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अबशालोम का राजा दाऊद से विद्रोह करना

अबशालोम विद्रोह करता है और एक सेना इकट्ठा करता है।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
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(2 शमुएल 13 और 14) दाऊद के विभिन्न पत्नियों के द्वारा कई पुत्र उत्पन्न हुए। अबशालोम उसका तीसरा बड़ा बेटा था। दाऊद का सबसे बड़ा बेटा अम्नोन था। – स्लाइड 1
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अबशालोम की माता गेशुर के राजा की बेटी थी। अबशालोम कि एक बहन भी थी जिसका नाम तामार था। और जब अम्नोन ने तामार के साथ दुष्कर्म किया तो परिवार में तनाव बढ़ गया। और जब अबशालोम को अपनी बहन के साथ हुई घटना का पता चला तो उसने बदला लेने कि योजना बनाई। – स्लाइड 2
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दो साल बाद, अबशालोम ने अपने सेवकों द्वारा अम्नोन को नशे में धुत करवाकर मरवा डाला। और राजा दाऊद बहुत दिनों तक अपने पुत्र के लिए शोक करता रहा। – स्लाइड 3
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और अबशालोम भाग गया और अगले तीन वर्षों तक गेशुर में छुपा रहा। दाऊद अबशालोम से मिलना तो चाहता था परन्तु उसे क्षमा नही कर पा रहा था। दाऊद के सेनापति ने एक बुद्धिमान महिला के जरिये इस परेशानी को हल करने की ठानी और उसे बुलवा लिया। – स्लाइड 4
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और वह महिला विधवा की वेशभूषा में शोक करती हुई आई। उसने बताया कि मेरे दो पुत्र थे और उनमे लड़ाई हो गयी और एक ने लड़ाई में दूसरे को मार डाला। और अब सभी कह रहे हैं कि इस पुत्र को हमे सौंप दो ताकि हम इसे इसके भाई कि हत्या के जुर्म के लिए मार डालें, मेरा यही पुत्र सब मेरा कुछ है। दाऊद ने कहा जा घर चली जा मैं उसकी हत्या के आदेशों को रोकने कि आज्ञा दूंगा। उस महिला ने कहा, ‘जब राजा यह कहता है, क्या वह अपने बहिष्कृत पुत्र को वापस न बुलाकर खुद को दोषी नही ठहराता? – स्लाइड 5
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दाऊद ने अबशालोम को येरूशलम में वापस बुलवाया हालाँकि वह एक दम उससे मिलने नही गया परन्तु बाद में उसे बुलवा भेजा। अबशालोम सिर झुकाए हुए अपने पिता के पास आया और उसके पिता ने उसे चूमा। – स्लाइड 6
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अबशालोम बहुत घमंडी हो गया। उसने अपने लिए एक रथ और घोड़े लिए और पचास आदमी अपने रथ के आगे-आगे चलने के लिए ले लिए। और सभी ने उसके रूप कि प्रशंसा की। अबशालोम को अपने बालों के ऊपर गर्व था जिन्हें वह साल में एक बार काटा करता था। उसके बालों का वजन २०० शेकेल था (2.2 कि.ग्रा) – स्लाइड 7
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अबशालोम नगर के द्वार के पास बैठा करता और उन लोगों से मिलता था जो राजा के पास न्याय के लिए आते थे। वह कहता, ‘मैं जानता हों कि तुम इस मामले सही हो, यह शर्म की बात कि राजा के पास इन मामलो को सुनवाई के लिए कोई सहायक नहीं है। – स्लाइड 8
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‘काश मैं न्यायी होता – स्लाइड 9
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और जब कोई आकर उसके सामने झुकता, तो अबशालोम उसे ऐसा नही करने देता बल्कि उससे हाथ मिलाता! इस प्रकार से अबशालोम इस्राएलियों में प्रसिद्ध हो गया। – स्लाइड 10
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और प्रसिद्ध होने के चार साल बाद, अबशालोम ने अपने पिता दाऊद के स्थान पर राजा बनने की योजना बनाई। – स्लाइड 11
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वह राजा के पास गया और उससे अनुमति मांगी कि वह हेब्रोन में जाकर अपने वादे के अनुसार बलि चढ़ाए जो उसने यहोवा से किया था कि वह जब यहोवा उसे गेशुर से वापस लाएगा तो वह यहोवा को बलिदान चढ़ाएगा। दाऊद ने उसे जाने की अनुमति दे दी। – स्लाइड 12
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अबशालोम और उसके २०० अथिति हेब्रोन को चले गए। और जब वह हेब्रोन पहुंचा तो उसने संदेशवाहकों को यह कहकर इस्राएल में मनादी करने भेजा, कि जैसे ही तुम लोग तुरही की आवाज सुनो तो जान जाओगे कि अबशालोम की हेब्रोन में ताजपोशी हो चुकी है। – स्लाइड 13
