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यीशु कुष्ठ रोग से पीड़ित दस व्यक्तियों से मिले

कुष्ठ रोग से ठीक हुआ एक सामरी यीशु को धन्यवाद देने के लिए लौट आता है।
योगदानकर्ता सू बेंटली
CC BY-SA
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एक दिन यीशु यरूशलेम के रास्ते में गलील से निकले और सीमा पार करके सामरिया में चले गये। यहूदी आमतौर पर सामरिया से परहेज करते थे और उन्हें वहां रहने वाले सामरी लोग पसंद नहीं थे। – स्लाइड 1
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रास्ते में, यीशु एक गाँव में दाखिल हुए और दस लोगों ने, जो कुष्ठ नामक भयानक त्वचा रोग से पीड़ित थे, उन्हें देखा। उन्होंने दूरी बनाए रखी लेकिन अपनी आवाजें ऊंची कीं और चिल्लाकर कहा, 'यीशु, गुरु, हम पर दया करो!' – स्लाइड 2
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यीशु ने उत्तर दिया, 'जाओ, अपने आप को याजकों को दिखाओ।' केवल एक याजक ही यह निर्णय कर सकता था कि वह व्यक्ति कुष्ठ रोग से ठीक हुआ है या नहीं।<br/>उन लोगों ने वैसा ही किया जैसा उन्हें बताया गया था और वे अपने कुष्ठ रोग से ठीक हो गये! – स्लाइड 3
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जब उनमें से एक आदमी, एक सामरी, ने देखा कि उसकी त्वचा भयानक बीमारी से साफ़ हो गई है, तो वह यीशु के पास लौट आया। यीशु के चरणों में घुटने टेककर उसने ऊँची आवाज़ में परमेश्वर की स्तुति की। वह यीशु को पर्याप्त धन्यवाद नहीं दे सका। – स्लाइड 4
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यीशु ने पूछा, 'क्या मैं ने दस मनुष्यों को चंगा नहीं किया? बाकी नौ कहाँ हैं? यह आदमी यहूदी नहीं बल्कि अजनबी, सामरी है। क्या वह परमेश्वर की स्तुति करने वाला यह एकमात्र व्यक्ति है?' – स्लाइड 5
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तब यीशु ने सामरी से कहा, “उठकर चला जा; तेरे विश्‍वास ने तुझे चंगा किया है।” – स्लाइड 6
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