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बपतिस्मा-दाता यूहन्ना का जन्म

जकर्याह और इलीशिबा को एक बच्चा होता है जिसे यूहन्ना नाम दिया जाता है।
CC BY-NC-ND
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अब समय आ गया था कि इलीशिबा को अपना बच्चा हो, और उसने एक बेटे को जन्म दिया। उसके पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने सुना कि प्रभु ने उस पर बड़ी दया की है, और वे उसके साथ आनंदित हुए। – स्लाइड 1
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आठवें दिन वे बच्चे का खतना करने आए, और वे उसके पिता के नाम पर उसका नाम जकरयाह रखने जा रहे थे – स्लाइड 2
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लेकिन उसकी माँ ने जवाब दिया, नहीं! उसे यूहन्ना नाम दिया जाना चाहिए। उन्होंने उससे कहा, 'लेकिन आपके किसी भी रिश्तेदार का यह नाम नहीं है।' – स्लाइड 3
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इसलिए उन्होंने बच्चे के पिता से पूछताछ की कि वे अपने बेटे का नाम क्या रखना चाहते है। – स्लाइड 4
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उसने एक लिखने की पट्टी मांगी और लिखा, ‘उसका नाम यूहन्ना है। ’और वे सभी चकित थे। – स्लाइड 5
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जकरयाह का मुंह और जीभ तुरंत खुल गई; और वह बोलने और परमेश्वर का धन्यवाद करने लगा। – स्लाइड 6
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उसके आस पास के सब रहने वालों पर भय छा गया; और उन सब बातों की चर्चा यहूदिया के सारे पहाड़ी देश में फैल गई। और सब सुनने वालों ने अपने अपने मन में विचार करके कहा, यह बालक कैसा होगा क्योंकि प्रभु का हाथ उसके साथ था। – स्लाइड 7
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तब उसका पिता जकरयाह पवित्र आत्मा से परिपूर्ण हो गया, और भविष्यद्वाणी करने लगा, कि ‘प्रभु इस्राएल का परमेश्वर धन्य हो, क्योंकि वह मदद करने और अपने लोगों को छुड़ाने आया है। – स्लाइड 8
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‘और अपने सेवक दाऊद के घराने में हमारे लिये एक उद्धार का सींग निकाला, जैसे उस ने अपने पवित्र भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा जो जगत के आदि से होते आए हैं, कहा था, अर्थात हमारे शत्रुओं से, और हमारे सब बैरियों के हाथ से हमारा उद्धार किया है। – स्लाइड 9
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‘कि हमारे बाप-दादों पर दया करके अपनी पवित्र वाचा का स्मरण करे। और वह शपथ जो उस ने हमारे पिता इब्राहीम से खाई थी। कि वह हमें यह देगा, कि हम अपने शत्रुओं के हाथ से छुटकर, उसके साम्हने पवित्रता और धामिर्कता से जीवन भर निडर रहकर उस की सेवा करते रहें। – स्लाइड 10
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‘और तू हे बालक, परमप्रधान का भविष्यद्वक्ता कहलाएगा, क्योंकि तू प्रभु के मार्ग तैयार करने के लिये उसके आगे आगे चलेगा, कि उसके लोगों को उद्धार का ज्ञान दे, जो उन के पापों की क्षमा से प्राप्त होता है। – स्लाइड 11
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‘यह हमारे परमेश्वर के उसी बड़ी करुणा से होगा; जिस के कारण ऊपर से हम पर भोर का प्रकाश उदय होगा, कि अन्धकार और मृत्यु की छाया में बैठने वालों को ज्योति दे, और हमारे पांवों को कुशल के मार्ग में सीधे चलाएं। और वह बालक बढ़ता और आत्मा में बलवन्त होता गया, और इस्राएल पर प्रगट होने के दिन तक जंगलों में रहा। – स्लाइड 12
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