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अब्राहम और इसहाक

अब्राहम, सारा और इसहाक। परमेश्वर अब्राहम के विश्वास की परीक्षा लेता है।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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यहोवा ने अब्राहम और उसकी पत्नी सारा से प्रतिज्ञा की थी कि वह उसे एक पुत्र देगा और उसके वशंज तारों की तरह अनगिनत होंगे। लेकिन परेशानी ये थी कि वे दोनों बच्चों को जन्म देने के लिए काफी बूढ़े हो चुके थे। (उत्पत्ति 12:1-3,15:14, 17:15-22, 18 9-15) – स्लाइड 1
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अब्राहम एक वारिस पाने के लिए इतना उतावला हो गया था कि उसे सारा की दासी हाजिरा से एक बेटा इश्माएल हुआ। यहोवा ने उससे प्रतिज्ञा की और कहा की इश्माएल के वंशज भी एक महान देश होंगे। जब यहोवा ने अब्राहम से कहा कि उस सारा के जरिए एक पुत्र होगा तो अब्राहम खुद पर हंस पड़ा क्योंकि वह बहुत बूढ़े हो चुका था। (उत्पत्ति 16, 17:15-22) – स्लाइड 2
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जब सारा ने परमेश्वर की ओर से भेजे गए तीन आगंतुकों को यह कहते हुए सुना कि एक वर्ष के भीतर उसके पास वह पुत्र होगा जिसकी प्रतिज्ञा परमेश्वर ने की थी, वह भी अविश्‍वास में हँसी। अब उनके लिए बच्चे पैदा करना नामुमकिन था। (उत्पत्ति 18:9-15)। – स्लाइड 3
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फिर भी यहोवा सारा के प्रति दयालु था और उसने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की और अगले ही साल आश्चर्यजनक रूप से अब्राहम और सारा के एक पुत्र उत्पन्न हुआ। – स्लाइड 4
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अब्राहम जो अब सौ वर्ष का था, अपने नवजात पुत्र का नाम इसहाक रखा। इसहाक का अर्थ है 'वह हंसता है'। इब्राहीम ने बड़े प्यार से अपने बेटे को एक बच्चे से एक छोटे लड़के के रूप में विकसित होते हुए देखा। – स्लाइड 5
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तब परमेश्वर ने अब्राहम की परीक्षा लेने का निश्चय किया। 'इसहाक, अपने पुत्र को जिसे तू प्रेम करता है, मोरिय्याह के देश में ले जा और उसे उस पहाड़ पर बलि चढ़ा जो मैं तुझे दिखाऊंगा। अब्राहम जानता था कि परमेश्वर नहीं चाहेगा कि वह उसके बेटे को मार डाले, यह परमेश्वर के नियम के विरुद्ध था, लेकिन वह यह भी जानता था कि उसे परमेश्वर पर भरोसा करना चाहिए और उसकी आज्ञा का पालन करना चाहिए। उसे क्या करना चाहिए? – स्लाइड 6
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अगले दिन उसने होमबलि क लिए पर्याप्त लकड़ी काटी, और उसे गधे पर लादकर अपने पुत्र इसहाक और अन्य दो सेवकों के साथ मोरियाह की ओर चल पड़ा। – स्लाइड 7
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तीन दिन की यात्रा के बाद, उसन थोड़ी दूरी से पहाड़ को देखा उसने दोनों सेवकों को नीचे इंतजार करने लिए के लिए कहा और अपने पुत्र को लेकर यहोवा का आराधना करने के लिए पहाड पर चले गये। – स्लाइड 8
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अब्राहम ने होमबली के लिए लकड़ी लेकर इसहाक पर लाद दी और खुद आग और छुरी लेकर चल पड़ा। – स्लाइड 9
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रास्ते में इसहाक ने पूछा, ‘पिताजी हमारे पास आग और लकड़ी तो है, परंतु होमबली के लिए मेमना कहाँ है? अब्राहम ने उत्तर दिया, ‘यहोवा आप ही होमबलि के लिए मेमने का प्रबंध करेगा।’ और दोनों ने पहाड की चोटी तक अपनी चढ़ाई जारी रखी। – स्लाइड 10
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और चोटी पर, अब्राहम ने एक वेदी बनाई और उसपर लकड़ी रखी। – स्लाइड 11
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फिर उसने इसहाक को बांधकर लकडि़यों के ऊपर लिटा दिया और उसने अपना हाथ बढ़ाकर छुरी ली.........‘अब्राहम! अब्राहम! यहोवा के एक दूत ने परीक्षा को समाप्त किया। स्वर्गदूत ने कहा कि बालक पर हाथ मत चला। मैं जानता हॅूं कि तू यहोवा का भय मानता है क्योंकि तूने परमेश्वर को अपने एकलौते पुत्र से बढ़कर जाना है।’ – स्लाइड 12
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अब्राहम ने एक मेढ़े को झाडि़यो में अपने सींगो के कारण फंसा देखा। उसने मेढ़े को लिया और उसे यहोवा के सामने इसहाक के बजाए होमबलि करके चढ़ाया फिर उसने उस स्थान का नाम रखा, ‘यहोवा प्रबंध करेगा’। – स्लाइड 13
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इसके बाद स्वर्गदूत ने फिर से कहा, ‘क्योंकि तूने अपने एकलौत पुत्र को भी न रख छोड़ा, इसलिए यहोवा तुझे आशीष देगा और तेरे वंशज गिनती में आकाश के तारों औद समुद्र किनारे की रेत के किनकों के बराबर होंगे। और तेरे संतान के कारण सारे देशों के लोग और पृथ्वी आशीषित होंगे क्योंकि तूने मेरी आज्ञा का पालन किया है।’ – स्लाइड 14
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इसके बाद अब्राहम और इसहाक इंतजार कर रहे सेवकों के पास लौट आए और दक्षिण मे बेर्शेबा की ओर चल पड़े जहा पर वे रहा करते थे। – स्लाइड 15
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