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यीशु का अभिषेक

महंगे इत्र से यीशु का अभिषेक किया जाता है।
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यीशु बैतनिय्याह में लाज़र और मरियम और मार्था के यहाँ ठहरा हुआ था। उन्होंने यीशु के सम्मान में रात्रि भोज का आयोजन किया। मार्था भोजन परोस रही थी। – स्लाइड 1
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लाज़र यीशु और उसके चेलों के साथ मेज पर भोजन कर रहा था। – स्लाइड 2
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मरियम यीशु के पावों के पास बैठी थी। – स्लाइड 3
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उसने लगभग एक सआ (0.5 लीटर) शुद्ध जटामासी का इत्र जो कि बहुत ही कीमती था ले लिया..... – स्लाइड 4
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...और उसे यीशु के पावों प उंडेल दिया। – स्लाइड 5
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जब यहूदा ने यह देखा कि मरियम ने क्या किया है, तब उसने विरोध करके कहा, ‘क्यों इस इत्र को न बेचकर इससे मिला धन कंगालों में बांटा गया?’ क्योंकि इस इत्र की कीमत एक साल की मजदूरी के लगभग थी – स्लाइड 6
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यहूदा ने यह इसलिए नहीं कहा कि उसे कंगालों की चिंता थी बल्कि इसलिए कहा कि वह चोर था। जो धन कंगालो के लिए दिया जाता था वह उसमें से चोरी छुपे अपने लिए निकाल लिया करता था। – स्लाइड 7
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यीशु ने उत्तर दिया, ‘उसे अकेला छोड़ दो,’ ‘ उस ने मेरे गाड़े जाने की तैयारी में पहिले से ही मुझ पर इत्र मला है। उस ने यह बहुत सुंदर कार्य किया है।’ – स्लाइड 8
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यीशु ने आगे कहा, ‘तुम्हारे साथ तो कंगाल सदा रहेंगे, परन्तु मैं तुम्हारे साथ सदा न रहूँगा।’ – स्लाइड 9
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‘सुनो। सारे जगत में जहाँ भी सुसमाचार प्रचार किया जाएगा, वहां उसके इस काम की चर्चा उसके स्मरण में की जाएगी।’ – स्लाइड 10
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एक बडी भीड़ बाहर एकत्र थी जो देखना चाहती थी कि यीशु ने कैसे लाजर को मृतकों में से जिलाया था। – स्लाइड 11
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यहूदा वहाँ से चला गया और महायाजकों को खोजने के लिए निकल पड़ा। उसने यीशु के साथ विश्वासघात करने का निर्णय कर लिया था। – स्लाइड 12
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