हम सामान्य आगंतुक आंकड़े एकत्र करने के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं लेकिन व्यक्तिगत जानकारी नहीं। गोपनीयता नीति

यीशु - अच्छा चरवाहा

यीशु बताते हैं कि वह एक अच्छे चरवाहे की तरह क्यों है।
CC BY-NC-ND
पर्सनल और टीचिंग इस्तेमाल की इजाज़त है व्यक्तिगत एवं शिक्षण उपयोगव्यावसायिक उपयोग निषिद्ध व्यावसायिक उपयोगव्युत्पन्न कृतियाँ निषिद्ध व्युत्पन्न कृतियाँA.I. रूपांतरण निषिद्ध A.I. रूपांतरण
1
मैं तुम से सच सच कहता हूं, ‘कि जो कोई द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, परन्तु और किसी ओर से चढ़ जाता है, वह चोर और डाकू है। – स्लाइड 1
2
‘परन्तु जो द्वार से भीतर प्रवेश करता है वह भेड़ों का चरवाहा है। उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेंड़ें उसका शब्द सुनती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले लेकर बुलाता है और बाहर ले जाता है। – स्लाइड 2
3
‘और जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं; क्योंकि वे उसका शब्द पहचानती हैं।<br/>परन्तु वे पराये के पीछे नहीं जाएंगी, परन्तु उस से भागेंगी, क्योंकि वे परायों का शब्द नहीं पहचानती। – स्लाइड 3
4
यीशु ने उन से यह दृष्टान्त कहा, परन्तु वे न समझे कि ये क्या बातें हैं जो वह हम से कहता है॥ – स्लाइड 4
5
तब यीशु ने उन से फिर कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं ... – स्लाइड 5
6
कि भेड़ों का द्वार मैं हूं। जितने मुझ से पहिले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्तु भेड़ों ने उन की न सुनी। – स्लाइड 6
7
‘द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा। – स्लाइड 7
8
‘चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं। – स्लाइड 8
9
‘अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है। – स्लाइड 9
10
‘मजदूर जो न चरवाहा है, और न भेड़ों का मालिक है, भेड़िए को आते हुए देख, भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है, – स्लाइड 10
11
‘और भेड़िय़ा उन्हें पकड़ता और तित्तर बित्तर कर देता है। वह इसलिये भाग जाता है कि वह मजदूर है, और उस को भेड़ों की चिन्ता नहीं। – स्लाइड 11
12
‘अच्छा चरवाहा मैं हूं; जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूं।  इसी तरह मैं अपनी भेड़ों को जानता हूं, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं, और मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूं। – स्लाइड 12
13
‘और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उन का भी लाना अवश्य है, वे मेरा शब्द सुनेंगी; तब एक ही झुण्ड और एक ही चरवाहा होगा। – स्लाइड 13
14
पिता इसलिये मुझ से प्रेम रखता है, कि मैं अपना प्राण देता हूं, कि उसे फिर ले लूं। कोई उसे मुझ से छीनता नहीं, वरन मैं उसे आप ही देता हूं: – स्लाइड 14
15
मुझे उसके देने का अधिकार है, और उसे फिर लेने का भी अधिकार है: यह आज्ञा मेरे पिता से मुझे मिली है॥’ – स्लाइड 15
16
स्लाइड 16