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मूसाः रेगिस्तान में भोजन और पानी

परमेश्वर रेगिस्तान में मन्ना और पीने का पानी प्रदान करते हैं।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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निर्गमन 15:22-27<br/>बादल का खंभा लोगों को लाल समुद्र से शूर के जंगल में ले गया। – स्लाइड 1
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उन्होंने तीन दिनों तक यात्रा की और उन्हें ताजा पानी नहीं मिला। – स्लाइड 2
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इसके बाद वे एक ऐसी जगह पहुंचे जहाँ पानी तो था लेकिन वह कड़वा और पीने लायक नहीं था। (उन्होंने उस स्थान को मारा नाम दिया जिसका इब्रानी में अर्थ कड़वा है।) – स्लाइड 3
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प्यासी भीड़ मूसा पर कुड़कुड़ाने लगी, ‘हम क्या पीएंगे?’ – स्लाइड 4
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मूसा परमेश्वर से सहायता के लिए प्रार्थना करने लगा। – स्लाइड 5
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परमेश्वर ने उसे लकड़ी का टुकड़ा दिखाया, उसे मूसा ने पानी में फेंक दिया। – स्लाइड 6
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तुरंत पानी पीने के लायक हो गया। – स्लाइड 7
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मूसा ने घोषणा की, ‘यदि तू परमेश्वर की सुने और उसकी आज्ञा मानें तो वह तुम्हें उन महामारियों से दूर रखेगा जो उसने मिस्र के लोंगो पर ड़ालीं थी। ‘यहोवा तुम्हारा चंगा करने वाला परमेश्वर है।’ – स्लाइड 8
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तब लोग मरुस्थल से होते हुए एलीम नाम के जल स्त्रोत में गए जहाँ उन्हें पानी के 12 सोते और 70 खजूर के पेड़ मिले। – स्लाइड 9
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यहाँ पर उन्होंने पानी के आसपास अपनी छावनी ड़ाली। – स्लाइड 10
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निर्गमन 16:1-36<br/>इसके बाद वे एलीम से सीन पर्वत की ओर चल पड़े वे सीन नामक रेगिस्तान से होकर गुजर रहे थे। – स्लाइड 11
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उन्हें रेगिस्तान में बहुत जोरों से भूख लगी और वे मूसा और हारून पर कुड़कुड़ाने लगे। – स्लाइड 12
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‘वे शिकायतें करने लगे, ‘मिस्र में तो हमारे पास भोजन की बहुतायत थी। लेकिन तुम हमे इस रेगिस्तान में भूख से मार ड़ालने के लिए लाए हो।’ – स्लाइड 13
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परमेश्वर ने मूसा से कहा, ‘मै स्वर्ग से 6 दिनों तक रोटी की वर्षा करूँगा। छठे दिन लोग अपने लिए दुगना बटोरें। सातवें दिन कोई रोटी स्वर्ग से नहीं गिरेगी क्योंकि वह परमेश्वर के विशेष विश्राम का दिन होगा।’ – स्लाइड 14
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मूसा और हारून ने घोषणा की, ‘परमेश्वर ने तुम्हारी कुड़कुड़ाहट सुनी है और आज रात वह तुम्हें जी भर मांस खिलाएगा और कल के दिन सुबह तुम्हें जी भरकर रोटी देगा, इससे तुम जान लोगे कि वह प्रबंध करने वाला परमेश्वर है। हम कौन हैं? तुम्हारा कुड़कुड़ाना परमेश्वर ही के विरोध में है। – स्लाइड 15
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हारून ने भीड़ से परमेश्वर के सामने आने को कहा। जब उन्होंने मरुस्थल की ओर दृष्टि की तो उन्होंने प्रभु की महिमा को बादल में प्रकट होते देखा। यहोवा ने मूसा से वादा किया कि वह उस शाम मांस और सुबह रोटी भेज रहा है। – स्लाइड 16
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उस शाम बटेर नामक पक्षियों का एक बड़ा झुंड शिविर के पास उतरा। भूखे लोगों ने उन्हें पकड़ लिया और स्वादिष्ट मांस खाया। – स्लाइड 17
