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मूसा और सोने का बछड़ा

हारून और इस्राएली एक मूर्ति बनाते हैं।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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निर्गमन 32 मूसा सीनै पर्वत पर चालीस दिन और रात रहा, और नीचे लोग सोचते रहे, कि क्या वह फिर कभी लौटेगा? – स्लाइड 1
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वे हारून के पास आए और कहने लगे, 'हम नहीं जानते कि मूसा को क्या हुआ है। आइए हम देवताओं को बनाये ताकि वे हमारा नेतृत्व करें।' – स्लाइड 2
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हारून ने उनसे कहा कि वे सोने की बालियाँ जो स्त्रियों और बच्चों ने पहनी हुई हैं, उतार कर उसे दे दो ताकि वे पिघलाकर एक मूर्ति बनाये। – स्लाइड 3
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सोने को पिघलाया गया और सोने के बछड़े का आकार दिया गया। – स्लाइड 4
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लोगों ने जवाब में कहा, 'ये हमारे देवता हैं जो हमें मिस्र से निकाल लाए हैं।' – स्लाइड 5
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हारून ने कहा, 'कल एक पर्व होगा।' – स्लाइड 6
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अगले दिन की शुरुआत में, लोगों ने होमबलि चढ़ाई, खाया, पिया और सोने के बछड़े की पूजा करते हुए एक जंगली, शोर-शराबे वाली पार्टी शुरू की। – स्लाइड 7
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इस बीच, मूसा, जो अभी भी सीनै पर्वत पर था, को परमेश्वर द्वारा निर्देश दिया गया। 'तुरंत नीचे जाओ। जिन लोगों को मैं मिस्र से निकाल लाया हूँ वे बिगड़ गए हैं।’ – स्लाइड 8
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'उन्होंने बछड़े के रूप में एक मूर्ति बनाई है और वे झुककर बलि चढ़ा रहे हैं। वे कह रहे हैं, 'ये हमारे देवता हैं जो हमें मिस्र से निकाल लाए हैं।' – स्लाइड 9
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उनकी अनाज्ञाकारिता से परमेश्वर इतना दुखी हुआ कि उसने मूसा से कहा कि वह उन्हें नष्ट करना चाहता है। – स्लाइड 10
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मूसा ने परमेश्वर से उन लोगों को नष्ट न करने की याचना की जिन्हें उसने मिस्र से छुड़ाया था। वह जानता था कि परमेश्वर ने उन्हें एक महान राष्ट्र बनाने का वादा किया था। – स्लाइड 11
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मूसा ने उन दो तख्तियों को उठाया जिन पर परमेश्वर ने अपनी आज्ञाएँ लिखी थी और पर्वत के नीचे उतरने लगा। – स्लाइड 12
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आधे रास्ते में मूसा की मुलाकात यहोशू से हुई जो उसकी प्रतीक्षा कर रहा था। 'ऐसा लगता है कि छावनी में युद्ध चल रहा है,' यहोशू ने कहा। 'यह जीत या हार की आवाज नहीं है,' मूसा ने उत्तर दिया। 'यह गाने बजाने की आवाज है।' – स्लाइड 13
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जब मूसा ने देखा कि लोग सोने के बछड़े के आगे बेतहाशा नाच रहे हैं, तो वह क्रोधित हुआ। उसने पत्थर की दोनों तख्तियों को पर्वत के नीचे भूमि पर फेंक दिया और उनके टुकड़े-टुकड़े कर डाले। – स्लाइड 14
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मूसा ने उस बछड़े को लिया जिसे लोगों ने बनाया था और उसे आग में जला दिया। तब उस ने उसको पीसकर चूर चूर कर डाला, और जल के ऊपर छिड़क दिया, और इस्राएलियों को पिला दिया। – स्लाइड 15
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मूसा हारून के ऊपर क्रोधित हुआ। 'इन लोगों ने तुम्हारे साथ क्या किया, कि तुमने उन्हें इतना बड़ा पाप कराया?' हारुन ने कहा - 'जब उन्होंने देखा कि तुम लंबे समय से नीचे नहीं आये, तो वे चाहते थे कि देवता उनकी अगुवाई करें'। 'मैंने आग में सोना डाला और यह बछड़ा निकला।' – स्लाइड 16
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मूसा ने छावनी के द्वार पर खड़े होकर कहा, जो कोई यहोवा की ओर से हो मेरे पास आए। – स्लाइड 17
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लेवी गोत्र के लोग उसके पास इकट्ठे हो गए। मूसा ने उनसे कहा कि वे अपनी तलवारें ले लें और परमेश्वर की आज्ञा न मानने वालों को परमेश्वर का दण्ड दें। – स्लाइड 18
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लेवी वंशियों ने आदेश का पालन किया। तब मूसा ने उनसे कहा, 'जैसा कि तुमने परमेश्वर के प्रति अपनी निष्ठा दिखाई है, उसने तुम्हें अपनी सेवा करने के लिए चुना है।' – स्लाइड 19
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मूसा ने बाकी लोगों को एक साथ बुलाया। 'तुमने बहुत बड़ा पाप किया है, लेकिन मैं ऊपर जाकर परमेश्वर से बात करूँगा।' – स्लाइड 20
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मूसा पहाड़ पर वापस चढ़ गया ताकि परमेश्वर से अपने लोगों को उनकी पाप के लिए क्षमा करने के लिए कह सके। – स्लाइड 21
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परमेश्वर ने मूसा से कहा कि जो लोग सोने के बछड़े की पूजा करेंगे उन्हें प्लेग से दंडित किया जाएगा, लेकिन बाकी लोगों को उस देश में ले जाया जाएगा जिसे परमेश्वर ने उन्हें देने का वादा किया था। – स्लाइड 22
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परमेश्वर ने मूसा से कहा कि वह पत्थर की दो नई पटियाओं को लेकर फिर पहाड़ पर लौट जाए। तब यहोवा ने उन पटियाओं पर वे बातें लिखीं जो उस ने पहिले लिखीं थी, अर्थात दस आज्ञाएं। मूसा पर्वत से नीचे आया और पटियाओं को वाचा के सन्दूक में रखा। ये वे नियम हैं जिन्हें परमेश्वर ने हम सभी को पालन करने के लिए दिया है। – स्लाइड 23
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