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शिशु यीशु मंदिर में

शिमोन और हन्नाह बालक यीशु को देखते हैं - जो वादा किया हुआ उद्धारकर्ता हैं।
CC BY-NC-ND
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और जब मूसा की व्यवस्था के अनुसार उन के शुद्ध होने के दिन पूरे हुए तो वे उसे यरूशलेम में ले गए, कि प्रभु के सामने लाएं।<br/>(जैसा कि प्रभु की व्यवस्था में लिखा है कि हर एक पहिलौठा प्रभु के लिये पवित्र ठहरेगा)। – स्लाइड 1
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और प्रभु की व्यवस्था के वचन के अनुसार पंडुकों का एक जोड़ा, या कबूतर के दो बच्चे ला कर बलिदान करें। – स्लाइड 2
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और देखो, यरूशलेम में शमौन नाम एक मनुष्य था, और वह मनुष्य धर्मी और भक्त था; और इस्राएल की शान्ति की बाट जोह रहा था, और पवित्र आत्मा उस पर था।<br/>और पवित्र आत्मा द्वारा उस पर प्रगट हुआ था  कि जब तक वह प्रभु के मसीह को देख ने लेगा, तक तक मृत्यु को न देखेगा। – स्लाइड 3
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और वह आत्मा के सिखाने से मन्दिर में आया; और जब माता-पिता उस बालक यीशु को भीतर लाए, कि उसके लिये व्यवस्था की रीति के अनुसार करें। – स्लाइड 4
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तो उस ने उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद करके कहा,<br/>हे स्वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्ति से विदा करता है। – स्लाइड 5
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क्योंकि मेरी आंखो ने तेरे उद्धार को देख लिया है।<br/>जिसे तू ने सब देशों के लोगों के साम्हने तैयार किया है। कि वह अन्य जातियों को प्रकाश देने के लिये ज्योति, और तेरे निज लोग इस्राएल की महिमा हो। – स्लाइड 6
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और उसका पिता और उस की माता इन बातों से जो उसके विषय में कही जाती थीं, आश्चर्य करते थे। – स्लाइड 7
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तब शमौन ने उन को आशीष देकर, उस की माता मरियम से कहा; देख, वह तो इस्राएल में बहुतों के गिरने, और उठने के लिये, और एक ऐसा चिन्ह होने के लिये ठहराया गया है, जिस के विरोध में बातें की जाएगीं वरन तेरा प्राण भी तलवार से वार पार छिद जाएगा-- इस से बहुत हृदयों के विचार प्रगट होंगे। – स्लाइड 8
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और अशेर के गोत्र में से हन्नाह नाम फनूएल की बेटी एक भविष्यद्वक्तिन थी: वह बहुत बूढ़ी थी, और ब्याह होने के बाद सात वर्ष अपने पति के साथ रह पाई थी। – स्लाइड 9
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वह चौरासी वर्ष से विधवा थी: और मन्दिर को नहीं छोड़ती थी पर उपवास और प्रार्थना कर करके रात-दिन उपासना किया करती थी। – स्लाइड 10
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और वह उस घड़ी वहां आकर प्रभु का धन्यवाद करने लगी, और उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उसके विषय में बातें करने लगी। – स्लाइड 11
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और जब वे प्रभु की व्यवस्था के अनुसार सब कुछ पूरा कर चुके तो गलील में अपने नगर नासरत को फिर चले गए॥ – स्लाइड 12
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और बालक बढ़ता, और बलवन्त होता, और बुद्धि से परिपूर्ण होता गया; और परमेश्वर का अनुग्रह उस पर था। – स्लाइड 13
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