हम सामान्य आगंतुक आंकड़े एकत्र करने के लिए कुकीज़ का उपयोग करते हैं लेकिन व्यक्तिगत जानकारी नहीं। गोपनीयता नीति

मूसा और लाल सागर

परमेश्वर लाल सागर के मध्य से रास्ता खोलता है।
योगदानकर्ता रेने फ़िट्ज़नर
सर्वाधिकार सुरक्षित
पर्सनल और टीचिंग इस्तेमाल की इजाज़त है व्यक्तिगत एवं शिक्षण उपयोगव्यावसायिक उपयोग निषिद्ध व्यावसायिक उपयोगव्युत्पन्न कृतियाँ निषिद्ध व्युत्पन्न कृतियाँA.I. रूपांतरण निषिद्ध A.I. रूपांतरण
1
जब मिस्र के राजा (फिरौन) को यह समाचार मिला कि इसरायली चले गए, तब फिरौन और उसके कर्मचारियों का मन उनके विरुद्ध पलट गया, और वे कहने लगे ... – स्लाइड 1
2
‘हम ने यह क्या किया, हमने उन्हें जाने दिया है और वे अब हमारे दास नहीं रहेंगे।’ – स्लाइड 2
3
राजा ने अपना रथ जुतवाया और अपनी सेना को संग लिया। – स्लाइड 3
4
उसने अपने छ: सौ अच्छे से अच्छे रथों के प्रधानों को इस्राएलियों का पीछा करने की आज्ञा दी। – स्लाइड 4
5
यहोवा ने मिस्र के राजा फिरौन के मन को कठोर कर दिया कि वह उनके पीछे हो लिया। – स्लाइड 5
6
इस्राएली प्रतिज्ञा प्रतिज्ञा किये हुए देश की ओर जा रहे थे। परन्तु मिस्र का राजा घोड़ों और रथों, और सवारों समेत मिस्री सेना उनका पीछा करके उन्हें पकड़ने का प्रयास कर रहे थे जब वे लाल सागर के निकट डेरा डाले हुए थे। – स्लाइड 6
7
जब इस्राएलियों ने मिस्री राजा को अपनी सेना के साथ आते देखा... – स्लाइड 7
8
... वे डर गए ... – स्लाइड 8
9
... और प्रभु से सहायता की याचना की। – स्लाइड 9
10
उन्होंने मूसा से भी शिकायत की। – स्लाइड 10
11
क्या मिस्र में कबरें न थीं जो तू हम को वहां से मरने के लिये जंगल में ले आया है? तू ने हम से यह क्या किया, कि हम को मिस्र से निकाल लाया? – स्लाइड 11
12
क्या हम तुझ से मिस्र में यही बात न कहते रहे, कि हमें रहने दे कि हम मिस्रियों की सेवा करें? – स्लाइड 12
13
हमारे लिये जंगल में मरने से मिस्रियों की सेवा करनी अच्छी थी। – स्लाइड 13
14
मूसा ने लोगों से कहा, डरो मत, धीरज धरो, और वह उद्धार का काम देखो, जो यहोवा आज तुम्हारे लिये करेगा। – स्लाइड 14
15
जिन मिस्रियों को तुम आज देखते हो, उन को फिर कभी न देखोगे, क्योंकि यहोवा तुम्हारे लिये लड़ेगा, इसलिये तुम चुपचाप रहो। – स्लाइड 15
16
तब यहोवा ने मूसा से कहा, तू क्यों मेरी दोहाई दे रहा है? इस्राएलियों को आज्ञा दे कि यहां से कूच करें। और तू अपनी लाठी उठा कर अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ा। – स्लाइड 16
17
वह दो भाग हो जाएगा; तब इस्राएली समुद्र के बीच हो कर स्थल ही स्थल पर चले जाएंगे। और सुन, मैं आप मिस्रियों के मन को कठोर करता हूं, और वे उनका पीछा करके समुद्र में घुस पड़ेंगे। – स्लाइड 17
18
और जब फिरौन, और उसके रथों, और सवारों को जो कुछ होगा, उसके द्वारा मेरी महिमा होगी, तब मिस्री जान लेंगे कि मैं यहोवा हूं। – स्लाइड 18
19
तब परमेश्वर का दूत जो इस्राएली सेना के आगे आगे चला करता था जा कर उनके पीछे हो गया; और बादल का खम्भा उनके आगे से हटकर उनके पीछे जा ठहरा। इस प्रकार वह मिस्रियों की सेना और इस्राएलियों की सेना के बीच में आ गया। – स्लाइड 19
20
बादल ने इस्राएलियों को प्रकाश दिया, परन्तु... – स्लाइड 20
21
... मिस्रवासियों के लिए अंधेरा कर दिया। रात में वे करीब भी नहीं आ सके। – स्लाइड 21
22
मूसा ने अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ाया; और यहोवा ने रात भर प्रचण्ड पुरवाई चलाई, और समुद्र को दो भाग करके जल ऐसा हटा दिया, जिससे कि उसके बीच सूखी भूमि हो गई। – स्लाइड 22
23
तब इस्राएली समुद्र के बीच स्थल ही स्थल पर हो कर चले, और जल उनकी दाहिनी और बाईं ओर दीवार का काम देता था। – स्लाइड 23
24
तब मिस्री के सब घोड़े, रथ, और सवार उनका पीछा किए हुए समुद्र के बीच में चले गए। – स्लाइड 24
25
और रात के पिछले पहर में यहोवा ने बादल और आग के खम्भे में से मिस्रियों की सेना पर दृष्टि करके उन्हें घबरा दिया। – स्लाइड 25
26
और उसने उनके रथों के पहियों को निकाल डाला, जिससे उनका चलना कठिन हो गया। – स्लाइड 26
27
तब मिस्री आपस में कहने लगे, आओ, हम इस्राएलियों के साम्हने से भागें; क्योंकि यहोवा उनकी ओर से मिस्रियों के विरुद्ध युद्ध कर रहा है। – स्लाइड 27
28
फिर यहोवा ने मूसा से कहा, अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ा। – स्लाइड 28
29
कि जल मिस्रियों, और उनके रथों, और सवारों पर फिर बहने लगे। – स्लाइड 29
30
तब मूसा ने अपना हाथ समुद्र के ऊपर बढ़ाया, और भोर होते ही पानी मिस्रियों की ओर ज्यों का त्यों अपने बल पर आ गया। – स्लाइड 30
31
उन्होंने भागने की कोशिश की लेकिन वे समुद्र में डूब गए। पानी आया और रथों और घुड़सवारों को ढक दिया। मिस्र की एक भी सेना जो इस्राएलियों के पीछे समुद्र में गई थी, जीवित नहीं बची। – स्लाइड 31
32
उस दिन, इस्राएलियों ने मिस्रियों के शवों को तट पर देखा ... – स्लाइड 32
33
... वे जानते थे कि यहोवा ने उन्हें बचाया है। – स्लाइड 33
34
परमेश्वर की उस अपार शक्ति के कारण जो उसने मिस्रियों के विरुद्ध प्रयोग की थी, इस्राएलियों ने उसकी उपासना की। – स्लाइड 34
35
उन्होंने यहोवा और उसके दास मूसा पर भरोसा किया। – स्लाइड 35
36
स्लाइड 36