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एलिय्याह को कौवों द्वारा भोजन खिलाया जाना

एलिय्याह राजा अहाब से छिप जाता है और कौवे उसे भोजन लाते हैं।
योगदानकर्ता फ्री बाइबिल इमेजेस
CC BY-SA
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गिलाद में तिशबे के भविष्यद्वक्ता एलिय्याह ने राजा अहाब को परमेश्वर का सन्देश दिया कि जब तक वह न कहे तब तक न ओस पड़ेगी और न वर्षा होगी। – स्लाइड 1
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परमेश्वर एलिय्याह को पूर्व की ओर यात्रा करने और यर्दन नदी के पूर्व में करीत घाटी में छिपने के लिए कहता है ताकि राजा अहाब उसे न पा सके। – स्लाइड 2
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एलिय्याह अपने छिपने के स्थान की ओर प्रस्थान करता है। – स्लाइड 3
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वैकल्पिक स्लाइड: यह नक्शा एलिय्याह के तिशबे, सामरिया के गृह नगर को दिखाता है जहां राजा अहाब का महल था और सबसे संभावित जगह करीत नाले का स्थान जो उजाड़ खड्ड से होकर गुजरता था – स्लाइड 4
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करीत नाले के पास कोई नहीं रहता था या यात्रा नहीं करता था। यह एकांत, गर्म और सुनसान जगह थी। – स्लाइड 5
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परमेश्वर ने एलिय्याह से प्रतिज्ञा की थी कि कौवे उसके लिए भोजन लेकर आएंगे। कौवे बहुत स्वार्थी पक्षी होते हैं। क्या वे अपना खाना साझा करेंगे? – स्लाइड 6
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उसने उस नाले का ताज़ा पानी पिया जो घाटी से होकर बहता था। – स्लाइड 7
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और सवेरे और साँझ को कौवे उसके लिए रोटी और मांस लाया करते थे - जैसा कि परमेश्वर ने उसे वादा किया था। – स्लाइड 8
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कुछ महीनों तक एलिय्याह नाले से पानी पी कर ही जीवित रहा। – स्लाइड 9
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हर सवेरे और साँझ को वह रोटी और मांस खाता जो कौवों द्वारा गिराया जाता था। – स्लाइड 10
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उस समय के दौरान वर्षा की एक बूंद भी नहीं गिरी और न ही सवेरे जल्दी कोई ओस होती थी। राजा अहाब ने एलिय्याह को हर जगह खोजा पर उसे न ढूँढ पाया। प्यास के कारण पौधे, फसलें और जानवर मरने लगे। – स्लाइड 11
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तब एक दिन नाले का पानी सूख गया। एलिय्याह के पास पीने का पानी नहीं बचा। – स्लाइड 12
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परमेश्वर ने एलिय्याह से कहा कि वह घाटी को छोड़ दे और उत्तर की दिशा में सारपत नगर को चला जाऐ, जो सीदोन देश में है। परमेश्वर ने स्पष्ट किया उसने एक विधवा को आज्ञा दी है, जो वहाँ उसे भोजन की पूर्ति करेगी। – स्लाइड 13
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एलिय्याह घाटी के मार्ग से बाहर निकल गया और उत्तर की ओर चलने लगा। – स्लाइड 14
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वैकल्पिक नक्शा यह नक्शा सीदोन (फिनिसिया) के सारपत नगर को, उत्तर के इस्राइल देश को और उस मार्ग को दिखाता है जिस पर जाने से एलिय्याह उन लोगों से बचा जो उसे ढूँढ रहे थे। – स्लाइड 15
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यह यात्रा उसे घाटी से बाहर ले आई। – स्लाइड 16
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...और फिनिसिया देश की ओर ले आई। वह बहुत थका हुआ, प्यासा और भूखा था। – स्लाइड 17
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परमेश्वर ने उसे कौवों के द्वारा भोजन खिलाया था – अब वह सारपत नगर की ओर उस विधवा को ढूँढने चल पड़ा जैसा कि परमेश्वर ने उससे कहा था कि वह उसे भोजन और पानी देगी। – स्लाइड 18
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