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युसुफ को गड्ढ़े में फेंका जाना

यूसुफ को चाँदी के 20 टुकड़ों में दास के रूप में बेचा गया।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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यूसुफ के भाई अपने पिता की भेड़-बकरियों को चराने के लिए चरागाह खोजने के लिए उत्तर की ओर शकेम गए थे। यूसुफ अपने पिता याकूब के पास हेब्रोन की तराई में ही था। – स्लाइड 1
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याकूब ने यूसुफ से कहा, 'जाकर अपने भाइयों और भेड़-बकरियों का हाल देख कि वे कुशल से हैं, और मेरे पास समाचार ले आ।' – स्लाइड 2
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सो यूसुफ हेब्रोन से शकेम को चलकर अपने भाइयों को ढूंढ़ने लगा। हालांकि, जब वह वहां पहुंचे तो उन्हें नहीं मिला। – स्लाइड 3
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एक मनुष्य ने पूछा, 'तुम क्या ढूंढ रहे हो?' यूसुफ ने उत्तर दिया, 'मैं अपने भाइयों को ढूंढ रहा हूं। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि वे अपनी भेड़-बकरियाँ कहाँ चरा रहे हैं?’ ‘मैंने उन्हें यह कहते सुना, “आओ, हम दोतान को चलें,’” उस व्यक्ति ने उत्तर दिया। – स्लाइड 4
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इसलिए युसुफ दोतान को चला। – स्लाइड 5
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उसके भाई वहाँ पर अपनी भेड़-बकरियों को चरा रहे थे। – स्लाइड 6
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हालाँकि, जब उसके भाइयों ने उसे दूर से देखा तो उन्होंने उसे मारने की साजिश रची। – स्लाइड 7
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'यहाँ वह सपने देखने वाला आता है!' वे बुदबुदाए। 'आओ हम उसे मार डालें और उसे इन हौदों में से किसी एक में डाल दें। हम कह सकते हैं कि एक खूँखार जानवर ने उसे खा लिया। फिर हम देखेंगे कि उसके सपनों का क्या होता है।' – स्लाइड 8
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याकूब के पुत्रों में सबसे बड़े रूबेन ने विरोध किया। उन्होंने कहा, 'चलो उसकी जान नहीं लेते हैं।' 'कोई खून मत बहाओ। उसे इस गड़हे में डाल दो, परन्तु उस पर हाथ मत उठाना। – स्लाइड 9
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रूबेन ने यह योजना बाद में यूसुफ को छुड़ाने और उसे उसके पिता के पास वापस ले जाने की योजना के बारे में कही। – स्लाइड 10
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इसलिए जब यूसुफ आया तो उसके भाइयों ने उसके अंगरखा उतार कर उसे एक खाली कुएं में फेंक दिया। – स्लाइड 11
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जब वे अपना भोजन करने बैठे, तो उन्होंने गिलाद से इश्माएली व्योपियों का एक दल आते देखा। उनके ऊँट सुगन्ध द्रव्य, बलसान, और गन्धरस से लदे हुए मिस्र को जा रहे थे। – स्लाइड 12
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यहूदा ने अपके भाइयों से कहा, हम यूसुफ को मार न डालें, वरन इश्माएलियों के हाथ बेच दें। तब उन्होंने यूसुफ को गड़हे में से खींचकर निकाला, और चान्दी के बीस शेकेल में इश्माएलियों के हाथ बेच डाला। – स्लाइड 13
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यूसुफ को इश्माएली व्यापारियों द्वारा बंदी बना लिया गया और एक दास के रूप में बेचे जाने के लिए मिस्र की अपनी लंबी यात्रा शुरू की – स्लाइड 14
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जब यूसुफ बेचा गया तब रूबेन अन्य भाइयों के साथ नहीं था। जब उसे पता चला कि यूसुफ अब हौज़ में नहीं है तो उसने दुःख के मारे अपने कपड़े फाड़ डाले। 'लड़का नहीं है! अब मैं क्या करूं?’ तब उन्होंने यूसुफ का अंगरखा लिया, और एक बकरे को मारके उसके लोहू में उसे डुबा दिया। – स्लाइड 15
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वे रंगीन अंगरखे को अपने पिता के पास ले गए और कहा, 'हमें यह मिला है। क्या यह तुम्हारे पुत्र का अंगरखा है?' 'यह मेरे पुत्र का अंगरखा है!' याकूब चिल्लाया। 'कोई खूँखार जानवर उसे खा गया है।' – स्लाइड 16
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शोक से व्याकुल होकर, याकूब ने अपने वस्त्र फाड़े, टाट ओढ़ लिया, और यूसुफ के लिये विलाप करने लगा। कोई उसे दिलासा नहीं दे सकता था। वह रोया, 'मैं तब तक विलाप करता रहूंगा जब तक मैं मर न जाऊँ।' – स्लाइड 17
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