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पतरस का इनकार

पतरस ने यीशु का इन्कार किया और यहूदा ने स्वयं को फाँसी लगा ली।
CC BY-NC-ND
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पतरस बाहर आंगन में बैठा हुआ था: कि एक लौंड़ी ने उसके पास आकर कहा; ’तू भी यीशु गलीली के साथ था।<br/>उस ने सब के साम्हने यह कह कर इन्कार किया और कहा, ‘मैं नहीं जानता तू क्या कह रही है।’ – स्लाइड 1
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थोड़ी देर बाद किसी और ने उसे देखकर कहा, तू भी तो उन्हीं में से है: पतरस ने कहा; ‘हे मनुष्य मैं नहीं हूं।’ – स्लाइड 2
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कोई घंटे भर के बाद एक और मनुष्य दृढ़ता से कहने लगा,’ निश्चय यह भी तो उसके साथ था; क्योंकि यह गलीली है।’ – स्लाइड 3
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पतरस ने कहा, ‘हे मनुष्य, मैं नहीं जानता कि तू क्या कहता है! ‘ – स्लाइड 4
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वह कह ही रहा था कि तुरन्त मुर्ग ने बांग दी। – स्लाइड 5
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तब प्रभु ने घूमकर पतरस की ओर देखा, और पतरस को प्रभु की वह बात याद आई जो उस ने कही थी, कि ‘आज मुर्ग के बांग देने से पहिले, तू तीन बार मेरा इन्कार करेगा।’ – स्लाइड 6
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और वह बाहर निकलकर फूट फूट कर रोने लगा॥ – स्लाइड 7
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जब भोर हुई, तो सब महायाजकों और लोगों के पुरनियों ने यीशु के मार डालने की सम्मति की। – स्लाइड 8
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और उन्होंने उसे बान्धा और ले जाकर पीलातुस हाकिम के हाथ में सौंप दिया॥ – स्लाइड 9
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जब उसके पकड़वाने वाले यहूदा ने देखा कि वह दोषी ठहराया गया है तो वह पछताया और वे तीस चान्दी के सिक्के महायाजकों और पुरनियों के पास फेर लाया।<br/>और कहा, मैं ने निर्दोषी को घात के लिये पकड़वाकर पाप किया है? – स्लाइड 10
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उन्होंने कहा, ‘हमें क्या? तू ही जान।’ – स्लाइड 11
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तब वह उन सिक्कों मन्दिर में फेंककर चला गया, – स्लाइड 12
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और जाकर अपने आप को फांसी दी। – स्लाइड 13
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महायाजकों ने उन सिक्कों लेकर कहा,... – स्लाइड 14
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‘इन्हें भण्डार में रखना उचित नहीं, क्योंकि यह लोहू का दाम है। – स्लाइड 15
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सो उन्होंने सम्मति करके उन सिक्कों से परदेशियों के गाड़ने के लिये कुम्हार का खेत मोल ले लिया। – स्लाइड 16
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