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दबोरा और बाराक इस्राएल को छुड़ाते हैं

दबोरा और बराक सीसरा की सेना से लड़ते हैं।
CC BY-NC-ND
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20 वर्ष से इस्राएल के लोग परमेश्वर के स्थान पर मूरतों की पूजा करते रहे हैं। परिणामस्वरूप परमेश्वर ने उन्हें सेनापति सीसरा और कनान के राजा याबीन के नेतृत्व में उनके शत्रुओं द्वारा उत्पीड़ित होने दिया। इन शत्रुओं ने उनके लोहे और औजारों को चुरा लिया था इसलिए उनके पास बस कुछ ही हथियार थे। उन्होंने उनकी फसलों को चोरी करने के लिए छापा मारा और उनके साथ क्रूर व्यवहार किया। जब वे इस कुरता को और नहीं सह सकते थे, तो उन्होंने उन्हें छुड़ाने के लिए यहोवा से दोहाई दी। – स्लाइड 1
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परमेश्वर ने दबोरा नामक एक अच्छे और बुद्धिमान न्यायाधीश को उन्हें अपने नियम सिखाने और सही और गलत जानने में मदद करने के लिए खड़ा किया था। वह एप्रैम के पहाड़ी देश में एक खजूर के पेड़ के नीचे लोगों से मिलती थी। एक दिन उसने बाराक के पास दूत भेजे, जो इस्राएल के उत्तर में रहता था, कि उससे आकर उससे भेंट करे। – स्लाइड 2
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जब बाराक वहाँ पहुँचा तो उसने उससे कहा, 'इस्राएल का परमेश्वर यहोवा चाहता है कि तू ताबोर पर्वत पर, दस हजार योद्धाओं को अपने साथ ले जाए। परमेश्वर सेनापति सीसरा को उसके सब रथों और सेना समेत तुम्हारे साथ युद्ध करने के लिये ले आएगा - और तुम उन पर जय पाओगे।' बराक ने उत्तर दिया, 'मैं केवल तभी जाऊँगा जब तुम मेरे साथ जाओगे।' दबोरा ने सहमति व्यक्त की क्योंकि उसने परमेश्वर पर भरोसा किया, लेकिन बराक से कहा। 'चूंकि तुम युद्ध में जाने से हिचकिचाए, युद्ध जीतने का सम्मान तुमको नहीं बल्कि एक स्त्री को मिलेगा।' – स्लाइड 3
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बाराक, दबोरा और दस हजार पुरूष ताबोर पर्वत पर इकट्ठे हुए।  सेनापति सीसरा ने अपने साथ कीशोन नदी के घाटी में 900 रथों के साथ 30,000 हथियारों से लैस लोगों को इकट्ठा किया। हालांकि वे संख्या में अधिक थे, दबोरा ने कहा, 'जाओ! यह वह दिन है जब यहोवा ने सीसरा को तेरे हाथ में कर दिया है। क्या यहोवा तुझ से आगे नहीं गया?' बराक ने अपने 10,000 आदमियों को आक्रमण के लिए प्रेरित किया। – स्लाइड 4
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उस समय यहोवा ने मूसलाधार वर्षा, ओले, बिजली और गरज के साथ एक बड़ा तूफान भेजा। नदी में बाढ़ आ गई और सीसरा के भारी रथ कीचड़ में फंस गए। सीसरा के लोग घबरा गए और बाराक और उसके आदमियों ने सब पर जीत हासिल कर ली। सीसरा अपने रथ से कूद कर पैदल ही भाग निकला। – स्लाइड 5
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वह याएल नाम की एक स्त्री के तम्बू में शरण लेने के लिए दौड़ा। लेकिन जब वह थक कर सो गया तो उसने उसे मारने के लिए उसके सिर पर तंबू की खूंटी ठोक दी। एक स्त्री ने सीसरा पर विजय प्राप्त किया - जैसा कि यहोवा ने कहा था। – स्लाइड 6
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