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अय्यूब की कहानी

अय्यूब उसकी पीड़ा को समझने की कोशिश करता है।
CC BY-SA
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अय्यूब एक भला और सीधा मनुष्य था जो परमेश्वर का भय मानता था, और बुराई से दूर रहता था। – स्लाइड 1
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उनका सात बेटों, तीन बेटियों और कई नौकरों के साथ एक बड़ा परिवार था। – स्लाइड 2
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अय्यूब पूरे देश में सबसे अमीर आदमी था, और उसके पास बहुत सारे पशुधन थे - – स्लाइड 3
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- सात हज़ार भेड़ें, तीन हज़ार ऊँट, पाँच सौ बैल, और पाँच सौ गधे। – स्लाइड 4
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यह सोचकर कि उसके बच्चों ने पाप किया होगा और परमेश्वर को श्राप दिया होगा... – स्लाइड 5
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... अय्यूब जल्दी उठा और उसने परिवार के प्रत्येक सदस्य के लिए प्रभु को भेंट चढ़ाई। – स्लाइड 6
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एक दिन स्वर्गदूत और शैतान स्वयं प्रभु के सामने प्रस्तुत हुए। – स्लाइड 7
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यहोवा ने शैतान से कहा, तू कहां से आया है? – स्लाइड 8
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शैतान ने उत्तर दिया, 'पृथ्वी पर चारों ओर घूमने से।' – स्लाइड 9
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तब यहोवा ने शैतान से कहा, अय्यूब खरा और सीधा मनुष्य है, वह परमेश्वर का भय मानता और बुराई से दूर रहता है। – स्लाइड 10
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शैतान ने उत्तर दिया, 'क्या अय्यूब परमेश्‍वर का भय व्यर्थ ही मानता है? तू ने उसकी रक्षा की है, और उसके हाथों के काम को आशीष दी है। – स्लाइड 11
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'परन्तु जो कुछ उसका है उस पर अपना हाथ बढ़ा, और वह निश्चय तेरे मुंह पर तुझे शाप देगा।' – स्लाइड 12
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प्रभु ने उत्तर दिया, 'जो कुछ अय्यूब के पास है, वह तुम्हें मिल सकता है, परन्तु अय्यूब पर उंगली मत उठाना।' – स्लाइड 13
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इसलिए शैतान अपनी योजना को क्रियान्वित करने के लिए चला गया। – स्लाइड 14
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एक दूत अय्यूब के पास बुरा समाचार लेकर आया, और कहने लगा; 'हमलावरों ने तेरे सेवकों को मार डाला है और तेरे गधे और बैल चुरा लिये हैं। मैं ही तुम्हें बताने के लिए बच निकला हूं।' – स्लाइड 15
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तब एक दूसरा दूत अय्यूब के पास आकर कहने लगा; 'परमेश्वर की आग स्वर्ग से गिरी, और भेड़-बकरियों और सेवकों को जला डाला, और मैं ही तुम्हें बताने के लिये बच निकला हूं।' – स्लाइड 16
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तब एक तीसरा दूत अय्यूब के पास आकर कहने लगा; 'हमलावरों ने तुम्हारे ऊँट चुरा लिये, तुम्हारे सेवकों को मार डाला। मैं ही तुम्हें बताने के लिए बच निकला हूं।' – स्लाइड 17
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जब अय्यूब इस सब बुरी खबर से घबरा रहा था, तो चौथा दूत आया, 'घर के चारों कोनों में एक बवंडर आया, और उसने तुम्हारे सभी बेटों और बेटियों को मार डाला, और मैं अकेला तुम्हें बताने के लिए बच गया हूं।' – स्लाइड 18
