हम सामान्य आगंतुक आंकड़े एकत्र करने के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं लेकिन व्यक्तिगत जानकारी नहीं। गोपनीयता नीति

अंजीर के पेड़ को श्राप और मंदिर की सफाई

यीशु अंजीर के पेड़ को शाप देते हैं और मंदिर की सफाई करते है
CC BY-NC-ND
पर्सनल और टीचिंग इस्तेमाल की इजाज़त है व्यक्तिगत एवं शिक्षण उपयोगव्यावसायिक उपयोग निषिद्ध व्यावसायिक उपयोगव्युत्पन्न कृतियाँ निषिद्ध व्युत्पन्न कृतियाँA.I. रूपांतरण निषिद्ध A.I. रूपांतरण
1
दूसरे दिन जब वे बैतनिय्याह से निकले तो उस को भूख लगी। और वह दूर से अंजीर का एक हरा पेड़ देखकर निकट गया, कि क्या जाने उस में कुछ पाए: – स्लाइड 1
2
पर पत्तों को छोड़ कुछ न पाया; क्योंकि फल का समय न था। इस पर उस ने उस से कहा ‘अब से कोई तेरा फल कभी न खाए।’ और उसके चेले सुन रहे थे। – स्लाइड 2
3
फिर वे यरूशलेम में आए, और वह मन्दिर में गया; और वहां जो लेन-देन कर रहे थे उन्हें बाहर निकालने लगा, – स्लाइड 3
4
और सर्राफों के पीढ़े और कबूतर के बेचने वालों की चौकियां उलट दीं। और मन्दिर में से होकर किसी को बरतन लेकर आने जाने न दिया। – स्लाइड 4
5
और उपदेश करके उन से कहा, ‘क्या यह नहीं लिखा है, कि “मेरा घर सब जातियों के लिये प्रार्थना का घर कहलाएगा”? पर तुम ने इसे डाकुओं की खोह बना दी है।’ – स्लाइड 5
6
यह सुनकर महायाजक और शास्त्री उसके नाश करने का अवसर ढूंढ़ने लगे; क्योंकि उस से डरते थे, इसलिये कि सब लोग उसके उपदेश से चकित होते थे॥ – स्लाइड 6
7
और प्रति दिन सांझ होते ही वह नगर से बाहर जाया करता था। – स्लाइड 7
8
फिर भोर को जब वे उधर से जाते थे तो उन्होंने उस अंजीर के पेड़ को जड़ तक सूखा हुआ देखा। पतरस को वह बात स्मरण आई, और उस ने उस से कहा, हे ‘रब्बी, देख, यह अंजीर का पेड़ जिसे तू ने स्राप दिया था सूख गया है।’ – स्लाइड 8
9
यीशु ने उस को उत्तर दिया, कि परमेश्वर पर विश्वास रखो। मैं तुम से सच कहता हूं कि जो कोई इस पहाड़ से कहे; कि तू उखड़ जा, और समुद्र में जा पड़, और अपने मन में सन्देह न करे, वरन प्रतीति करे, कि जो कहता हूं वह हो जाएगा, तो उसके लिये वही होगा। – स्लाइड 9
10
‘इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि जो कुछ तुम प्रार्थना करके मांगो तो प्रतीति कर लो कि तुम्हें मिल गया, और तुम्हारे लिये हो जाएगा। और जब कभी तुम खड़े हुए प्रार्थना करते हो, तो यदि तुम्हारे मन में किसी की ओर से कुछ विरोध, हो तो क्षमा करो: इसलिये कि तुम्हारा स्वर्गीय पिता भी तुम्हारे अपराध क्षमा करे॥’ – स्लाइड 10
11
वे फिर यरूशलेम में आए, और जब वह मन्दिर में टहल रहा था तो महायाजक और शास्त्री और पुरिनए उसके पास आकर पूछने लगे। ‘कि तू ये काम किस अधिकार से करता है? और यह अधिकार तुझे किस ने दिया है कि तू ये काम करे?’ – स्लाइड 11
12
यीशु ने उस से कहा: ‘मैं भी तुम से एक बात पूछता हूं; मुझे उत्तर दो: तो मैं तुम्हें बताऊंगा कि ये काम किस अधिकार से करता हूं।यूहन्ना का बपतिस्मा क्या स्वर्ग की ओर से था वा मनुष्यों की ओर से था? मुझे उत्तर दो।’ – स्लाइड 12
13
तब वे आपस में विवाद करने लगे ‘कि यदि हम कहें, “स्वर्ग की ओर से”, तो वह कहेगा;”फिर तुम ने उस की प्रतीति क्यों नहीं की?” और यदि हम कहें, “मनुष्यों की ओर से तो लोगों का डर है”, (क्योंकि सब जानते हैं कि यूहन्ना सचमुच भविष्यद्वक्ता है।) – स्लाइड 13
14
सो उन्होंने यीशु को उत्तर दिया, कि ‘हम नहीं जानते:’ यीशु ने उन से कहा, ‘मैं भी तुम को नहीं बताता, कि ये काम किस अधिकार से करता हूं॥’ – स्लाइड 14
15
स्लाइड 15