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यीशु का सूखे हाथ वाले मनुष्य को चंगा करना

सूखे हाथ वाला मनुष्य सब्त के दिन चंगा किया जाता है।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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यह विश्राम का सब्त का दिन था। यीशु और उसके चेले अनाज के कुछ खेतों से होकर जा रहे थे। शिष्य भूखे थे और अनाज की कुछ बालें लेने लगे, उन्हें अपने हाथों में रगड़ कर बालें तोड़कर खान लगे। – स्लाइड 1
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यह देखकर फरीसियों ने यीशु से कहा, 'देख! तेरे चेले सब्त के दिन काम करके व्यवस्था को तोड़ रहे हैं।’ वे चेलों पर आरोप लगा रहे थे कि वे अपने हाथों से बालें तोड़ रहे हैं। – स्लाइड 2
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यीशु ने उत्तर दिया, 'जब दाऊद राजा और उसके साथी भूखे हुए, तब वे परमेश्वर के भवन में गए, और पवित्र रोटी खाई जिसे खाना उनके लिए उचित नहीं था। – स्लाइड 3
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यहाँ मन्दिर से भी बड़ा कुछ है। यदि आप समझ जाते कि परमेश्वर का क्या अर्थ है जब उसने कहा, “मैं दया चाहता हॅू बलिदान नहीं” (होशे 6:6) तो आप निर्दोषों पर आरोप नहीं लगा रहे होते। क्योंकि मनुष्य का पुत्र सब्त के दिन का प्रभु है।' – स्लाइड 4
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विश्राम के एक और सब्त के दिन, यीशु उपदेश देने के लिए आराधनालय में गया। वहाँ एक मनुष्य था जिसका दाहिना हाथ सूख गया था। फरीसी और व्यवस्था के शिक्षक यह देखने के लिए करीब से देख रहे थे कि क्या यीशु सब्त के दिन चंगा करेगा या नहीं। – स्लाइड 5
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यीशु ने जान लिया कि वे क्या सोच रहे हैं, और उस सूखे हाथ वाले से कहा, 'उठ और सबके सामने खड़ा हो।' वह आदमी खड़ा हो गया। – स्लाइड 6
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यीशु पर दोष लगाने का कारण ढूँढ़ते हुए उन्होंने पूछा, 'क्या सब्त के दिन चंगा करना उचित है?' यीशु ने उत्तर दिया, 'यदि तुम में से किसी की भेड़ हो, और वह सब्त के दिन गड़हे में गिर जाए, तो क्या तुम उसे इसे पकड़ कर बाहर निकालो?' – स्लाइड 7
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यीशु ने आगे कहा, 'मनुष्य का मूल्य भेड़ से कितना अधिक है! सब्त के दिन क्या अधिक उचित है: अच्छा करना या बुरा करना, जीवन को बचाना या उसे नष्ट करना? सब्त के दिन भलाई करने से तुम व्यवस्था नहीं तोड़ते। – स्लाइड 8
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उस ने चारों ओर उन सब को देखा, और उस मनुष्य से कहा, 'अपना हाथ बढ़ा।' – स्लाइड 9
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उसने वैसा ही किया और उसका हाथ पूरी तरह चंगा हो गया। – स्लाइड 10
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परंतु फरीसी और व्यवस्था के शिक्षक यीशु के इस कार्य से जल उठे और यीशु को जान से मारने का षड़यंत्र बनाने लगे। – स्लाइड 11
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