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राजा आसा परमेश्वर पर भरोसा करने में विफल रहता है और संघर्ष का सामना करता है

राजा आसा परमेश्वर पर भरोसा करने के बजाय समर्थन खरीदने की कोशिश करता है।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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राजा आसा ने यहूदा के राज्य पर 35 वर्ष तक शासन किया । उसके राज्य के पन्द्रहवें वर्ष में विशाल कूशी सेना ने यहूदा पर आक्रमण किया, परन्तु आसा ने विजय के लिए परमेश्वर पर भरोसा किया l राष्ट्र ने पूरे दिल से परमेश्वर की आज्ञा मानने का वादा किया और २० साल तक शांति का आनंद लिया l – स्लाइड 1
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इस्राएलियों को दो राष्ट्रों में विभाजित किया गया। राजा आसा यहूदा के दक्षिणी राज्य में दो यहूदी जनजातियों पर शासन करता था, जबकि राजा बाशा इस्राएल के उत्तरी राज्य में 10 यहूदी जनजातियों पर शासन करता था। – स्लाइड 2
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राजा आसा के राज्य के 36वें वर्ष में, राजा बाशा ने अपनी सेना इकट्ठी की और दक्षिण में यहूदा की सीमा पर चला गया। बाशा ने अराम के राजा के साथ गठबंधन किया, और राजा आसा को धमकाने के लिए एक शक्तिशाली बल इकट्ठा किया l – स्लाइड 3
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राजा बाशा की सेना बिन्यामीन के गोत्र के सीमा क्षेत्र में रामा शहर में चली गई, जो यहूदा में और बाहर एक मुख्य व्यापार मार्ग को नियंत्रित करता था। – स्लाइड 4
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बाशा की सेना ने नगर को ले लिया और उसे दृढ़ किया। उन्होंने अब सीमा पर नियंत्रण कर लिया ताकि कोई यहूदा के भीतर और बाहर न जा सके। – स्लाइड 5
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राजा आसा को रामा पर फिर से कब्जा करने की जरूरत थी, लेकिन वह जानता था कि यह मुश्किल होगा जबकि राजा बाशा को अराम के शक्तिशाली राजा बेन-हद्दाद और उसकी सेना का समर्थन प्राप्त था। आसा ने परमेश्वर से सहायता मांगने और उस पर भरोसा करने के बजाय अपनी योजना बनाई। – स्लाइड 6
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शासनकाल के शुरुआत में आसा ने मन्दिर के भण्डार में चाँदी और सोना दिया था। फिर उसने आज्ञा दी कि मन्दिर के भण्डार पर छापा मारा जाए, और सोना-चाँदी इकट्ठा करके अराम के राजा बेन-हद्दद के पास घूस के तोर पर भेजा जाए। – स्लाइड 7
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तब आसा ने यहोवा के भवन और राजभवन के भणडारों में से चान्दी-सोना निकाल दमिश्कवासी अराम के राजा बेन-हदद के पास दूत भेज कर यह कहा, कि जैसे मेरे-तेरे पिता के बीच वैसे ही मेरे-तेरे बीच भी वाचा बन्धे; देख मैं तेरे पास चान्दी-सोना भेजता हूं, इसलिये आ, इस्राएल के राजा बाशा के साथ की अपनी वाचा को तोड़ दे, ताकि वह मुझ से दूर हो। – स्लाइड 8
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बेन-हदद ने परमेश्वर का सोना और चाँदी ले लिया और उस वाचा पर सहमत हो होकर उसने फौरन इस्राएल पर आक्रमण करने के लिए अपनी सेना इकट्ठी की। – स्लाइड 9
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अपने दलों के प्रधानों से इस्राएली नगरों पर चढ़ाई करवा कर इय्योन, दान, आबेल्मैम और नप्ताली के सब भणडार वाले नगरों को जीत लिया l जब बाशा ने सुना कि उत्तर में उस पर आक्रमण किया जा रहा है, तो उसने अपनी भूमि की रक्षा के लिए दक्षिण में अपने सैनिकों को वापस ले लिया l तब राजा आसा रामा को फिर से प्राप्त करने के लिए आगे बढ़ा और बाशा के छोड़े गए भवन के पत्थरों और लकड़ी को लूट लिया। और उसने इन सामग्रियों का उपयोग सीमावर्ती कस्बों को दृढ़ करने के लिए किया l – स्लाइड 10
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परमेश्वर इस बात से प्रसन्न नहीं हुआ कि आसा ने मन्दिर का खजाना लूट लिया l उसने हनानी भविष्यद्वक्ता को यह घोषित करने के लिए भेजा, तू ने जो अपने परमेश्वर यहोवा पर भरोसा नहीं रखा वरन अराम के राजा ही पर भरोसा रखा है, इस कारण अराम के राजा की सेना तेरे हाथ से बच गई है। परमेश्वर ने तुमको शक्तिशाली कूशियों की सेना पर विजय प्रदान की, जब तू ने यहोवा पर भरोसा रखा था, इस कारण उसने उन को तेरे हाथ में कर दिया। देख, यहोवा उनको मजबूत करता है जो उसके लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं। तूने यह काम मूर्खता से किया है, इसलिये अब से तू युद्ध में फंसा रहेगा। – स्लाइड 11
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राजा आसा परमेश्वर के सन्देश से इतना क्रोधित हुआ कि उसने हनानी नबी को बन्दीगृह में डाल दिया। वह अभिमानी हो गया और उसने जिन लोगों पर शासन किया उनमें से कुछ पर क्रूरतापूर्वक अत्याचार किया। – स्लाइड 12
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तीन साल बाद राजा आसा के पैरों में गंभीर रोग हुआ, और वह रोग अत्यन्त बढ़ गया, तौभी उसने रोगी हो कर यहोवा की नहीं वैद्यों ही की शरण ली। उसने परमेश्वर से मदद मांगने से इनकार कर दिया। दो साल बाद उनकी मृत्यु हो गई। – स्लाइड 13
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राजा आसा को एक कब्र में दफनाया गया और उनके सम्मान में एक विशाल आग जलाई गई थी। जब राजा आसा ने परमेश्वर की सहायता मांगी तो उसे जीत और शांति का आनंद मिला लेकिन जब उसने परमेश्वर की सहायता के बिना समस्याओं को हल करने का प्रयास किया तो उसे और अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। – स्लाइड 14
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इससे पहले की घटनाये FreeBibleimages.org पर 'राजा आसा जीत और शांति के लिए परमेश्वर पर भरोसा करता है” नामक शीर्षक से उपलभ्द है – स्लाइड 15