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आदम और हव्वा ने अवज्ञा की

आदम और हव्वा प्रलोभन के आगे झुक जाते हैं।
CC BY-NC-ND
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तब यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर अदन में एक वाटिका लगाई। उसने वहाँ बगीचे में सभी प्रकार के सुंदर पेड़ लगाए, ऐसे पेड़ जो सबसे अच्छे फल पैदा करते थे। – स्लाइड 1
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प्रभु परमेश्वर ने उस मनुष्य को, जिसे उसने पृथ्वी की धूल से बनाया था, अदन के बगीचे में उसके माली के रूप में रखा, ताकि वह उसकी देखभाल कर सके। – स्लाइड 2
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तब प्रभु परमेश्वर ने कहा, 'मनुष्य के लिए अकेला रहना अच्छा नहीं है; मैं उसके लिए एक साथी बनाऊंगा।'<br/>तब यहोवा परमेश्वर ने उस मनुष्य को गहरी नींद में सुला दिया, और उसकी एक पसली निकालकर जिस स्थान से उस ने उसे निकाला था उसे बन्द कर दिया। – स्लाइड 3
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यहोवा परमेश्वर ने पसली को स्त्री बना दिया, और उसे आदम के पास ले आया। आदम ने कहा, 'वह मेरी ही हड्डी और मांस का हिस्सा है!' 'उसका नाम महिला है क्योंकि वह एक पुरुष से निकाली गई थी।' – स्लाइड 4
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यह बताता है कि क्यों एक आदमी अपने माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से इस तरह जुड़ जाता है कि दोनों एक व्यक्ति बन जाते हैं। हालाँकि वह आदमी और उसकी पत्नी दोनों नग्न थे, लेकिन उनमें से किसी को भी शर्म नहीं आई। – स्लाइड 5
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अब बगीचे के केंद्र में, यहोवा परमेश्वर ने जीवन का वृक्ष, और अच्छे और बुरे के ज्ञान का वृक्ष भी रखा था। – स्लाइड 6
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प्रभु परमेश्वर ने आदम को यह चेतावनी दी: 'तुम अच्छे और बुरे के ज्ञान का वृक्ष को छोड़कर बगीचे में कोई भी फल खा सकते हो - क्योंकि उसका फल तुम्हारी आंखें खोलकर तुम्हें सही और गलत, अच्छे और बुरे का एहसास कराएगा। यदि तुम उसका फल खाओगे, तो तुम मर जाओगे।' – स्लाइड 7
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अब साँप यहोवा परमेश्वर द्वारा बनाए गए किसी भी प्राणी से अधिक धूर्त था। साँप ने स्त्री से पूछा, क्या परमेश्वर ने कहा है, कि तुम बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना? – स्लाइड 8
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'हम बगीचे के किसी भी पेड़ का फल खा सकते हैं,' महिला ने उत्तर दिया, 'बीच के पेड़ को छोड़कर। परमेश्वर ने हम से कहा, कि हम उस वृक्ष का फल न खाएं, और उसे छूएं भी नहीं; यदि हम ऐसा करेंगे तो हम मर जायेंगे।' – स्लाइड 9
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साँप ने उत्तर दिया, 'यह सच नहीं है; तुम्हारी मौत नहीं होगी। परमेश्वर ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि वह जानता है कि जब तुम इसे खाओगे, तो तुम परमेश्वर के समान हो जाओगे और जानोगे कि क्या अच्छा है और क्या बुरा है।' – स्लाइड 10
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स्त्री ने देखा कि पेड़ कितना सुंदर है और उसका फल खाने में कितना अच्छा होगा, और उसने सोचा कि बुद्धिमान बनना कितना अद्भुत होगा। – स्लाइड 11
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इसलिए उसने वर्जित फल में से कुछ लेकर खा लिया। फिर उस ने कुछ अपने पति आदम को दिया, और उस ने भी खाया। – स्लाइड 12
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जैसे ही उन्होंने इसे खाया, उन्हें समझ आ गई और उन्हें एहसास हुआ कि वे नग्न हैं। – स्लाइड 13
