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अब्राम और मलिकिसिदक

मलिकिसिदक, राजा और याजक, अब्राम को आशीर्वाद देते हैं।
CC BY-NC-ND
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मृत सागर के आसपास युद्ध हुआ।<br/>अब्राम ने अपने भतीजे लूत को बचाया और उसे आज़ाद कर दिया।<br/>अब्राम और उसके लोगों ने सदोम के लोगों के लिए वह युद्ध जीता। – स्लाइड 1
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तब अब्राम राजाओं की तराई में गया।<br/>मलिकिसिदक, एक राजा और परमप्रधान परमेश्वर का याजक, उससे वहां मिला।<br/>मलिकिसिदक राजाओं की घाटी में रोटी और दाखमधु लाया।<br/>उसने अब्राम के साथ एक वाचा बाँधी और रोटी और दाखमधु बाँट लिया गया। – स्लाइड 2
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मलिकिसिदक ने अब्राम को यह आशीर्वाद दिया:<br/>‘परमप्रधान ईश्‍वर की ओर से, <br/>जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो;<br/> और धन्य है परमप्रधान ईश्‍वर, <br/>जिसने तेरे द्रोहियों को तेरे वश में कर दिया है!’ – स्लाइड 3
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अब्राम ने परमेश्वर की आराधना की और अपनी संपत्ति में से मलिकिसिदक को दसवाँ भाग दिया।<br/>यह परमेश्वर के याजक के लिए दशमांश था।<br/>अब्राम ने यहोवा को दस प्रतिशत दिया। – स्लाइड 4
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सदोम के राजा ने अब्राम को लूट का सारा धन देना चाहा।<br/>परन्तु अब्राम ने इन्कार किया, वह परमेश्वर का भक्त था।<br/>अब्राम ने कुछ भी नहीं लिया!<br/>उसका प्रतिफल परमेश्वर की ओर से आया था, और वह चला गया। – स्लाइड 5
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