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मूसा और लाल सागर

मिस्रियों ने इस्राएलियों को लाल सागर के किनारे फँसा लिया।
योगदानकर्ता सू बेंटली
CC BY-SA
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जब परमेश्वर ने अपने लोगों को मिस्र में दास होने से मुक्त किया तो वह उन्हें लाल सागर की ओर जंगल में ले गया। दिन को वह उन्हें बादल के खम्भे के द्वारा आगे आगे ले चला करता था। – स्लाइड 1
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फिर, रात में, परमेश्वर ने उन्हें आग के खम्भे के द्वारा ले चला करता था। परमेश्वर ने ऐसा इसलिये किया कि वे दिन के समय और सांझ के समय यात्रा कर सकें। – स्लाइड 2
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फिरौन ने आख़िरकार उन्हें जाने दिया लेकिन फिर अपना मन बदल लिया। वह उन्हें अपने दास के रूप में वापस चाहता था।<br/>'हमने उन्हें जाने क्यों दिया,' उन्होंने पूछा, 'हमें अपनी सेवा के लिए उनकी ज़रूरत है?' – स्लाइड 3
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इसलिए उसने अपने सभी सैनिकों और रथों को इकट्ठा किया और इस्राएलियों का पीछा किया। उसने उन्हें लाल सागर के किनारे डेरा डाले हुए पाया। उसने उन्हें फँसा लिया। – स्लाइड 4
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परन्तु परमेश्वर अपने लोगों की देखभाल कर रहा था। परमेश्वर ने मूसा से अपनी छड़ी उठाने को कहा और जैसे ही उसने ऐसा किया, लाल सागर विभाजित हो गया। उनके लिए दूसरी ओर जाने के लिए समुद्र के माध्यम से एक सूखा रास्ता था। वे सभी सुरक्षित रूप से दूसरी ओर पहुंच गए। – स्लाइड 5
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फिरौन और उसके लोग किनारे की ओर आगे बढ़े और उस मार्ग को देखा जो परमेश्वर ने समुद्र के बीच बनाया था। उन्होंने इस्राएलियों को पकड़ने के लिए उस पर धावा बोलने का निश्चय किया।<br/>परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वह फिर से अपनी छड़ी उठाए और तुरंत लाल सागर फिर से बहकर सभी मिस्रवासियों पर छा गया और वे डूब गए। – स्लाइड 6
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जब मूसा और इस्राएलियों ने देखा कि परमेश्वर ने किस प्रकार उनकी रक्षा की है, तो वे उसकी स्तुति में गीत गाने लगे। परमेश्‍वर ने उन्हें बचाया था और वे स्वतंत्र थे। – स्लाइड 7
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