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एम्माउस के मार्ग पर यीशु का प्रकट होना

यीशु एम्माउस के मार्ग पर दो शिष्यों के सामने प्रकट होते हैं।
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जिस दिन यीशु का कब्र खाली पाया गया, उसी दिन यीशु के दो शिष्य इम्माऊस नामक गाँव की ओर जा रहे थे। – स्लाइड 1
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और वे इस घटना के बारे में आपस में बातचीत करते जा रहे थे। – स्लाइड 2
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और जब वे आपस में बातचीत और पूछताछ कर रहे थे, तो यीशु आप पास आकर उन के साथ हो लिया। (परन्तु उन की आंखे ऐसी बन्द कर दी गईं थी, कि उसे पहिचान न सके।) – स्लाइड 3
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उस ने उन से पूछा; ‘ये क्या बातें हैं, जो तुम चलते चलते आपस में करते हो?’ वे उदास से खड़े रह गए। – स्लाइड 4
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यह सुनकर, उनमें से क्लियुपास नाम एक व्यक्ति ने कहा; ‘क्या तू यरूशलेम में अकेला परदेशी है; जो नहीं जानता, कि इन दिनों में उस में क्या क्या हुआ है?’ उस ने उन से पूछा; ‘कौन सी बातें?’ – स्लाइड 5
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‘उन्होंने उस से कहा; ‘यीशु नासरी के विषय में जो परमेश्वर और सब लोगों के निकट काम और वचन में सामर्थी भविष्यद्वक्ता था।’ – स्लाइड 6
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‘और महायाजकों और हमारे सरदारों ने उसे पकड़वा दिया, कि उस पर मृत्यु की आज्ञा दी जाए; और उसे क्रूस पर चढ़वाया। – स्लाइड 7
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‘परन्तु हमें आशा थी, कि यही इस्त्राएल को छुटकारा देगा, और इन सब बातों के सिवाय इस घटना को हुए तीसरा दिन है। – स्लाइड 8
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‘और हम में से कई स्त्रियों ने भी हमें आश्चर्य में डाल दिया है, जो भोर को कब्र पर गई थीं। ... – स्लाइड 9
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‘... और जब उस की लोथ न पाई... – स्लाइड 10
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‘... तो यह कहती हुई आईं, कि हम ने स्वर्गदूतों का दर्शन पाया, जिन्हों ने कहा कि वह जीवित है। – स्लाइड 11
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‘तब हमारे साथियों में से कई एक कब्र पर गए ... – स्लाइड 12
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‘... और जैसा स्त्रियों ने कहा था, वैसा ही पाया; ... – स्लाइड 13
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‘...  परन्तु उस को न देखा।’ – स्लाइड 14
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तब उस ने उन से कहा; ‘हे निर्बुद्धियों, और भविष्यद्वक्ताओं की सब बातों पर विश्वास करने में मन्दमतियों! – स्लाइड 15
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‘क्या अवश्य न था, कि मसीह ये दुख उठाकर अपनी महिमा में प्रवेश करे? – स्लाइड 16
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तब उस ने मूसा से और सब भविष्यद्वक्ताओं से आरम्भ करके ... – स्लाइड 17
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सारे पवित्र शास्त्रों में से अपने विषय में की बातों का अर्थ, उन्हें समझा दिया। – स्लाइड 18
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इतने में वे उस गांव के पास पहुंचे, जहां वे जा रहे थे, और उसके ढंग से ऐसा जान पड़ा, कि वह आगे बढ़ना चाहता है। ... – स्लाइड 19
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... परन्तु उन्होंने यह कहकर उसे रोका, कि हमारे साथ रह; क्योंकि संध्या हो चली है और दिन अब बहुत ढल गया है। तब वह उन के साथ रहने के लिये भीतर गया। – स्लाइड 20
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जब वह उन के साथ भोजन करने बैठा, तो उस ने रोटी लेकर धन्यवाद किया, और उसे तोड़कर उन को देने लगा। – स्लाइड 21
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तब उन की आंखे खुल गईं; और उन्होंने उसे पहचान लिया, और वह उन की आंखों से छिप गया। – स्लाइड 22
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उन्होंने आपस में कहा; ‘जब वह मार्ग में हम से बातें करता था, और पवित्र शास्त्र का अर्थ हमें समझाता था, तो क्या हमारे मन में उत्तेजना न उत्पन्न हुई?’ – स्लाइड 23
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वे उसी घड़ी उठकर... – स्लाइड 24
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... यरूशलेम को लौट गए – स्लाइड 25
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और उन ग्यारहों और उन के साथियों को इकट्ठे पाया। वे कह रहे थे, ‘प्रभु सचमुच जी उठा है, और शमौन को दिखाई दिया है।’ – स्लाइड 26
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तब उन्होंने मार्ग की बातें उन्हें बता दीं और यह भी कि उन्होंने उसे रोटी तोड़ते समय क्योंकर पहचाना॥ – स्लाइड 27
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