज़मीन पर फैल गए। वे हर जगह थे, यहाँ तक कि फिरौन के महल में भी। फिरौन ने मूसा और हारून से मेंढ़कों की विपत्ति को रोकने के लिए विनती की और उन्होंने ऐसा किया, लेकिन फिरौन ने परमेश्वर की बात नहीं मानी और न ही अपने लोगों को जाने दिया। – स्लाइड 9
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इसलिए, परमेश्वर ने हारून से कहा कि वह अपनी लाठी को भूमि की सारी धूल पर फिर से बढ़ाए और वह जूँ में बदल गई। जूँ सभी मिस्रवासियों पर दिखाई दीं, जिनमें उनके जादूगर भी शामिल थे जिन्होंने फिरौन को चेतावनी दी, 'यह  परमेश्वर का काम है।' परन्तु फ़िरौन ने हठ करके इस्राएली दासों को जाने देने से इन्कार कर दिया। – स्लाइड 10
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इसलिए, परमेश्वर ने फिरौन को चेतावनी देने के लिए मूसा को भेजा कि मक्खियों के झुंड उसे और मिस्र के सभी लोगों को परेशान करेंगे, लेकिन गोशेन की भूमि में जहां इस्राएली रहते थे, कोई मक्खियाँ दिखाई नहीं देंगी। एक बार फिर फ़िरऔन ने मक्खियों को दूर करने की प्रार्थना की और परमेश्वर ने उन्हें दूर कर दिया। परन्तु उसने फिर भी इस्राएली दासों को मुक्त करने से इन्कार कर दिया। – स्लाइड 11
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तो,  परमेश्वर ने एक और विपत्ति भेज दी। मिस्रियों के सभी जानवर बीमार पड़ गए और मर गए लेकिन इस्राएलियों के जानवर सुरक्षित रहे। इतना सब कुछ होने के बाद भी फिरौन ने परमेश्वर की आज्ञा मानने से इनकार कर दिया और न ही अपने लोगों को जाने दिया। – स्लाइड 12
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इसके बाद, परमेश्वर ने मूसा को भट्टी से कुछ राख लेने और फिरौन के सामने हवा में फेंकने की आज्ञा दी। सभी मिस्रवासियों पर भयानक फोड़े निकल आये और जादूगरों को उनसे इतना कष्ट हुआ कि वे मूसा के सामने टिक न सके। परन्तु फ़िरौन ने इस्राएली दासों को मुक्त करने से इन्कार कर दिया। – स्लाइड 13
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इसलिए इसके बाद परमेश्वर ने उन स्थानों पर जहां मिस्रवासी रहते थे, बड़े ओले गिरने की विपत्ति भेजी, परन्तु गोशेन पर नहीं जहां इस्राएली दास रहते थे। बड़े-बड़े ओलों ने मिस्रवासियों के जानवरों को नष्ट कर दिया। लेकिन इस भयानक तूफान के बाद भी फिरौन ने गुलामों को जाने से मना कर दिया। – स्लाइड 14
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फिरौन की अवज्ञा के कारण परमेश्वर ने मिस्रियों पर एक और विपत्ति भेजी। टिड्डियों के झुंड ने सारी भूमि को ढँक लिया और पेड़ों के सारे फल, जड़ी-बूटियाँ और खेतों में जो कुछ हरा था उसे खा लिया। परन्तु सारी फसल खा जाने के बाद भी फिरौन ने अपना सिर हिलाकर दासों को छोड़ने से 'नहीं' कहा। – स्लाइड 15
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इसलिए, परमेश्वर ने मूसा से अपना हाथ बढ़ाने को कहा और मिस्र देश पर तीन दिन तक गहरा अंधकार छाया रहा। परन्तु गोशेन देश में जहाँ इस्राएली दास रहते थे, उन्होंने सूर्य के प्रकाश का आनन्द लिया। फिरौन जानता था कि ईश्वर किसी से भी अधिक शक्तिशाली है लेकिन फिर भी उसने ईश्वर के लोगों को जाने से मना कर दिया। अब तक नौ विपत्तियाँ आ चुकी थीं। परमेश्वर आगे क्या करेंगे? – स्लाइड 16
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