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अब्राम मिस्र को जाता है

अब्राम फिरौन से कहता है कि सारै उसकी बहन है।
CC BY-NC-ND
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अब्राम, सारै और लूत ने परमेश्वर की आज्ञा का पालन किया। उन्होंने नेगेव रेगिस्तान के माध्यम से यात्रा की।<br/>परन्तु देश में भयंकर अकाल पड़ा। भोजन की कमी हो गई और पौधे जमीन में ही मर गए। – स्लाइड 1
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उन्होंने परमेश्वर की आज्ञा के विरुद्ध अपना देश छोड़ दिया।<br/>उन्हें मिस्र ले गया, जहाँ भोजन मिल सकता था। – स्लाइड 2
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लेकिन, मिस्र में कई खतरे थे और सारै बहुत सुंदर थी।<br/>अब्राम ने सारै से झूठ बोलने और अजनबियों को बताने को कहा। "कहो कि तुम मेरी बहन हो तो हम इस खतरनाक शहर में सुरक्षित रहेंगे।" – स्लाइड 3
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मिस्री सारै को फिरौन के घर ले गए, परन्तु बुरी बातें होने लगीं।<br/>फिरौन का परिवार बीमार हो गया, जवान और बूढ़े दोनों, और सारै सन्देह के घेरे में थी – स्लाइड 4
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फिरौन को झूठ का पता चल गया।<br/>उसने सारै को अब्राम के पास लौटा दिया।<br/>फ़िरौन ने परमेश्वर की बात सुनी और उन्हें दुःख नहीं पहुँचाया।<br/>उन्होंने सभी से कहा, 'वे परमेश्वर की सुरक्षा में हैं!' – स्लाइड 5
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अब्राम, सारै और लूत अपना सारा धन लेकर मिस्र से चले गए। हाजिरा दासी भी उनके कारवां में शामिल हो गई।<br/>वे अपने साथ वह सब कुछ ले गए जो कुछ वो ले जा सकते थे और अपने देश की ओर वापस चले गए। – स्लाइड 6
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