हम सामान्य आगंतुक आंकड़े एकत्र करने के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं लेकिन व्यक्तिगत जानकारी नहीं। गोपनीयता नीति
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उत्पत्ति 6:9-22 नूह परमेश्वर की दृष्टि में भला मनुष्य था वह परमेश्वर की आज्ञा माना करता था। उसके तीन पुत्र थे, शेम, हाम और यापेत। – Slide número 1
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हालांकि अन्य लोग परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता कर रहे थे। लोग एक दूसरे से बुरा व्यवहार करते थे। – Slide número 2
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परमेश्वर ने देखा कि जिन लोगों को उसने बनाया था वे दुष्ट और हिंसक हो चुके हैं। – Slide número 3
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परमेश्वर ने नूह को बताया कि वह इस दुष्टता का अंत पृथ्वी पर जल प्रलय भेज कर करेगा। लेकिन नूह और उसका परिवार बच जांएगे। – Slide número 4
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नूह को एक बहुत बड़ा जहाज बनाने के निर्देश दिए गए और उसे जल रोधक गोंद से ढंकने के लिए कहा गया। जहाज 450 फुट लंबा, 75 फुट चौड़ा और 45 फुट ऊॅंचा हो। उसके तीन भाग हों और उसकी छत मे हवा आने के लिए एक खुली जगह हो। उसका एक द्वार भी हो। – Slide número 5
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नूह और उसके पुत्रों ने एक साथ जहाज को बनाना शुरू कर दिया। – Slide número 6
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आसपास के दुष्ट लोग सोचने लगे कि नूह और उसके पुत्र क्या कर रहे हैं। – Slide número 7
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उत्पत्ति 7 जब जहाज बन बया तो परमेश्वर ने नूह से कहा कि 7 दिन के बाद प्रलय आ जाएगा। नूह ने अपने तीनों पुत्रों और उनकी पत्नियों से अपनी सारी चीजों के साथ जहाज पर चढ़ने के लिए कहा। उन्होंने जहाज पर आने वाले सारे जानवरों के लिए भी भोजन जमा कर लिया। – Slide número 8
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सभी शुद्ध पशुओं के सात जोडे़ नर और मादा सहित जहाज में लाए गए दो जोडे़ अशुद्ध जानवरों को भी जहाज पर चढ़ा लिया गया।(अशुद्ध जानवर थे छिपकलियां, सूअर, छछूंदर, उल्लू, चूहे, कौवे, नेवला - देखें लैव्यवस्थ 11, व्यवस्थाविवरण 14) – Slide número 9
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इसके बाद परमेश्वर ने जहाज के द्वार को बंद कर दिया और वर्षा शुर हो गई। और 40 दिनों तक भारी वर्षा होती रहीं। नदियों में बाढ़ आ गई और प्रलय का पानी बढ़ता ही चला गया। – Slide número 10
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जैसे ही पानी बढ़ा, जहाज तैरने लगा। – Slide número 11
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जब तक पानी ने सारे ऊंचे पहाड़ों को डूबा नहीं दिया तब तक पानी बढ़ता ही रहा। जहाज के बाहर सारे जीव जन्तु मर गए। – Slide número 12
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प्रलय 150 दिनों तक चलता रहा लेकिन जो प्राणी जहाज के अंदर थे वे सुरक्षित बचे रहे। – Slide número 13
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उत्पत्ति 8 प्रलय का पानी जैसे ही कम हुआ तो जहाज अरारात पर्वत पर टिक गया। – Slide número 14
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40 दिनों के बाद नूह ने एक कौवे को बाहर भेजा लेकिन उसे बैठने क लिए कोई स्थान न मिला। – Slide número 15
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इसके बाद उसने एक कबूतर को भेजा। वह उड़ते हुए सूखी भूमि ढूंढने लगा। – Slide número 16
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लेकिन वह कहीं भी उतर नहीं सका इसलिए वह जहाज पर वापस आ गया। नूह ने हाथ बढ़ाकर उसे जहाज के अंदर ले लिया। – Slide número 17
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सात दिन बाद उसने कबूतर को फिर से भेजा। – Slide número 18
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देर शाम को कबूतर एक ताजा पत्ती को चोंच में लिए हुए आया। नूह जान गया कि पानी घट रहा है। – Slide número 19
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एक सप्ताह बाद उसने तीसरी बार कबूतर को बाहर भेजा लेकिन अब वापस लौटकर नहीं आया। नूह जान गया कि कबूतर ने सूखी भूमि को ढूंढ लिया था। – Slide número 20
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नूह ने जहाज की छत उतार दी, और देखा कि भूमि सूखती जा रही थी दो महीने बाद भूमि नूह के उतरने के लिए पर्याप्त सूख चुकी थी इसलि वह सारे जानवरों और अपने परिवार सहित बाहर आ गया। – Slide número 21
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जहाज से बाहर आने के बाद नूह ने एक वेदी बनाकर परमेश्वर के लिए बलिदान चढ़ाए। – Slide número 22
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परमेश्वर नूह के बलिदान से प्रसन्न हुआ और पृथ्वी और इसके प्राणियों को फिर से नष्ट न करने की प्रतिज्ञा की। परमेश्वर ने उससे कहा, जब तक पृथ्वी बनी रहेगी तब तक बोने और काटने का समय, सर्दी और गर्मी, रात और दिन कभी न रूकेंगे। – Slide número 23
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परमेश्वर ने एक मेघधनुष को आकाश में रख दिया। इसके बाद परमेश्व ने नूह से कहा ‘यह मेघधनुष इस प्रतिज्ञा का चिन्ह है कि सारी पृथ्वी पर फिर कभी भी ऐसा प्रलय नहीं आएगा।’ – Slide número 24
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