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यीशु की परीक्षा

यीशु की परीक्षा शैतान द्वारा की जाती है।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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यीशु को पवित्र आत्मा द्वारा जंगल में ले जाया गया ताकि शैतान द्वारा उसकी परीक्षा ली जा सके। चालीस दिन और चालीस रात उपवास करने के बाद उन्हें भूख लगी। – स्लाइड 1
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प्रलोभन देने वाला उसके पास आया और कहा, 'यदि आप ईश्वर के पुत्र हैं, तो इन पत्थरों से रोटी बन जाने को कहें।' – स्लाइड 2
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यीशु ने उत्तर दिया, 'लिखा है, मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।' – स्लाइड 3
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फिर शैतान उसे यरूशलेम ले गया और मन्दिर के सबसे ऊंचे स्थान पर खड़ा कर दिया। 'यदि आप ईश्वर के पुत्र हैं,' उन्होंने कहा, 'अपने आप को नीचे गिरा दो। इसके लिए लिखा है: – स्लाइड 4
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"वह तेरे विषय में अपने स्वर्गदूतों को आज्ञा देगा, और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे, ऐसा न हो कि तेरे पांवों में पत्थर से ठेस लगे।" यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि यह भी लिखा है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न कर।”' – स्लाइड 5
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शैतान यीशु को एक बहुत ऊँचे पहाड़ पर ले गया और उसे संसार के सभी राज्य और उनका वैभव दिखाया। 'यह सब मैं तुम्हें दे दूँगा,' उसने कहा, 'अगर तुम झुकोगे और मुझे प्रणाम करोगे।' – स्लाइड 6
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यीशु ने उससे कहा, 'मुझसे दूर हो जा, शैतान! इसके लिए लिखा है: "अपने परमेश्वर यहोवा की उपासना करो, और केवल उसकी सेवा करो।" – स्लाइड 7
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तब शैतान उसके पास से चला गया, और देखो, स्वर्गदूत आकर उस की सेवा करने लगे। – स्लाइड 8
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