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योना और विशाल मछली

योना, नीनवे और बड़ी मछली।
योगदानकर्ता मूडी पब्लिशर्स
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बाइबल के समय में नीनवे असीरिया देश की राजधानी थी। यह महान नगर आकार और जनसंख्या में बड़ा था। – स्लाइड 1
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परन्तु नीनवे के रहनेवाले बहुत वर्षों से दुष्टों से भी दुष्ट बनते जा रह थे। – स्लाइड 2
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राजा एक सामर्थी मनुष्य था और उसकी सेना लगातार एक-एक देश जीत कर अश्शूर का साम्राज्य बढ़ा रहे थे। और दिनों दिन इस्राएल की सीमा के पास आते जा रहे थे। – स्लाइड 3
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इस्राएल के लोग अश्शूरियों से डरते थे। दोनों देशों के रहन-सहन में अंतर के कारण कभी भी दोनों देशों के बीच मित्रता नहीं रही। – स्लाइड 4
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इस्राएल के लोग परमेश्वर की आराधना करते थे और उनका विश्वास उनके सभी विचारों और विश्वासों के केंद्र में था। – स्लाइड 5
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नीनवे के लोग परमेश्वर की नहीं परन्तु पत्थर की बनी मूर्तियों की पूजा करते थे। – स्लाइड 6
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इस्राएल देश में रहते हुए परमेश्वर का एक भविष्यद्वक्ता था जिसे योना कहा जाता था जिसने लोगों को परमेश्वर के सन्देश दिए। – स्लाइड 7
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एक दिन परमेश्वर ने योना को एक संदेश दिया जिसे वह नहीं देना चाहता था। परमेश्वर ने योना से नीनवे में लोगों के पास जाने और उन्हें यह बताने के लिए कहा कि परमेश्वर ने उनकी दुष्टता देखी है और वह नगर को नष्ट करने जा रहा है। – स्लाइड 8
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योना अपने लोगों के शत्रुओं को यह चेतावनी नहीं देना चाहता था कि नीनवे नष्ट होने जा रहा है। उन्हें चेतावनी क्यों दी जानी चाहिए? परमेश्वर ने आगे बढ़कर नीनवे को नष्ट क्यों नहीं कर दिया? – स्लाइड 9
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योना ने परमेश्वर की उपेक्षा करने का निर्णय लिया और नीनवे से तट की ओर विपरीत दिशा में चला गया। – स्लाइड 10
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वह स्पेन में तर्शीश की ओर जाने वाली एक नाव पर सवार हो गया, वह नीनवे से जितना हो सके दूर जाना चाहता था। – स्लाइड 11
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जल्द ही वह समुद्र में था और वह खुद को सही समझ रहा था। – स्लाइड 12
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लेकिन क्या आप परमेश्वर से दूर भाग सकते हैं? योना ने सोचा कि वह कर सकता है। – स्लाइड 13
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वह सोने गया और नीचे जाकर तुरन्त सो गया। – स्लाइड 14
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जब योना सो रहा था तब परमेश्वर ने एक ऐसा तूफान भेजा जो नाविकों ने कभी नही देखा था। – स्लाइड 15
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वे अपने घुटनों पर गिरकर अपने देवताओं से अपनी जान की भीख मांगने लगे। – स्लाइड 16
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लेकिन आंधी और तेज होती चली गई। – स्लाइड 17
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कप्तान जानता था कि उनकी नाव इस तरह के तूफान में ज्यादा नहीं टिकेगी। इसलिए उसने योना को जगाया और उससे कहा कि वह उन्हें बचाने के लिए अपने परमेश्वर को पुकारे। – स्लाइड 18
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परन्तु योना परमेश्वर को कैसे पुकार सकता था जब वह उससे दूर भाग रहा था? – स्लाइड 19
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हताशा में जहाज के चालक दल ने यह पता लगाने के लिए चिट्ठी निकाली कि इस परेशानी के लिए कौन जिम्मेदार था। – स्लाइड 20
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और ऐसा ही हुआ कि योना दोषी साबित हुआ। नाविकों ने यह जानने की माँग की कि वह कौन था और उसने परमेश्वर को नाराज़ करने के लिए क्या किया था। – स्लाइड 21
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योना ने अपनी गलती मान ली और उनसे विनती की कि वे उसे समुद्र में फेंक दे। कहीं ऐसा न हो कि वे सब मारे जाएं। – स्लाइड 22
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नाविकों ने योना को उठाकर समुद्र में फेंक दिया। तूफान उसी समय थम गया। – स्लाइड 23
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और जैसे ही योना समुद्र में गिरा परमेश्वर ने एक बड़ी मछली को भेजा। – स्लाइड 24
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मछली ने योना को निगल लिया। – स्लाइड 25
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योना तीन दिनों और तीन रातो तक मछली के पेट में रहा। वह परमेश्वर से क्षमा मांगते हुए प्रार्थना करता रहा। – स्लाइड 26
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इसके बाद परमेश्वर ने मछली से कहा और उसने योना को सूखी भूमि पर पटक दिया। – स्लाइड 27
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परमेश्वर ने योना को नीनवे शहर जाने के लिए अपने निर्देश को दोहराया। इस बार योना ने आज्ञा मानी। – स्लाइड 28
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योना नगर में निडर होकर गया और चिल्लाया, 'चालीस दिन के भीतर नीनवे नष्ट हो जाएगा।' – स्लाइड 29
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वह परमेश्वर के न्याय की चेतावनी देते हुए पूरे नीनवे में घूमता रहा। लोगों ने योना की कही हुई बातों को सुना और उन पर विश्वास किया। उन्होंने अपनी दुष्टता का पश्चाताप करने के लिए उपवास की घोषणा की। – स्लाइड 30
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जब राजा ने योना के सन्देश के बारे में सुना तो वह जान गया कि उसने किस प्रकार परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया था। – स्लाइड 31
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राजा को अपनी दुष्टता पर इतना पछतावा हुआ कि उसने अपने शाही वस्त्र उतार दिए। – स्लाइड 32
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फिर उसने टाट ओढ़ लिया, और राख पर बैठ कर परमेश्वर से दया करने की याचना करने लगा। – स्लाइड 33
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पूरे नगर में लोगों ने राजा के उदाहरण का अनुसरण किया और परमेश्वर से उन्हें क्षमा करने की याचना की। परमेश्वर ने उनकी प्रार्थना सुनी और क्योंकि वह दया का परमेश्वर है, उसने उन्हें बख्श दिया और नीनवे को नष्ट नहीं किया। यहोवा अच्छा है – स्लाइड 34
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