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सोने के तोड़ों का दृष्टान्त

तीन नौकर अपने मालिक का पैसा लगाते हैं।
योगदानकर्ता अरब्स फॉर क्राइस्ट
CC BY-SA
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यीशु स्वर्ग के राज्य के बारें शिक्षा दे रहा था और उसने यह दृष्टान्त कहा:- – स्लाइड 1
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‘स्वर्ग का राज्य उस व्यक्ति के समान है जो एक लंबी यात्रा पर जा रहा था, उसने अपने सेवकों को बुलाया और अपनी सम्पति उन में बाँट दी। – स्लाइड 2
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‘उसने पहले सेवक को पांच तोड़े सोना, दूसरे को दो तोड़े और तीसरे को एक सोने का तोड़ा दिया। हर सेवक को उसकी योग्यता के अनुसार सोने के तोड़े दिए गए।(कुछ गणनाओं के अनुसार एक तोडा़ सोना एक साधारण मजदूर की 20 साल की मजदूरी के बराबर था) इसके बाद स्वामी अपनी यात्रा पर चला गया। – स्लाइड 3
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और उस व्यक्ति ने जिसे पांच तोड़े सोना मिला था तुरंत जाकर अपने धन को व्यापार में लगाया और पांच तोड़े और कमा लिए और दूसरे सेवक ने जिसे दो तोड़े सोना मिला था उसने उससे दो तोड़े और कमाए। – स्लाइड 4
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‘परन्तु उस व्यक्ति ने जिसे केवल एक तोड़ा मिला था उसने जाकर एक गड्ढ़ा खोदा और अपने स्वामी के धन को उसमे गाड़ दिया। – स्लाइड 5
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‘बहुत लंबे समय बाद जब उनका स्वामी यात्रा से लौटा तो उसने सेवकों से लेखा - जोखा लेना आरंभ किया’। – स्लाइड 6
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और जिस व्यक्ति को सोने के पांच तोड़े मिले थे वह अन्य पांच तोड़े और ले आया उसने कहा हे स्वामी आपने मुझे पांच तोड़े सोने दिया था देखिये मैंने उनसे पांच तोड़े और कमा लिए हैं। उसके स्वामी ने उससे कहा “शाबाश” भले और विश्वसनीय सेवक!तू थोड़े में विश्वासयोग्य रहा मैं तुझे बहुत वस्तुओं का अधिकारी बनाऊँगा। ‘आ’ अपने स्वामी के आनन्द में सहभागी हो। – स्लाइड 7
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और जिस व्यक्ति को सोने के दो तोड़े मिले थे वह भी आया, उसने कहा “हे स्वामी”, आपने मुझे दो तोड़े सोने दिया था देखिये मैंने उनसे दो तोड़े और कमा लिए हैं। उसके स्वामी ने उससे कहा “शाबाश” भले और विश्वसनीय सेवक! तू थोडे़ में विश्वासयोग्य रहा मैं तुझे बहुत सी वस्तुओं का अधिकारी बनाऊँगा। ‘आ‘ अपने स्वामी के आनन्द में सहभागी हो। – स्लाइड 8
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और अंत में वह व्यक्ति आया जिसे एक सोने का तोड़ा मिला था उसने कहा “हे स्वामी” मैं जानता हूँ कि आप एक कठोर मनुष्य हैं आप ने जहाँ नही बोया वहाँ काटते हैं और जहाँ बीज नही बिखेरा वहाँ से बटोरते हैं। – स्लाइड 9
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इसलिए मैं भयभीत हो गया था, इसलिए जाकर आपके सोने को भूमि में गाड़ दिया। देखिये जो सोना आपने मुझे दिया था वो यह है’ – स्लाइड 10
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उसके स्वामी ने उसे उत्तर दिया, “ हे धूर्त और आलसी दास!” तो तू जानता था कि जहाँ मैंने नहीं बोया वहाँ से काटता हूँ और जहाँ बीज नहीं बिखेरा वहाँ से बटोरता हूँ फिर तो तुझे मेरा धन ब्याज देने वालों के पास जमा कर देना चाहिए था ताकि जब मैं आता तो मुझे मेरा धन ब्याज समेत मिल जाता। – स्लाइड 11
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इसलिए इससे यह सोने का तोड़ा लेकर जिसके पास दस तोड़े हैं उसे दे दो और इस अयोग्य सेवक को बाहर अंधकार में फेंक दों, जहाँ पर केवल रोना और दांतों का पीसना है।” – स्लाइड 12
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क्योंकि जिसके पास अधिक है उसे और अधिक और बहुतायत से दिया जाएगा। और जिसके पास थोड़ा है उससे वह जो उसके पास है वो भी ले लिया जाएगा।’ – स्लाइड 13
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