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अय्यूब ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए परमेश्वर की आराधना करते हुए कहा, 'मैं अपनी माता के पेट से नंगा निकला, और नंगा ही लौट जाऊंगा। प्रभु ने दिया और प्रभु ने ही लिया, प्रभु का नाम धन्य है।' – स्लाइड 19
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शैतान ने परमेश्वर से कहा; 'खाल के बदले खाल, एक आदमी अपनी जान बचाने के लिए अपना सब कुछ दे देगा, अपना हाथ बढ़ाओ, और उसके मांस और हड्डी पर प्रहार करो, और वह निश्चित रूप से तुम्हारे चेहरे पर तुम्हें शाप देगा।' – स्लाइड 20
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परमेश्वर ने उत्तर दिया, 'बहुत अच्छा, अय्यूब तुम्हारे हाथ में है, परन्तु तुम्हें उसका प्राण बख्श देना चाहिए।' – स्लाइड 21
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इसलिए शैतान ने अय्यूब से परमेश्वर को श्राप दिलवाने की योजना बनाकर परमेश्वर की उपस्थिति छोड़ दी। – स्लाइड 22
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शैतान ने अय्यूब को पैरों के तलवों से लेकर सिर के ऊपर तक दर्दनाक घावों से पीड़ित किया। – स्लाइड 23
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बड़े संकट में, अय्यूब ने अपने बाल काटे, और अपने घावों को खुजलाने के लिए कुछ टूटे हुए मिट्टी के बर्तन लिए। – स्लाइड 24
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अय्यूब की पत्नी ने उससे कहा, 'परमेश्वर को शाप दो और मर जाओ।' – स्लाइड 25
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अय्यूब ने उत्तर दिया, 'तुम मूर्ख स्त्रियों की सी बातें करती हो। क्या हम परमेश्‍वर से भलाई तो स्वीकार करें, परन्तु मुसीबत नहीं?' – स्लाइड 26
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अय्यूब के मित्र उसे सांत्वना देने आये और उसकी परेशानी देखकर वे तीनों रोने लगे। – स्लाइड 27
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वे सात दिन और रात तक उसके पास बैठे रहे, और किसी ने एक शब्द भी नहीं कहा, क्योंकि उन्होंने देखा कि उसका दुःख कितना बड़ा था। – स्लाइड 28
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सात दिन के बाद अय्यूब बोला, मैं जन्मते ही क्यों न मर गया? तब मैं उन राजाओं के साथ रहूँगा जिन्होंने महल बनवाये जो अब खंडहर हो गये हैं। छोटे और बड़े वहाँ हैं, और नौकर अपने स्वामी से मुक्त है। – स्लाइड 29
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'जिस बात से मैं बहुत डरता था वह मुझ पर आ गई है, और जिस बात से मैं डरता था वही मेरे साथ हो गया है।' – स्लाइड 30
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तब अय्यूब के मित्र एलीपज ने उत्तर दिया; 'सोचो कि तुमने बहुतों को कैसे उपदेश दिया है। तेरे शब्दों ने विपत्ति में पड़े हुओं को सहारा दिया है, परन्तु अब विपत्ति तेरे पास आती है, और तू ठोकर खाता है। – स्लाइड 31
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'जहां तक ​​मेरी बात है, मैं तुम्हें ईश्वर की तलाश करने की सलाह दूंगा। धन्य है वह मनुष्य जिसे सर्वशक्तिमान ईश्वर सुधारता है।' – स्लाइड 32
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अय्यूब ने उत्तर दिया, 'निराश मनुष्य को अपने मित्रों की कृपा प्राप्त करनी चाहिए, परन्तु मेरे मित्रों ने मुझे निराश किया है। मुझे दिखाओ कि मैं कहाँ गलत हूँ! आपका तर्क क्या साबित करता है? क्या मेरे होठों पर कोई दुष्टता है? – स्लाइड 33
