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यीशु का परीक्षण शुरू होता है

यहूदी नेताओं ने यीशु से पूछताछ की
CC BY-NC-ND
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यीशु के पकड़ने वाले उस को काइफा नाम महायाजक के पास ले गए... – स्लाइड 1
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...जहां शास्त्री और पुरिनए इकट्ठे हुए थे। – स्लाइड 2
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और पतरस दूर से उसके पीछे पीछे महायाजक के आंगन तक गया। – स्लाइड 3
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और भीतर जाकर अन्त देखने को प्यादों के साथ बैठ गया। – स्लाइड 4
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महायाजक और सारी महासभा यीशु को मार डालने के लिये उसके विरोध में झूठी गवाही की खोज में थे। – स्लाइड 5
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परन्तु बहुत से झूठे गवाहों के आने पर भी न पाई। – स्लाइड 6
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अन्त में दो जनों ने आकर कहा, कि उस ने कहा है; कि ‘मैं परमेश्वर के मन्दिर को ढा सकता हूं और उसे तीन दिन में बना सकता हूं। – स्लाइड 7
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तब महायाजक ने खड़े होकर उस से कहा, ‘क्या तू कोई उत्तर नहीं देता? ये लोग तेरे विरोध में क्या गवाही देते हैं? ‘ – स्लाइड 8
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परन्तु यीशु चुप रहा:। महायाजक ने उस से कहा,  ‘मैं तुझे जीवते परमेश्वर की शपथ देता हूं, कि यदि तू परमेश्वर का पुत्र मसीह है, तो हम से कह दे।’ – स्लाइड 9
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यीशु ने उस से कहा; ‘तू ने आप ही कह दिया: वरन मैं तुम से यह भी कहता हूं, कि अब से तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी ओर बैठे, और आकाश के बादलों पर आते देखोगे।’ – स्लाइड 10
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तब महायाजक ने अपने वस्त्र फाड़कर कहा, ‘इस ने परमेश्वर की निन्दा की है, अब हमें गवाहों का क्या प्रयोजन?’ देखो, तुम ने अभी यह निन्दा सुनी है! तुम क्या समझते हो?’ – स्लाइड 11
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उन्होंने उत्तर दिया, ‘यह वध होने के योग्य है।’ – स्लाइड 12
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तब उन्होंने उस के मुंह पर थूका, और उसे घूंसे मारे, औरों ने थप्पड़ मार के कहा, ‘हे मसीह, हम से भविष्यद्ववाणी करके कह: कि किस ने तुझे मारा?’ – स्लाइड 13
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