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मूसा का फिरौन के पास जाना

मूसा और हारून मिस्र के प्रधान के पास गए।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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निर्गमन 4:29-31<br/>मूसा और हारून ने मिस्र पहुंचने के बाद इस्राएल के सारे लोगों और पुरनियों को एकत्र किया और उन्हें बताया कि परमेश्वर उन्हें मिस्र की दासता से स्वतंत्र करवाकर उन्हें एक प्रतिज्ञा के देश मे ले जाएगा। लोगों ने भूमि पर झुककर परमेश्वर की आराधना की। – स्लाइड 1
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निर्गमन 5:1-22 इसके बाद मूसा और हारून फिरौन के पास गए और उससे कहा, ‘इस्राएल का परमेश्वर यो कहता है, कि मेरे लोगों को जाने दे ताकि वे जंगल मे जाकर मेरी आराधना करें।’’ – स्लाइड 2
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'यहोवा कौन है कि मैं उसकी आज्ञा का पालन करूँ?' फिरौन ने उत्तर दिया। 'मैं यहोवा को नहीं जानता और मैं उसके लोगों को जाने नहीं दूँगा।' 'यदि तुम परमेश्वर की बात नहीं मानोगे तो वह विपत्तियाँ लाएगा,' मूसा और हारून ने चेतावनी दी। – स्लाइड 3
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उसी दिन फिरौन ने दास के मालिकों को इब्रानियों से और अधिक परिश्रम कराने का आदेश दिया। उन्हें अब ईंटें बनाने के लिए पुआल नहीं दिया जाता था, फिर भी उतने ही ईंटें बनाना था जितना पहले बनाते थे। – स्लाइड 4
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दास पुआल ढूंढ़ते और ईंटें बनाते-बनाते थक गए। जब वे अपना कोटा पूरा नहीं कर पाए तो गुलाम मालिकों ने उनकी पिटाई कर दी। – स्लाइड 5
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इब्रानी अगुवों ने मूसा और हारून से शिकायत की। 'ईश्वर तुम्हारा न्याय करे। तूने फ़िरौन को हमसे घृणा करने के लिए विवश किया है और हमारे जीवन को संकट में डाल दिया है।' – स्लाइड 6
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मूसा ने परमेश्वर से बात की। 'तूने इन लोगों पर मुसीबत क्यों लाई है? मैं ने तेरे नाम से फिरौन से बातें कीं, परन्तु तू ने उन्हें नहीं छुड़ाया। – स्लाइड 7
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निर्गमन 6:1-12 परमेश्वर ने उत्तर दिया, 'मेरा बलवन्त हाथ उन लोगों को मिस्र से निकाल देगा। मैं अपने वादे रखता हूं। मैं तुम्हें अपने लोगों के रूप में लूंगा और मैं तुम्हारा परमेश्वर बनूंगा।' – स्लाइड 8
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मूसा ने इसकी सूचना इब्रानी अगुवों को दी लेकिन वे अपने बुरे बर्ताव से इतने निरुत्साहित हो गए कि उसकी बात नहीं सुन सके। – स्लाइड 9
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परमेश्वर ने मूसा और हारून को फिर से फिरौन के पास जाने के लिए कहा। मूसा ने उत्तर दिया, 'यदि इब्री मेरी बात नहीं मानेंगे, तो फिरौन क्यों सुनेगा?' 'विशेष रूप से क्योंकि मैं बहुत अच्छा नहीं बोल सकता।' – स्लाइड 10
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निर्गमन 7 वि 1-6 परमेश्वर ने मूसा से कहा कि हारून प्रवक्ता होगा। उसने चेतावनी दी कि फिरौन उनकी बात नहीं सुनेगा परन्तु परमेश्वर मिस्रियों पर तब तक विपत्तियाँ लाएगा जब तक कि वे उसके लोगों को जाने न दें। मूसा (अब 80 वर्ष के) और हारून (83) महल के लिए रवाना हुए। – स्लाइड 11
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फिरौन ने मांग की कि मूसा और हारून उसे एक चमत्कार दिखाएँ। हारून ने अपनी लाठी को नीचे फेंका और वह साँप बन गई। फिरौन ने अपने पण्डितों और टोन्हा करने वालों को बुलवाया। उन्होंने अपनी लाठियों को नीचे फेंक दिया, और उनकी लाठियां भी सांप बन गईं। – स्लाइड 12
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किन्तु हारून के साँप ने उनके साँपों को निगल लिया। – स्लाइड 13
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परमेश्वर की महान शक्ति को देखने के बावजूद फिरौन ने हिब्रू दासों को जाने देने से इनकार कर दिया - जैसा कि परमेश्वर ने कहा था। अब समय आ गया था कि परमेश्वर मिस्रियों पर विपत्तियाँ लाकर अपनी शक्ति दिखाए। – स्लाइड 14
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