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दस कुँवारियाँ दूल्हे का इंतज़ार कर रही हैं

दूल्हे के लिए पांच कुँवारियाँ तैयार हैं।
योगदानकर्ता माई-एल-लव
CC BY-NC-ND
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स्वर्ग का राज्य ऐसा है जैसे एक रात हुआ जब दस कुँवारियों अपने तेल के दीपक लेकर दूल्हे से मिलने के लिए एक विवाह में गईं।<br/>उनमें से पाँच मूर्ख थे और पाँच बुद्धिमान थे। – स्लाइड 1
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मूर्खों ने अपनी दीया तो ले लिया, परन्तु अतिरिक्त तेल नहीं लिया। जो बुद्धिमान थे वे अपने दीपकों के लिये अतिरिक्त तेल साथ ले गए।<br/>दूल्हे को आने में देर हो गई और कुँवारियों को नींद आ गई और वे सो गईं। – स्लाइड 2
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“आधी रात को धूम मची : ‘देखो, दूल्हा आ रहा है! उससे भेंट करने के लिये चलो।’ तब वे सब कुँवारियाँ उठकर अपनी मशालें ठीक करने लगीं। और मूर्खों ने समझदारों से कहा, ‘अपने तेल में से कुछ हमें भी दो, क्योंकि हमारी मशालें बुझी जा रही हैं।’ – स्लाइड 3
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परन्तु समझदारों ने उत्तर दिया, ‘कदाचित् यह हमारे और तुम्हारे लिये पूरा न हो; भला तो यह है कि तुम बेचनेवालों के पास जाकर अपने लिये मोल ले लो।’ जब वे मोल लेने को जा रही थीं तो दूल्हा आ पहुँचा। – स्लाइड 4
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जो पाँच तैयार थे वे विवाह में चले गये और दरवाज़े बंद कर दिये गये। – स्लाइड 5
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इसके बाद वे दूसरी कुँवारियाँ भी आकर कहने लगीं, ‘हे स्वामी, हे स्वामी, हमारे लिये द्वार खोल दे!’<br/>उसने उत्तर दिया, ‘मैं तुम से सच कहता हूँ, मैं तुम्हें नहीं जानता।’ <br/>यीशु ने फिर कहा, 'इसलिए, मेरे शिष्यों, हमेशा तैयार रहो! आप उस दिन या समय को नहीं जानते जब यह सब होगा।' – स्लाइड 6
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