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वह मनुष्य जिसने कभी हार नहीं मानी

हमें लगातार प्रार्थना करने के लिए प्रोत्साहित करने वाला एक दृष्टान्त।|
योगदानकर्ता लैम्बसांग्स
CC BY-NC
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यीशु के मित्र उसके पास आए और उससे पूछा कि प्रार्थना कैसे करनी चाहिए। यीशु ने उन्हें यह कहानी सुनाई। – स्लाइड 1
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एक आदमी के घर देर रात कुछ अप्रत्याशित मेहमान आये। उसके शहर तक पहुँचने क लिए काफी दूर तक चलने के बाद वे थक गए थे और बहुत भूखे थे। लेकिन उस आदमी के पास अपने अप्रत्याशित मेहमानों के लिए भोजन नहीं था। – स्लाइड 2
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आधी रात के करीब वह आदमी अपने दोस्त से कुछ रोटी उधार लेने गया। वह जानता था कि वह पहले से ही सो चुका होगा, लेकिन उस आदमी के मेहमानो को खाने के लिए कुछ चाहिए था। – स्लाइड 3
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उसका दोस्त जाग गया जब उसने उस आदमी को रोटी के लिए चिल्लाते हुए सुना। 'चले जाओ,' उसने कहा, 'घर बंद है और हम सब बिस्तर पर हैं। कल फिर आना।' – स्लाइड 4
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वह आदमी नहीं रुका. वह अपने दोस्त को पुकारता रहा। 'मुझे अपने मेहमानो के लिए तीन रोटियाँ चाहिए,' वह चिल्लाया। 'जब तक आप मुझे कुछ नहीं देंगे, मैं नहीं जाऊँगा।' – स्लाइड 5
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आख़िरकार घर का आदमी और नहीं सह सका। वह बिस्तर से उठा और अपने दोस्त को उसकी ज़रूरत की रोटी देने के लिए रसोई में गया। – स्लाइड 6
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यीशु ने कहा कि उस आदमी को वह मिल गया जिसकी उसे ज़रूरत थी क्योंकि उसने कभी हार नहीं मानी और हमें प्रार्थना करते समय उस आदमी की तरह बनना चाहिए। – स्लाइड 7
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यीशु ने कहा, 'क्योंकि जो कोई माँगता है, उसे मिलता है; और जो ढूँढ़ता है, वह पाता है; और जो खटखटाता है, उसके लिए खोला जाएगा- बस हार मत मानना।' – स्लाइड 8
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