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बंदीगृह में यूसुफ

यूसुफ पर झूठा आरोप लगाकर उसे बंदीगृह में डाल दिया गया।
योगदानकर्ता योमिनिस्ट्री
CC BY-NC-ND
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जब यूसुफ मिस्र में पहुंचाया गया, तब पोतीपर नाम एक मिस्री, जो फिरौन का हाकिम, और जल्लादों का प्रधान था, उसने उसको इश्माएलियों के हाथ, से जो उसे वहां ले गए थे, मोल लिया। और यूसुफ अपने मिस्री स्वामी के घर में रहता था, और यहोवा उसके संग था; सो वह भाग्यवान पुरूष हो गया। उत्पत्ति 39:1-2 – स्लाइड 1
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यूसुफ सुन्दर और रूपवान् था। इन बातों के पश्चात ऐसा हुआ, कि उसके स्वामी की पत्नी ने यूसुफ की ओर आंख लगाई; और कहा, मेरे साथ सो। परन्तु उसने अस्वीकार किया...और ऐसा हुआ, कि वह प्रति दिन यूसुफ से बातें करती रही, पर उसने उसकी न मानी, कि उसके पास लेटे वा उसके संग रहे। उत्पत्ति 39:6–10 – स्लाइड 2
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एक दिन क्या हुआ, कि यूसुफ अपना काम काज करने के लिये घर में गया, और घर के सेवकों में से कोई भी घर के अन्दर न था। तब उस स्त्री ने उसका वस्त्र पकड़कर कहा, मेरे साथ सो, पर वह अपना वस्त्र उसके हाथ में छोड़कर भागा, और बाहर निकल गया। उत्पत्ति 39:11-12 – स्लाइड 3
4
यूसुफ के स्वामी ने अपनी पत्नी की ये बातें सुनकर, कि तेरे दास ने मुझ से ऐसा ऐसा काम किया, यूसुफ के स्वामी का कोप भड़का। और यूसुफ के स्वामी ने उसको पकड़कर बन्दीगृह में, जहां राजा के कैदी बन्द थे, डलवा दिया: सो वह उस बन्दीगृह में रहने लगा। उत्पत्ति 39:19–20 – स्लाइड 4
5
सो बन्दीगृह के दरोगा ने उन सब बन्धुओं को, जो कारागार में थे, यूसुफ के हाथ में सौंप दिया; और जो जो काम वे वहां करते थे, वह उसी की आज्ञा से होता था। बन्दीगृह के दरोगा के वश में जो कुछ था; क्योंकि उस में से उसको कोई भी वस्तु देखनी न पड़ती थी; इसलिये कि यहोवा यूसुफ के साथ था; और जो कुछ वह करता था, यहोवा उसको उस में सफलता देता था। उत्पत्ति 39:22–23 – स्लाइड 5
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इन बातों के पश्चात ऐसा हुआ के राजा के पिलानेहारे और पकानेहारे ने अपने स्वामी का कुछ अपराध किया। तब फिरौन ने अपने उन दोनो हाकिमों पर, अर्थात पिलानेहारों के प्रधान, अर पकानेहारों के प्रधान पर क्रोदित होकर उन्हें कैद करा के जल्लादों के प्रधान के घर के उसी बन्दीगृह में, जहां युसुफ बन्धुआ था, डलवा दिया। उत्पत्ति 40:1–3 – स्लाइड 6
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तब पिलानेहारों का प्रधान अपना स्वपन यूसुफ को यों बताने लगा: कि मैंने स्वप्न में देखा, कि मेरे सामने दाखलता है; और उस दाखलता में तीन डालियां हैं: और उसमें मानो कलियां लगी हैं, और वे फूलीं और उसके गुच्छों में दाक लगकर पक गई: और फिरौन का कटोरा मेरे हाथ में था : सो मैंने उन दाखों को लेकर फिरौन के कटोरे में निचोड़ा, और कटोरे को फिरौन के हाथ में दिया। उत्पत्ति 40:9–11 – स्लाइड 7
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यूसुफ ने उस से कहा, इसका व्याख्या यह है; कि तीन डालियों का अर्थ तीन दिन है : सो अब से तीन दिन के भीतर तेरा सर ऊँचा करेगा, और फिर से तेरे पद पर तुझे नियुक्त करेगा, और तू पहले की नाईं फिरौन का पिलानेहारा होकर उसका कटोरा उसके हाथ में फिर दिया करेगा उत्पत्ति 40:12–13 – स्लाइड 8
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सो जब तेरा भला हो जाए तब मुझे स्मरण करना, और मुझ पर कृपा करके फिरौन से मेरी चर्चा चलाना, अर इस घर से मुझे छुड़वा देना। क्योंकि सचमुच इब्रानियों के देश से मुझे चुरा कर ले आए हैं, और यहां भी मैंने कोई ऐसा काम नहीं किया, जिसके कारण मैं इस कारागार में डाला जाऊं। उत्पत्ति 40:14–15 – स्लाइड 9
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यह देखकर, कि उसके स्वपन का फल अच्छा निकला, पकानेहारों के प्रधान ने यूसुफ से कहा, मैंने भी स्वपन देखा है, वह यह है : मैंने देखा, कि मेरे सिर पर सफेद रोटी की तीन टोकरियां हैं : और ऊपर की टोकरी में फिरौन के लिए सब प्रकार की पकी पकाई वस्तुएं हैं; और पक्षी मेरे सिर पर की टोकरी में से उन वस्तुओं को खा रहे हैं। उत्पत्ति 40:16–17 – स्लाइड 10
11