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'मनुष्य क्या है कि तुम प्रति भोर उसे जांचते, और प्रति क्षण उसे परखते हो? यदि मैंने पाप किया है तो मैंने तुम्हारे साथ क्या किया है? तुमने मुझे अपना लक्ष्य क्यों बनाया है?' – स्लाइड 34
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अय्यूब के मित्र बिलदद ने उत्तर दिया, तू कब तक ऐसी बातें कहता रहेगा? आपके शब्द हवा की तरह हैं. क्या ईश्वर न्याय में हस्तक्षेप करता है? क्या ईश्वर अपना निर्णय बदलता है? – स्लाइड 35
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'जो लोग ईश्वर को भूल जाते हैं उनकी नियति ऐसी ही होती है। परमेश्वर से रहित लोगों की आशा नष्ट हो जाती है। परमेश्वर किसी निर्दोष मनुष्य को अस्वीकार नहीं करेगा, या बुरे मनुष्य के हाथों को मजबूत नहीं करेगा।' – स्लाइड 36
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अय्यूब ने उत्तर दिया, 'एक मनुष्य परमेश्वर के सामने कैसे धर्मी हो सकता है? परमेश्वर पवित्र और शक्तिशाली है। जब वह मेरे पास से गुजरता है तो मैं उसे नहीं देख पाता। – स्लाइड 37
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'चूंकि मैं पहले ही दोषी पाया जा चुका हूं, तो मुझे व्यर्थ संघर्ष क्यों करना चाहिए? कोई भी बीच में आकर मेरे मामले को परमेश्वर के सामने नहीं रख सकता है कि वह मुझ पर से उसकी छड़ी को हटा दे। – स्लाइड 38
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'मुझे अपनी जिंदगी से नफरत है, इसलिए मैं खुलकर शिकायत करूंगा।' मैं अपनी आत्मा की कड़वाहट के बारे में बात करूंगा। काश मैं मर गया होता।' – स्लाइड 39
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अय्यूब के मित्र सोपर ने उत्तर दिया, क्या तेरी व्यर्थ बातें मनुष्यों को चुप करा देंगी? क्या तूने जो कहा उसके लिये कोई तुझे डांटेगा नहीं? मैं चाहता हूं कि परमेश्वर आपके खिलाफ बोलें। – स्लाइड 40
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'यदि तुम अपना हृदय परमेश्वर के पास ठीक रखोगे और तुम्हारे पाप क्षमा किए जाएंगे, तो तुम बिना किसी शर्म के अपना चेहरा उठा सकते हो।' – स्लाइड 41
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अय्यूब ने उत्तर दिया, 'सचमुच, तुम ही बुद्धिमान लोग हो, और बुद्धि तुम्हारे साथ मर जाएगी! मैं अपने मित्रों के लिये हंसी का पात्र बन गया हूं, जो परमेश्वर को पुकारता था और परमेश्वर उत्तर देता था। – स्लाइड 42
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'हालाँकि उसने मुझे मार डाला, फिर भी मैं उस पर भरोसा रखूँगा। मैं उसके सामने अपना मार्ग जारी रखूंगा। वही मेरा उद्धार है, क्योंकि कोई भक्तिहीन मनुष्य उसके साम्हने टिक न सकेगा। – स्लाइड 43
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'तुम सब ऐसे दुःखी सांत्वना देने वाले हो। निश्चय अब भी मेरा साक्षी स्वर्ग में है। – स्लाइड 44
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'मैं जानता हूं कि मेरा मुक्तिदाता जीवित है, और अंत में वह पृथ्वी पर अपना स्थान बनाएगा। जब मैं मरूंगा तो परमेश्वर को देखूंगा। मैं उसे अपनी आँखों से देखूँगा।' – स्लाइड 45
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इसलिए अय्यूब के इन तीन दोस्तों ने उसे उत्तर देना बंद कर दिया क्योंकि उसका मानना ​​था कि उसका जीवन परमेश्वर के साथ सही था। – स्लाइड 46
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उनके साथ शामिल हुए एक अन्य युवक ने कहा, 'मैं जवान हूं और आप बूढ़े हैं, इसलिए मैं आपको अपनी राय देने से डर रहा था क्योंकि मैंने सोचा था कि आपके इतने साल आपको ज्ञान सिखाएंगे। परन्तु परमेश्वर ही है जो समझ देता है।” – स्लाइड 47
