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दाऊद, बेतशेबा और नातान का दृष्टांत

भविष्यद्वक्ता नातान ने व्यभिचार और हत्या के बारे में दाऊद का सामना किया।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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वसंत ऋतू में, दाऊद ने योआब के नेतृत्व में अपनी सेना को अमोंनियो के शहर राबाह की घेराबंदी करने के लिए भेजा। दाऊद ने यरूशलेम में अपने घर पर ही रहने का निश्चय किया। – स्लाइड 1
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और एक शाम दाऊद अपने महल की छत पर टहल रहा था और उसने एक अति सुंदर स्त्री को नहाते हुए देखा और दाऊद ने किसी को भेजकर पता करवाया की वह स्त्री कौन थी। उसे बताया गया कि वह हित्ती उर्रियाह की पत्नी बेतशेबा है जो दाऊद की सेना में युद्ध पर गया हुआ था। – स्लाइड 2
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दाऊद ने दूत भेजकर बेतशेबा को बुलवाया। और जब वह आयी तो उसने उसे फुसलाया और उसके साथ सो गया । इसके बाद बेतशेबा अपने घर वापस चली गयी। – स्लाइड 3
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और कुछ समय बाद बेतशेबा ने दाऊद के पास संदेश भेजकर कहा वह गर्भवती है। – स्लाइड 4
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दाऊद ने हित्ती उर्रियाह के पास सन्देश भेजकर उसे मिलने के लिए बुलवाया। और उर्रियाह घेराबंदी छोड़कर यरूशलेम वापस आ गया। – स्लाइड 5
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दाऊद ने उर्रियाह से पूछा की घेराबंदी किस प्रकार चल रही है और उसे अपनी पत्नी के साथ रात बिताने के लिए भेजा। वह आशा कर रहा था कि उर्रियाह अपनी पत्नी के साथ सोएगा और बाद में बालक उसका ठहरेगा। लेकिन उर्रियाह ने उचित नही समझा कि सारी सेना तम्बुओं में रहे और वह अपने घर जाकर सोये। इसलिए वह अन्य सेवकों के साथ महल के प्रवेशद्वार पर ही सो गया। – स्लाइड 6
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और अगले दिन दाऊद को पता चला कि उर्रियाह ने बेतशेबा के साथ रात नही बिताई। तो उस दिन उसने उसे नशे में धुत कर दिया। लेकिन एक बार फिर उर्रियाह घर नही गया बल्कि एक चटाई पर महल के प्रवेशद्वार के सामने सो गया। इसके बाद उर्रियाह राबाह में घेराबंदी के लिए वापस चला गया। – स्लाइड 7
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दाऊद ने एक आज्ञा के साथ योआब को पत्र लिखा। उर्रियाह को सबसे अधिक भीषण लड़ाई कि जगह पर आगे कि तरफ रखना और तुम लोग पीछे हट जाना ताकि वह हमले में मारा जाये। – स्लाइड 8
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योआब ने आज्ञा का पालन किया। उसने उर्रियाह को उस स्थान पर नियुक्त किया जहाँ वह जानता था कि नगर के सबसे मजबूत रक्षक होंगे और योआब के कई सैनिक मारे गए, उनमे से एक उर्रियाह भी था जो तीरों के लगने से मारा गया था। – स्लाइड 9
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और जब बेतशेबा ने सुना कि उसका पति मर चुका था तो उसने उसके लिए शोक किया। और जब शोक का समय समाप्त हुआ, दाऊद उसे अपने घर ले आया और वह उसकी पत्नी बन गयी और उसके पुत्र को जन्म दिया। परन्तु दाऊद के कार्यों ने यहोवा को बेहद नाराज़ कर दिया। – स्लाइड 10
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और यहोवा ने नातान को दाऊद को यह दृष्टान्त सुनाने के लिए भेजा। – स्लाइड 11
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‘कहीं पर दो पुरुष थे, एक धनी था और दूसरा निर्धन। और धनी व्यक्ति के पास बहुत संख्या में भेडें और मवेशी थे, लेकिन उस निर्धन के पास केवल एक छोटी भेड़ को छोड़कर कुछ नही था। उसने उसे अपने बच्चों की तरह पाला पोसा। वह अपना भोजन उसके साथ बाँटता वह उसके कटोरे में से पीती और उसकी बाँहों में सोती थी। वह उसके लिए पुत्री के समान थी। – स्लाइड 12
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और अब एक यात्री उस धनी व्यक्ति के और पास आया , लेकिन इसके बजाए कि वह अपनी भेड़ों में से लेकर उस यात्री के लिए भोजन तैयार करता उसने निर्धन कि भेड़ को चोरी किया और उसे मारकर अपने अतिथि के लिए भोजन तैयार किया। – स्लाइड 13
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दाऊद आगबबूला हो उठा। यहोवा के जीवन की शपथ उस मनुष्य को जिसने यह किया है मार डाला जायेगा! उसने नातान से कहा कि उसे मेमने का चार गुना भरना पड़ेगा, क्योंकि उसने बहुत ही घृणित कार्य किया है और उसे दया भी नहीं आयी। – स्लाइड 14
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नातान ने दाऊद से कहा, वो मनुष्य तू ही है! और यहोवा यह कहता है, ‘’मैंने तुझे इस्राएल के ऊपर राजा नियुक्त किया, मैंने तुझे शाऊल से छुडाया। मैंने तेरे स्वामी का घर और उसकी पत्नियाँ तुझे दी। मैंने तुझे समस्त इस्राएल और यहूदा दिया। और मैंने तुझे और भी बहुत कुछ दिया होता। लेकिन क्यों तूने अनाज्ञाकारिता की और ऐसी बुराई की? तूने हित्ती उरियाह को मरवाकर उसकी पत्नी को अपनी कर लिया इसलिए आज से तेरे परिवार से लड़ाई कभी दूर न होगी। – स्लाइड 15
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दाऊद चिल्लाया, मैंने यहोवा के विरूद्ध पाप किया है। नातान ने उत्तर दिया प्रभु ने तेरे पाप को दूर किया है। लेकिन तूने यहोवा की मानहानी की है इसलिए जो पुत्र तुझसे उत्पन्न हुआ है मर जाएगा। – स्लाइड 16
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नातान के अपने घर चले जाने के बाद, जो बालक बेतशेबा और दाऊद से उत्त्पन्न हुआ था वह बीमार हो गया। दाऊद ने यहोवा से बालक की जान छोड़ने की विनती की। उसने उपवास किया और टाट ओढकर जमीन पर पड़ा रहने लगा। – स्लाइड 17
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और सात दिन बाद बालक मर गया। दाऊद को दुखद समाचार सुनाया गया। उसने प्रार्थना और उपवास करना बंद किया और बालक को देखने और अपनी पत्नी को धीरज बंधाने चला गया। – स्लाइड 18
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और कुछ समय बाद बेतशेबा और दाऊद के एक और पुत्र ने जन्म लिया उन्होंने उसका नाम सुलेमान रखा। और यहोवा ने उससे प्रेम किया और नातान नबी के जरिये कहला भेजा की उसे जेदिदाह नाम से आशीषित कयता जाये जिसका अर्थ है ‘यहोवा का मित्र’ और सुलेमान इस्राएल का अगला राजा होने के लिए बढ़ता रहा। – स्लाइड 19
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