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अगली सुबह जमीन पर ओस की एक परत थी जो सूख गई और जमीन पर पाले के पतले गुच्छे की तरह बन गई। 'यह क्या है?' उन्होंने मूसा से पूछा। 'यह क्या है?' के लिए इब्रानी शब्द 'मन्ना' है। – स्लाइड 18
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मूसा ने समझाया, 'यह वह रोटी है जो परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की थी। 'हर किसी को उतना ही इकट्ठा करना चाहिए जितना उसे चाहिए। जरूरत से ज्यादा जमा न करें और रात भर के लिए जमा कर लें।' – स्लाइड 19
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सब लोग 'यह क्या है? (मन्ना) जमा करते थे। वह धनिये के समान सफेद था और उसका स्वाद शहद के बने पुए जैसा था। – स्लाइड 20
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मूसा ने समझाया कि वे पाँच दिन के लिये पर्याप्त बटोर लें। केवल छठे दिन उन्हें आवश्यकता से दूना अधिक बटोरना था, क्योंकि सातवें दिन मन्ना न मिलेगा। – स्लाइड 21
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अधिकांश लोगों ने परमेश्वर की आज्ञा मानी और उस दिन के लिए पर्याप्त भोजन इकट्ठा किया। – स्लाइड 22
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हालाँकि कुछ लोग लालची थे, परमेश्वर की आज्ञा नहीं मानी, ज़रूरत से ज़्यादा इकट्ठा किया और रात भर जमा किया। अगली सुबह यह कीड़ों से भरा हुआ था और भयानक गंध आ रही थी। – स्लाइड 23
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छठे दिन लोगों ने जितना परमेश्वर ने उन्हें बताया था उससे दुगना इकट्ठा किया। – स्लाइड 24
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सातवें दिन अतिरिक्त मन्ना ताजा था और वे उसे खा सकते थे। – स्लाइड 25
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कुछ लोग सातवे दिन मन्‍ना को ढूँढ़ने निकले, परन्‍तु वह न मिला। मूसा ने चिताया, 'परमेश्‍वर ने सातवें दिन को विश्राम का विशेष दिन ठहराया है।' 'हर किसी को वहीं रहना है जहां वे हैं और आराम करें।' – स्लाइड 26
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इस्राएलियों ने सीनै पर्वत की ओर कूच किया। (उन्हें 40 वर्ष तक जंगल में भटकते हुए प्रतिदिन मन्ना खाना था)। – स्लाइड 27
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निर्गमन 17:1-7 जब उन्होंने रपीदीम में डेरा डाला, तब पीने का पानी न मिला। उन्होंने शिकायत की और यह कहते हुए मूसा से झगड़ने लगे, ‘हमें पीने के लिए पानी दो!’ ‘तुम मुझसे क्यों झगड़ते हो? मूसा ने पूछा। 'तुम परमेश्वर की परीक्षा क्यों लेते हो?' – स्लाइड 28
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मूसा ने मदद के लिए परमेश्वर को पुकारा। 'मैं इन लोगों के साथ क्या करूँ? वे मुझ पर पथराव करने को तैयार हैं।’ ‘लोगों के पास जाओ और प्रमुखों (पुरनियों) को अपने साथ होरेब की चट्टान पर ले जाओ,’ परमेश्वर ने उत्तर दिया। 'अपनी लाठी अपने साथ ले जाओ और चट्टान पर प्रहार करो।' – स्लाइड 29
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अगुवे मूसा के पीछे-पीछे होरेब की चट्टान तक गए, और देखते रहे, कि मूसा ने उस पर लाठी मारी। – स्लाइड 30
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चट्टान में से पानी फूट पड़ा, ठीक जैसे परमेश्वर ने प्रतिज्ञा की थी। – स्लाइड 31
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सबने पानी पिया। मूसा ने उस स्थान को 'मस्सा और मेरिबा' कहा क्योंकि लोगों ने यह पूछकर परमेश्वर पर संदेह किया था, 'क्या यहोवा हमारे साथ है या नहीं?' (हिब्रू में, मस्सा का अर्थ है 'परीक्षा' और मेरिबा का अर्थ है 'झगड़ा')। परमेश्वर ने अपना वादा निभाया था और रेगिस्तान में भोजन और पानी प्रदान किया था। – स्लाइड 32
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