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'बूढ़े आदमी हमेशा बुद्धिमान नहीं होते, न ही बूढ़े हमेशा न्याय को समझते हैं। थोड़ी देर और मेरी बात सुनो और मैं तुम्हें दिखाऊंगा कि परमेश्वर की ओर से कहने के लिए और भी बहुत कुछ है। – स्लाइड 48
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'ईश्वर शक्ति और निर्णय में उत्कृष्ट है, वह कष्ट नहीं देगा।' सभी ने बोलना बंद कर दिया। – स्लाइड 49
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तब परमेश्वर ने बवंडर में अय्यूब से बात की। 'जब मैंने संसार की नींव रखी तब तुम कहाँ थे? इसकी माप किसने निर्धारित की? इसकी नींव किस पर रखी गई थी? अथवा आधारशिला किसने रखी। निश्चित रूप से आप जानते हैं! – स्लाइड 50
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'जब सुबह के तारे एक साथ गा रहे थे और स्वर्गदूत खुशी से चिल्ला रहे थे तो आप कहाँ थे? क्या तुम्हें मृत्यु के द्वार बता दिये गये हैं? क्या आप पृथ्वी के विशाल विस्तार को समझ गये हैं? – स्लाइड 51
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'जब कौवे के बच्चे परमेश्वर को पुकारते हैं, तो उसे कौन भोजन देता है? – स्लाइड 52
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'क्या तुमने घोड़े को उसकी ताकत दी है? क्या आप इसकी गर्दन को लहराती अयाल से सजाते हैं? – स्लाइड 53
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'क्या बाज़ तेरी बुद्धि से उड़ता है, और जाड़े में दक्षिण की ओर पंख फैलाता है? क्या उकाब तेरी आज्ञा से उड़ता है, और अगम्य स्थान में अपना घोंसला बनाता है? – स्लाइड 54
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'शुतुरमुर्ग के पंख ख़ुशी से फड़फड़ाते हैं। उसे इसकी परवाह नहीं है कि कोई अजनबी उसके अंडों को रौंद सकता है, क्योंकि परमेश्वर ने उसे बुद्धि या समझ का हिस्सा नहीं दिया है।' प्रभु ने अपनी रचना के चमत्कारों के बारे में अय्यूब से सवाल करना जारी रखा। और अय्यूब चुप रहा. – स्लाइड 55
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तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया; 'मैं जानता हूं कि तुम सब कुछ कर सकते हो, और तुम्हारी कोई भी योजना नहीं रोकी जा सकती। आपने पूछा, "यह कौन है जो बिना बुद्धि के सलाह देता है?" मैंने उन चीज़ों के बारे में बात की है जिन्हें मैं नहीं समझता था, वे चीज़ें मेरे लिए बहुत अद्भुत थीं, जिन्हें मैं नहीं जानता था।' – स्लाइड 56
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तब यहोवा ने अय्यूब के मित्रों से कहा; 'मैं तुझ पर क्रोधित हूं, क्योंकि तू ने मेरे दास अय्यूब की नाई ठीक बात नहीं कही। अय्यूब तुम्हारे लिये प्रार्थना करेगा, और मैं उसकी प्रार्थना स्वीकार करूंगा और तुम्हारी मूर्खता के अनुसार तुम्हारे साथ व्यवहार नहीं करूंगा।' – स्लाइड 57
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जब अय्यूब ने अपने दोस्तों के लिए प्रार्थना की, तो प्रभु ने उसकी समृद्धि बहाल कर दी, और उसे पहले से दोगुना धन दिया। – स्लाइड 58
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इसलिये यहोवा ने अय्यूब के अन्तिम दिनों में उसके आरम्भिक दिनों से अधिक आशीष दी। वह एक बार फिर देश के सबसे धनी व्यक्ति बन गये। अय्यूब एक सौ चालीस वर्ष जीवित रहा, और फिर मर गया। – स्लाइड 59
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