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और अबशालोम के विद्रोह के समर्थन में लोग एकत्रित होने शुरू हो गए, दाऊद के विश्वसनीय सलाहकारों में से एक अहिथोफेल ने अबशालोम को अपने समर्थन की घोषणा की। अबशालोम और उसकी विद्रोही सेना येरूशलम कि तरफ कूच करने लगी। – स्लाइड 14
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और एक संदेशवाहक ने दाऊद को बताया कि सारे इस्राएली तेरे विरुद्ध षडयंत्र में अबशालोम के साथ हो गए हैं! दाऊद ने अपनी ६०० लोगों की ईमानदार टुकड़ी और अपने घराने के साथ भाग जाने का निर्णय लिया। – स्लाइड 15
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और नगर में दाऊद और उसके परिजनों के पलायन के बाद घोर उदासी छा गयी। दाऊद ने अपने शोक के चिन्ह के रूप में अपने हाथ-पैर ढांपे और रोता हुआ चला गया। और उसके संगी लोगों ने भी अपने सिर ढांपे और रोये। – स्लाइड 16
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और जब अबशालोम यरूशलेम पहुंचा तो उसने सोचा कि अब उसे आगे क्या करना चाहिए। दाऊद के पूर्व सलाहकार ने उससे विनती की कि वह दाऊद का पीछा करे क्योंकि वह थका हुया और हताश है। दाऊद ने अपने पीछे एक ईमानदार सलाहकार हुशे को छोड़ा था ताकि वह अबशालोम को मामूली सलाह दे। हुशे ने अबशालोम को दाऊद का पीछा न करने की सलाह दी और कहा कि दाऊद एक महान योद्धा है और उसके साथ अन्य योद्धा भी हैं। अबशालोम ने हुशे कि सलाह मान ली जिससे दाऊद को वहाँ से दूर भाग जाने में मदद मिली, अबशालोम ने जब अहिथोफेल की सलाह नही मानी तो उसको लोगों के सामने शर्मिंदा होना पड़ा इसलिए उसने अपने गृहनगर में जाकर आत्महत्या कर ली। – स्लाइड 17
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दाऊद भागकर महनैम में चला गया जहाँ लोग उसके लिए खाने का सामान ले आ  उसने योआब, अबीशै और इतै की अगुवाई में अपनी सेना का पुनर्गठन किया। उन्होंने दाऊद से विनती की और कहा कि वह युद्ध में उनके साथ न जाये अबशालोम और उसकी सेना दाऊद का पीछा करने के लिए चले और एप्रैम के जंगल में युद्ध आरम्भ हो गया। – स्लाइड 18
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और सारे जंगल में युद्ध छिड गया और २०,००० लोग मारे गए और युद्ध के दौरान अबशालोम दाऊद की सेना की तरफ आ गया और एक खच्चर पर भाग खड़ा हुआ। और जैसे ही खच्चर एक बड़े बांजवृक्ष के मोटी डालों नीचे पहुंचा तो उसके बाल शाखाओं में फंस गये और वह हवा में झूल गया। और दाऊद के लोगों में से एक ने उसे देख लिया और योआब को बता दिया। – स्लाइड 19
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योआब ने पूछा कि तूने उसे क्यों नही मार डाला। तो सैनिक ने कहा कि हम सब ने राजा को आपसे, अबीशै और इतै से कहते हुए सुना था, कि मेरी खातिर छोटे अबशालोम को हानि न पहुंचाना। योआब ने उत्तर दिया बकवास बंद करो। इसके बाद उसने तेज खंजर लेकर अबशालोम के हृदय में उतार दिया क्योंकि वह बांजवृक्ष की शाखाओं में लटका हुआ था। – स्लाइड 20
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उन्होंने अबशालोम की लाश को जंगल में ही एक गहरे गड्ढे में फेंक दिया और उसका मुंह पत्थरों से भर दिया। और अबशालोम की सेना अपने घरों को भाग गयी। – स्लाइड 21
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और एक संदेशवाहक ने दाऊद को बताया कि धन्य है यहोवा जिसने तेरे शत्रुओं को जिन्होंने तेरे विरूद्ध खड़े होने का साहस किया था नष्ट कर डाला। – स्लाइड 22
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और राजा ने पूछा ‘अबशालोम का क्या हुआ क्या वह ठीक है? और संदेशवाहक ने उत्तर दिया कि जो हाल तेरे शत्रुओं का हुआ वही जवान अबशालोम का भी हुआ। – स्लाइड 23
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इसके बाद राजा आसुओं से भर गया और अपने कमरे के ऊपरी भाग में जाकर कहने लगा मेरे पुत्र, मेरे पुत्र अबशालोम काश मै तेरे स्थान पर मर जाता! हे अबशालोम मेरे पुत्र, मेरे पुत्र और जैसे ही लोगों ने राजा का अपने पुत्र के लिए गहरा दुःख देखा तो युद्ध जीतने का उनका आनन्द गहरे शोक में बदल गया – स्लाइड 24
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