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इसलिए उन्होंने अंजीर के पत्तों को एक साथ जोड़ लिया और खुद को ढक लिया। – स्लाइड 14
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उस साँझ को उन्होंने यहोवा परमेश्वर को बगीचे में चलते हुए सुना, और वे पेड़ों के बीच में उससे छिप गए। – स्लाइड 15
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परन्तु यहोवा परमेश्वर ने उस मनुष्य को पुकारकर कहा, तू कहां है?<br/>आदम ने उत्तर दिया, 'मैंने तुम्हें बगीचे में सुना था; मैं डर गया और तुम से छिप गया, क्योंकि मैं नंगा था।' – स्लाइड 16
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'तुम्हें किसने बताया कि तुम नग्न हो?' परमेश्वर ने पूछा। 'क्या तुमने वह फल खाया जो मैंने तुम्हें न खाने को कहा था?'<br/>आदम ने उत्तर दिया, जिस स्त्री को तू ने मेरे यहां ठहराया, उसने मुझे फल दिया, और मैं ने उसे खाया। – स्लाइड 17
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यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से पूछा, तू ने ऐसा क्यों किया?<br/>उसने उत्तर दिया, 'साँप ने मुझे धोखे से इसे खिलाया।' – स्लाइड 18
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तब यहोवा परमेश्वर ने साँप से कहा, तुझे इसका दण्ड मिलेगा; सभी जानवरों में से केवल तुम्हें ही यह श्राप सहन करना होगा: अब से तुम अपने पेट के बल रेंगोगे, और जब तक जीवित रहोगे तुम्हें धूल खाना पड़ेगा।' – स्लाइड 19
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'मैं तुम्हें और उस स्त्री को एक-दूसरे से नफरत करवाऊंगा; उसकी संतान और तुम्हारी संतान सदैव शत्रु रहेंगी। उसकी सन्तान तेरे सिर को कुचल डालेगी, और तू उसकी सन्तान की एड़ी को काट डालेगा।' – स्लाइड 20
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यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से कहा, मैं तेरे गर्भवती होने का कष्ट और बच्चा जनने का कष्ट बढ़ाऊंगा। इस पर भी तुझे अपने पति की अभिलाषा रहेगी, तौभी तू उसके अधीन रहेगी।' – स्लाइड 21
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तब परमेश्वर ने आदम से कहा, 'तू ने अपनी पत्नी की बात मानी, और जो फल मैं ने तुझ से न खाने को कहा या, वह तू ने खा लिया। तुमने जो किया है, उसके फलस्वरूप पृथ्वी शाप के अधीन होगी। आपको अपने लिए पर्याप्त भोजन पैदा करने के लिए जीवन भर कड़ी मेहनत करनी होगी। इससे जंगली घास और कांटे उगेंगे और तुम्हें जंगली पौधे खाने पड़ेंगे। आपको मिट्टी को कुछ भी पैदा करने के लिए कड़ी मेहनत और पसीना बहाना पड़ेगा, जब तक कि आप उस मिट्टी में वापस नहीं पहुंच जाते जिससे आप बने हैं। तुम मिट्टी से बने हो, और फिर मिट्टी ही बन जाओगे।' – स्लाइड 22
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आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा, क्योंकि वह सभी मनुष्यों की माँ थी। और यहोवा परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी के लिये पशुओं की खाल से वस्त्र बनाकर उनको पहिनाया। – स्लाइड 23
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तब यहोवा परमेश्वर ने कहा, 'ये मनुष्य हम में से एक के समान हो गए हैं और उन्हें ज्ञान है कि क्या अच्छा है और क्या बुरा है। उन्हें उस पेड़ से फल लेने, खाने और हमेशा जीवित रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए जो जीवन देता है।'<br/>इसलिये यहोवा परमेश्वर ने उन्हें अदन की वाटिका से बाहर भेजा, और जिस मिट्टी से वे बने थे उस पर खेती कराई। फिर उसने बारी के पूर्व की ओर करूब और एक जलती हुई तलवार रखवाई जो चारों दिशाओं में घूमती थी। इसका उद्देश्य किसी को भी उस पेड़ के पास आने से रोकना था जो जीवन देता है। – स्लाइड 24
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