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यूसुफ स्वप्न देखने वाला

यूसुफ याकूब से एक रंगबिरंगा अँगरखा प्राप्त करता है और अपना सपना साझा करता है।
योगदानकर्ता फ्री बाइबिल इमेजेस
CC BY-SA
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याकूब और उसके बारह पुत्र। लिआ के द्वारा रूबेन, शिमोन, लेवी, यहूदा, इस्साकार, और जबूलून। राहेल द्वारा (जो बच्चे के जन्म के समय मर गई): यूसुफ और बिन्यामीन। राहेल के दास बिल्हा की ओर से: दान और नप्ताली। लिआ की दासी जिल्पा की ओर से: गाद और आशेर। – स्लाइड 1
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युसूफ (सत्रह वर्ष) जिल्पा के बेटों, गाद और आशेर और बिल्हा के बेटों, दान और नप्ताली के साथ अपने पिता की भेड़-बकरियों की देखभाल कर रहा है। – स्लाइड 2
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वह उनके बारे में अपने पिता याकूब के पास एक बुरा समाचार लेके आता है। – स्लाइड 3
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सारे भाई जान गए थे कि यूसुफ उनके बारे में उनके पिता याकूब को सूचना दिया करता था। – स्लाइड 4
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याकूब राहेल को सबसे बढ़कर प्रेम करता था। और वह राहेल के सबसे बड़े बेटे, यूसुफ को, अपने और बेटों से अधिक प्रेम करता था। उसने उसे एक बहुमुल्य रंगबिरंगा अँगरखा देकर सम्मानित किया। – स्लाइड 5
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यूसुफ के बड़े भाइयों को ईर्ष्या हो रही है। उनकी नफ़रत ऐसी है कि वह उसके बारे में केवल बुरे शब्द ही निकालते थे। – स्लाइड 6
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याकूब गाय और भेड़ों के बड़े समूह के साथ एक धनी व्यक्ति था। सब भाई डर गये कि उनके पिता यूसुफ को अपना वारिस बना देंगे और वह सब पर राज करेगा। – स्लाइड 7
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एक रात जब यूसुफ सोया तो उसने एक बड़ा ही अजीब स्वप्न देखा। – स्लाइड 8
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उसने स्वप्न देखा कि वह और उसके भाईं खेत में पूले बाँध रहे हैं। अचानक से एक पूला उठकर सीधा खड़ा हो गया और उसके भाईयों के पूलों ने उसके पूले को घेर लिया और दण्डवत् किया। – स्लाइड 9
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अगले दिन यूसुफ स्वप्न को अपने भाईयों को बताता है। – स्लाइड 10
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यूसुफ बताता है कि कैसे उनके पूलों ने उसके पूले को दण्डवत् किया। वे क्रोधित हुए। ‘क्या तू हमारे ऊपर राज्य करने की सोच रहा है? क्या तू सचमुच हम पर शासन करेगा?’ वे उससे और भी अधिक घृणा करने लगे। – स्लाइड 11
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यूसुफ ने एक और स्वप्न देखा। – स्लाइड 12
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उसने स्वप्न देखा कि सूर्य, चन्द्रमा और ग्यारह तारे उसे दण्डवत् कर रहे थे। – स्लाइड 13
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वह अपने ग्यारह भाईयों को बता रहा था कि कैसे स्वप्न में सूर्य, चन्द्रमा और ग्यारह तारे उसे दण्डवत् कर रहे थे। – स्लाइड 14
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भाईयों ने ग्यारह तारों का अर्थ अपने चित्र से माना जो कि यूसुफ को दण्डवत् कर रहे थे और उनका बैर और भी गहरा हो गया। – स्लाइड 15
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यूसुफ जाकर अपने पिता याकूब को अपना स्वप्न बताता है। – स्लाइड 16
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याकूब ने उसको डांटा। यह तूने कैसा स्वप्न देखा? क्या वास्तव में तेरी माता और मैं और तेरे भाई आएँगे और भूमि पर गिरकर तेरे आगे दण्डवत् करेगें?’ – स्लाइड 17
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याकूब ने बहुत बार इस स्वप्न के बारे में सोचा और विचार किया कि उन सब का अर्थ क्या था। – स्लाइड 18
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