यूसुफ ने कहा, इसका व्याख्या यह है; तीन टोकरियों का अर्थ तीन दिन है। सो अब से तीन दिन के भीतर फिरौन तेरा सिर कटवाकर तुझे एक वृक्ष पर टंगवा देगा, और पक्षी तेरे मांस को नोच नोच कर खाएंगे। उत्पत्ति 40:18–19 – स्लाइड 11
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सब कुछ वैसा ही हुआ जैसे यूसुफ ने पिलानेहारे और पकानेहारे के बारे में कहा था –  पिलानेहारे के प्रधान को तो पिलानेहारे के पद पर फिर से नियुक्त किया, और वह फिरौन के हाथ में कटोरा देने लगा। फिर भी पिलानेहारों के प्रधान ने यूसुफ को स्मरण ना रखा; परन्तु उसे भूल गया। उत्पत्ति 40:20–23 – स्लाइड 12
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दो बरस के बीतने पर फिरौन ने यह स्वप्न देखा, कि वह नील नदी के किनारे पर खड़ा है। और उस नदी में से सात सुन्दर और मोटी मोटी गायें निकल कर कछार की घास चरने लगीं। और, क्या देखा, कि उनके पीछे और सात गायें, जो कुरूप और दुर्बल हैं, नदी से निकली; और दूसरी गायों के निकट नदी के तट पर जा खड़ी हुई। तब ये कुरूप और दुर्बल गायें उन सात सुन्दर और मोटी मोटी गायों को खा गईं। (उत्पत्ति 41:1–4) – स्लाइड 13
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तब फिरौन जाग उठा और वह फिर सो गया और दूसरा स्वप्न देखा, कि एक डंठी में से सात मोटी और अच्छी अच्छी बालें निकलीं। और, क्या देखा, कि उनके पीछे सात बालें पतली और पुरवाई से मुरझाई हुई निकलीं। और इन पतली बालों ने उन सातों मोटी और अन्न से भरी हुई बालों को निगल लिया। तब फिरौन जागा, और उसे मालूम हुआ कि यह स्वप्न ही था। (उत्पत्ति 41:5–7) – स्लाइड 14
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भोर को फिरौन का मन व्याकुल हुआ; और उसने मिस्र के सब ज्योतिषियों, और पण्डितों को बुलवा भेजा; और उन को अपने स्वप्न बताएं; पर उन में से कोई भी उनका फल फिरौन से न कह सहा। तब पिलानेहारों का प्रधान फिरौन से बोल उठा, कि कैसे यूसुफ ने उसके और पकानेहारे के स्वप्न की व्याख्या की थी ।  परमेश्वर ने यूसुफ के द्वारा उस स्वप्न की सही व्याख्या किया था। (उत्पत्ति 41:8–13) – स्लाइड 15
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फिरौन ने यूसुफ को अपने पास लाने को कहा। उन्होंने यूसुफ को नहलाया, नए कपड़े और दाढ़ी बनाई। फिरौन ने यूसुफ से अपने स्वप्न की व्याख्या करने को कहा। यूसुफ ने कहा, यह मुझ में नहीं है; परमेश्वर फिरौन को अनुकूल उत्तर देगा।' तब फिरौन ने यूसुफ को अपने स्वप्न बताए। 'स्वप्न में, मैं नील नदी के तट पर खड़ा था और सात मोटी गायें, दलदली घास पर चरने के लिए नील नदी से निकलीं। तब उनके पीछे सात और गायें निकलीं, जो कंगाल और बहुत दुबली और दुबली थीं। इन दुबली गायों ने पहली सात मोटी गायों को खा लिया लेकिन पहले की तरह दुबली-पतली रही। फिर मैं उठा। मैंने स्वप्न में एक ही डंठल पर सात अच्छे और भरे हुए मकई के दाने भी देखे। तब उनके पीछे सात बाल मुरझाए, पतले और पुरवाई से झुलसे हुए निकले; और पतले बालों ने सात अच्छे बालों को निगल लिया। तब मैं ने जादूगरों से कह दिया, परन्तु कोई मुझे समझाने वाला न था।' (उत्पत्ति 41:14-24) – स्लाइड 16
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यूसुफ ने उत्तर दिया, 'परमेश्वर ने फिरौन को बता दिया है कि वह क्या करने जा रहा है। सात अच्छी गायें और अच्छे बाल सात साल के बहुतायत को दिखाती हैं। सात दुबली गायें और सात पतले बाल इंगित करते हैं कि सात साल का अकाल होगा। फिरौन एक समझदार और बुद्धिमान व्यक्ति को खोजे और उसे मिस्र देश पर अधिकार दे। अकाल के वर्षों में उपयोग किए जाने के लिए भोजन को बहुतायत के वर्षों में संग्रहित किया जाना चाहिए।' उत्पत्ति 41:25-37 – स्लाइड 17
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तब फिरौन ने यूसुफ से कहा, जब परमेश्वर ने तुझे यह सब बताया है, तो तेरे तुल्य कोई समझदार और बुद्धिमान नहीं। तुम मेरे बाद मिस्र के सारे देश के ऊपर अधिकारी हो। फिरौन ने अपके हाथ से अँगूठी उतारकर यूसुफ के हाथ में पहिनाई, और उसको सोने का हार और उसके गले में उत्तम मलमल का वस्त्र पहिनाया। जब ऐसा हुआ, तब यूसुफ तीस वर्ष का था, और बहुतायत के सात वर्ष के समय में उस ने सब नगरों में समुद्र की बालू के नाईं अपने अपने आस पास के खेतों की अन्न संभाल कर रखा। उत्पत्ति 41:38–44 – स्लाइड 18
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