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परमेश्‍वर स्वर्ग और पृथ्वी का सृष्‍टि करता है

परमेश्‍वर ब्रह्मांड, संसार और जीवन का सृष्‍टि करता है।
योगदानकर्ता सू बेंटली
CC BY-SA
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आदि में परमेश्‍वर ने आकाश और पृथ्वी की सृष्‍टि की। पृथ्वी बेडौल और सुनसान पड़ी थी, और गहरे जल के ऊपर अन्धियारा था; तथा परमेश्‍वर का आत्मा जल के ऊपर मण्डराता था – स्लाइड 1
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जब परमेश्‍वर ने कहा, “उजियाला हो,” तो उजियाला हो गया। – स्लाइड 2
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परमेश्‍वर ने उजियाले को अन्धियारे से अलग किया। और परमेश्‍वर ने उजियाले को दिन और अन्धियारे को रात कहा। इस प्रकार पहला दिन हो गया। – स्लाइड 3
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तब परमेश्‍वर ने एक अन्तर बनाकर उसके नीचे के जल और उसके ऊपर के जल को अलग अलग किया; और वैसा ही हो गया। और परमेश्‍वर ने उस अन्तर को आकाश कहा। इस प्रकार दूसरा दिन हो गया – स्लाइड 4
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तब परमेश्वर ने भूमि और समुद्र को अलग कर दिया। उन्होंने बोला और घास, पेड़, फल, फूल और पौधे सभी बनाए गए। परमेश्वर ने देखा कि सब कुछ अच्छा था। तब यह सृष्टि का तीसरा दिन था। – स्लाइड 5
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तब परमेश्‍वर ने दो बड़ी ज्योतियाँ बनाईं; उन में से बड़ी ज्योति को दिन पर प्रभुता करने के लिये और छोटी ज्योति को रात पर प्रभुता करने के लिये बनाया; और तारागण को भी बनाया। इस प्रकार चौथा दिन हो गया – स्लाइड 6
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इसके बाद परमेश्वर ने समुद्र में तैरने वाले हर प्रकार के बड़े बड़े जल–जन्तुओं को बनाए, जैसे बड़ी व्हेल और पानी में रहने वाले सभी जानवर। – स्लाइड 7
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और परमेश्वर ने एक एक जाति के उड़नेवाले पक्षियों की भी सृष्‍टि की जिसे कि वे आकाश में और सारी पृय्वी पर भर जाये। इस प्रकार पाँचवाँ दिन हो गया। – स्लाइड 8
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फिर परमेश्‍वर ने कहा, “पृथ्वी से एक एक जाति के जीवित प्राणी, अर्थात् घरेलू पशु, और रेंगनेवाले जन्तु, और पृथ्वी के वनपशु, जाति जाति के अनुसार उत्पन्न हों,” और वैसा ही हो गया। परमेश्‍वर ने देखा कि अच्छा है। – स्लाइड 9
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अंततः परमेश्वर ने पुरुष और स्त्री को अपनी छवि और समानता में बनाया। उसने उन्हें अपनी समस्त सृष्टि पर शासन करने का अधिकार दिया। उन्हें सभी जानवरों और पौधों और फूलों की देखभाल करनी थी। परमेश्वर ने देखा कि जो कुछ उसने बनाया था वह बहुत अच्छा था। यह सृष्टि का छठा दिन था। सातवें दिन परमेश्वर ने विश्राम किया। – स्लाइड 10
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