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दो चेले इम्माऊस के मार्ग पर

यीशु इम्माऊस की ओर यात्रा करने वाले दो शिष्यों को दिखाई देता है।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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यीशु को कब्र में रखे तीन दिन हो चुके थे और तीसरे दिन चेलों में से दो चेले यरूशलेम के मार्ग पर जा रहे थे। उनमे से एक क्लियोपास था। – स्लाइड 1
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वे इम्माऊस नामक गांव को जा रहे थे, जो यरूशलेम से सात मील की दूरी पर था। – स्लाइड 2
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और वे इन सब बातों पर जो हुई थीं, आपस में बातचीत करते जा रहे थे। और जब वे आपस में बातचीत और पूछताछ कर रहे थे। तो यीशु आप ही पास आकर उन के साथ हो लिया। परन्तु उन की आंखे ऐसी बन्द कर दी गई थी कि वे उसे पहचान न सके। – स्लाइड 3
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अपरिचित व्यक्ति ने उन से पूछा, ये क्या बातें हैं, जो तुम चलते चलते आपस में करते हो? वे उदास से खड़े रह गए। यह सुनकर, उनमें से क्लियोपास ने कहा क्या   तू यरूशलेम में अकेला परदेशी है जो नहीं जानता, कि इन दिनो में उस में क्या क्या हुआ है? – स्लाइड 4
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अपरिचित व्यक्ति ने उन से पूछा कौन सी बातें? – स्लाइड 5
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उन्होंने उस से कहा यीशु नासरी के विषय में महायाजकों और हमारे सरदारों ने उसे पकड़वा दिया, कि उस पर मृत्यु की आज्ञा दी जाए और उसे क्रूस पर चढ़वाया। परन्तु हमें आशा थी, कि यही इस्त्राएल को छुटकारा देगा। – स्लाइड 6
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और हम में से कई स्त्रियों ने भी हमें आश्चर्य में डाल दिया, जो भोर को कब्र पर गई थीं। कब्र खाली थी। तब हमारे साथियों में से कई एक कब्र पर गए, और जैसा स्त्रियों ने कहा था, वैसा ही पाया। – स्लाइड 7
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तब उसने उनसे कहा, है निर्बुद्धियों, और भविष्यद्वक्ताओं के सब बातों पर विश्वास करने में मन्दमतियों! क्या अवश्य न था कि मसीह ये दुख उठाकर अपने महिमा में प्रवेश करे? – स्लाइड 8
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अपरिचित व्यक्ति ने मूसा से और सब भविष्यद्वक्ताओं से आरम्भ करके सारे पवित्रशास्त्र में से, अपने विषय में की बातों का अर्थ उन्हें समझा दिया कि मसीह किस प्रकार मृतकों में से जी उठेगा। – स्लाइड 9
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इतने में वे उस गांव के पास पहुंचे, जहां वे जा रहे थे, और उसके ढंग से ऐसा जान पड़ा, की वह आगे बढ़ना चाहता है। परन्त उन्होंने यह कहकर उसे रोका, की  हमारे साथ रह क्योंकि संध्या हो चली है और दिन अब बहुत ढल गया है। तब वह उन के साथ रहने के लिये भीतर गया। – स्लाइड 10
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अपरिचित व्यक्ति उन के साथ भोजन करने बैठा, तो उस ने रोटी लेकर धन्यवाद किया, और उसे तोड़कर उन को देने लगा। तो उन की आंखे खुल गईं और  उन्होंने यीशु को पहचान लिया। – स्लाइड 11
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और वह उन की आंखों से छिप गया। उन्होंने आपस में कहा - जब वह मार्ग में हम से बाते करता था, और पवित्र शास्त्र के अर्थ हमें समझाता था, तो क्या हमारे मन में उत्तेजना न उत्पन्न हुई? – स्लाइड 12
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वे उसी घड़ी उठकर यरूशलेम को लौट गए। – स्लाइड 13
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उन्होंने ग्यारह चेलों और उन के साथियों को इकट्ठे पाया। उन्होंने सबको सारा हाल बता दिया। जिस घर में वे थे वह बंद था। – स्लाइड 14
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वे ये बातें कह ही रहे ये, की अचानक यीशु उन के बीच में आ खड़ा हुआ और उन से कहा तुम्हें शान्ति मिले। परन्तु वे घबरा गए और सोचने लगे, कि हम किसी भूत को देखते हैं। – स्लाइड 15
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यीशु ने उन से कहा, क्यों घबराते हो और तुम्हारे मन में क्यों सन्देह उठते हैं? मेरे हाथ और मेरे पांव को देखो कि मैं वहीं हूँ - मुझे छूकर देख, क्योंकि आत्मा के हड्डी मांस नही होता जैसा मुझ में देखते हो। यह कहकर उस ने उन्हें अपने हाथ पांव दिखाए। – स्लाइड 16
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जब आनन्द के मारे चेलों को प्रतीति न हुई, और आश्चर्य करते थे, तो यीशु ने उन से पूछ क्या यहां तुम्हारे पास कुछ भोजन है? उन्होंने उसे भूनी मछली का टुकड़ा दिया। उस ने लेकर उन के साम्हने खाया। – स्लाइड 17
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तब यीशु ने पवित्र शास्त्र समझाने के लिये चेलों का मन खोल दिया और उन से कहा, यों लिखा है कि मसीह दुःख उठाएगा और तीसरे दिन मरे हुओं में से जी उठेगा। और यरूशलेम से लेकर सब जातियों में मन फिराव का और पापों की क्षमा का प्रचार, उसी के नाम से किया जाएगा। इसके बाद यीश उनकी आँखों के सामने से ओझल हो गया। – स्लाइड 18
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