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एस्तेर की कहानीःभाग 3- एस्तेर का यहूदियों को बचाने की योजना बनाना

रानी एस्तेर हामान को नष्ट करने और यहूदियों को छुड़ाने का कार्य करती है।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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अध्याय 7: हामान का रानी एस्तेर के भोज में बुलवाया गया, जो उसने राजा और हामान के लिए तैयार किया था। – स्लाइड 1
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जैसे ही वे दाखमधु पी रहे थे, राजा ने एस्तेर से पूछा, ‘तेरी क्या विनती है? यदि तू मेरा आधा राज्य भी मांगेगी तो तुझे दिया जाएगा। एस्तेर ने कहा ‘मेरी विनती यह है कि तू मेरा और मेरे लोगों का जीवन बचा। हमे नष्ट किया जानेवाला है।’ राजा ने पूछा, ‘किसने तेरे जान लेने का साहस किया। – स्लाइड 2
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एस्तेर ने कहा, ‘हमारा शत्रु, यह धूर्त हामान’ है। हामान घबरा गया और राजा आग-बबूला होकर महल के बगीचे में चला गया। – स्लाइड 3
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हामान एस्तेर के सामने अपने जीवन की भीख मांगने लगा। जब राजा लौटा तो उसने हामान को एस्तेर के पलंग पर झुके हुए देखा। पहरेदारों को हामान को  पकड़ने के लिए बुलाया गया। राजा के सेवकों ने कहा, ‘हामान ने अपने घर के पास एक खंभा खड़ा करवाया है। वह मोर्दक को उस पर लटकाने की योजना बना रहा था। – स्लाइड 4
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राजा ने आज्ञा दी, ‘हामान को उस पर लटका दो और उसे घात करने के लिए बाहर ले जाया गया। इसके बाद राजा की जलजलाहट ठंड़ी हो गई। – स्लाइड 5
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अध्याय 8: उस दिन राजा ने एस्तेर को हामान की संपत्ति दे दी। एस्तेर ने राजा को बताया की मोर्दकै उसका चचेरा भाई है। राजा ने मोर्दकै को हामान की मुहर वाली अंगुठी दे दी। एस्तेर ने उसे हामान की धन-संपत्ति सौंप दिया। – स्लाइड 6
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एस्तेर राजा के पावों पर रोती हुई बैठ गई और उससे यहूदियों को मारने की दुष्ट योजना को रोकने की विनती करने लगी। और कहने लगी, ‘यदि राजा को अच्छा लगे तो हामान की योजना को रद्द करने के लिए एक पत्र लिख जाए। – स्लाइड 7
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राजा ने कहा, ‘क्योंकि हामान ने यहूदियों को ड़राया धमकाया इसलिए मैंने उसे उसी के खंभे पर लटकवा दिया और उसकी संपत्ति एस्तेर को दे दी। ‘मेरे नाम में एक और आज्ञा लिखो जिस पर मेरी अंगूठी की छाप हो। जो पत्र मेरे नाम से लिखा जाए उसे बदला नहीं जा सकता। – स्लाइड 8
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शाही सचिवों को बुलाया गया उन्हें एक नया कानून लिख कर दिया गया जिसमें यहूदियों को अपने ऊपर हमला करने वालों के खिलाफ अपना बचाव करने का अधिकार दिया गया। वे शत्रुओ की संपत्तियों भी लूट सकते थे। – स्लाइड 9
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नए कानून की प्रतियां 127 प्रांत में भेज दी गईं। सबको पता चल गया कि यदि कोई भी 12वे महीने की 13वीं तारीख को यहूदियों पर हमला करेगा तो वह नहीं बचेगा। – स्लाइड 10
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जब मोर्दकै महल से बाहर निकला तो वह मलमल के बैंजनी वस्त्र पहने था और उसके सिर पर एक मुकुट भी था। यहूदी समाचार सुनकर आनंद मनाने लगे और उनके शत्रु उनसे भयभीत हो गए। – स्लाइड 11
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अध्याय 9: 12वें महीने के 13वे दिन यहूदियों के शत्रु उन्हें नष्ट करने की सोच रहे थे। यहूदी अपने आपको बचाने के लिए एकत्र हो गए और उन्हें राज्य के प्रधानों  और राज्यपालों द्वारा सहायता दी गई। – स्लाइड 12
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जिस दल ने भी उन पर हमला किया उन्हें मार ड़ाला गया। – स्लाइड 13
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शूशन की राजधानी में हामान के 10 पुत्रों और अन्य 500 लोगों को जो यहूदियों से घृणा करते थे नष्ट कर दिया गया। लेकिन यहूदियों ने उनका सामान नहीं लूटा। यहूदियों को अगले दिन भी अपने विरोधियों से बदला लेने की अनुमति दी गई। जब 75,000 लोग प्रांत में यहूदियों को नष्ट करने की योजना बना रहे थे वे खुद ही नाश हो गए। – स्लाइड 14
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मोर्दकै ने इन घटनाओं को दर्ज कर लिया और यहूदियों को 12वे महीने की 14वीं व 15वीं तारीख के हर साल विजय के रूप मे मनाने के लिए कहा। हामान ने यहूदियों को मारने के लिए एक पर्ची ड़ाली थी जिस पूर कहा जाता था इसलिए इस उत्सव को पूरीम कहा जाता है। – स्लाइड 15
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यह भोज और आनंद का दिन था। लोगों ने एक दूसरे को उपहार दिये। यहूदी आज के दिन तक इस रीति को मानते हैं और मनाते है। – स्लाइड 16
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