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यीशु का स्वर्गारोहण

यीशु अपने शिष्यों को दर्शन देते हैं और फिर स्वर्ग चले जाते हैं।
योगदानकर्ता नदीन डी बुअर
CC BY-NC-ND
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यीशु के मरने और फिर से जीवित होने के चालीस दिनों के दौरान, वह समय-समय पर प्रेरितों के सामने प्रकट हुए, और उन्होंने कई तरीकों से साबित किया कि वह वास्तव में जीवित थे। यीशु ने उनसे परमेश्वर के राज्य के बारे में बात की। – स्लाइड 1
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एक बार जब यीशु उनके साथ भोजन कर रहे थे, तो उन्होंने आज्ञा दी कि जब तक परमेश्वर पवित्र आत्मा न भेज दें, तब तक यरूशलेम न छोड़ें।<br/>वे उससे पूछते रहे, 'हे प्रभु, क्या आपके लिए इस्राएल को स्वतंत्र करने और हमारा राज्य पुनः स्थापित करने का समय आ गया है?' – स्लाइड 2
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यीशु ने उत्तर दिया, 'केवल पिता के पास ही उन तिथियों और समयों को निर्धारित करने का अधिकार है, और उन्हें जानना आपके लिए नहीं है। परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे। और तुम मेरे गवाह होगे, और यरूशलेम में, सारे यहूदिया में, सामरिया में, और पृय्वी की छोर तक हर जगह लोगों को मेरे विषय में बताते रहोगे।' – स्लाइड 3
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यह कहने के बाद, जब वे देख रहे थे तो वह बादल पर उठा लिया गया, और वे उसे फिर न देख सके। – स्लाइड 4
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जैसे ही वे उसे स्वर्ग की ओर उठते हुए देखने के लिए जोर लगाने लगे, अचानक दो सफेद वस्त्रधारी व्यक्ति उनके बीच आ खड़े हुए। उन्होंने कहा, 'गलील के लोगों, तुम यहाँ खड़े होकर स्वर्ग की ओर क्यों देख रहे हो? यीशु को तुम्हारे पास से स्वर्ग में ले जाया गया है, लेकिन किसी दिन वह स्वर्ग से उसी तरह वापस आएगा जैसे तुमने उसे जाते देखा था!' – स्लाइड 5
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