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यीशु के जन्म की घोषणा

एक स्वर्गदूत मरियम से भेँट करता हैं
CC BY-NC-ND
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इलीशिबा के गर्भावस्था के छठवें महीने में परमेश्वर की ओर से जिब्राईल स्वर्गदूत गलील के नासरत नगर में .... – स्लाइड 1
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...एक कुंवारी के पास भेजा गया। जिस की मंगनी यूसुफ नाम दाऊद के घराने के एक पुरूष से हुई थी: उस कुंवारी का नाम मरियम था। – स्लाइड 2
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और स्वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा; "आनन्द और जय तेरी हो, जिस पर ईश्वर का अनुग्रह हुआ है, प्रभु तेरे साथ है।" वह उस वचन से बहुत घबरा गई, और सोचने लगी, कि यह किस प्रकार का अभिवादन है? – स्लाइड 3
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स्वर्गदूत ने उस से कहा, "हे मरियम; भयभीत न हो, क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह तुझ पर हुआ है। – स्लाइड 4
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"देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना। – स्लाइड 5
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"वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उस को देगा। और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्त न होगा।' – स्लाइड 6
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मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, "यह क्योंकर होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं।"<br/>स्वर्गदूत ने उस को उत्तर दिया; "कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी – स्लाइड 7
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"इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा।<br/>और देख, और तेरी कुटुम्बिनी इलीशिबा के भी बुढ़ापे में पुत्र होनेवाला है, यह उसका, जो बांझ कहलाती थी छठवां महीना है।<br/>क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरहित नहीं होता।" – स्लाइड 8
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मरियम ने कहा, "देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो" तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया॥ – स्लाइड 9
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