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परमेश्वर याकूब से स्वप्न में बात करता है

याकूब स्वर्ग की सीढ़ी का सपना देखता है।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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जब याकूब को पता चला कि उसका भाई एसाव अपने पिता के आशीर्वाद से उसे धोखा देने का बदला लेने के लिए उसे मारने की योजना बना रहा है, तो उसकी माँ ने सुझाव दिया कि वह अपने भाई लाबान के साथ रहने के लिए भाग जाए। याकूब के जाने से पहिले इसहाक ने उसको आशीर्वाद दिया, और कहा, कि किसी कनानी स्त्री से ब्याह न करना, परन्तु लाबान की बेटियों में से एक पत्नी  ढूंढ़ लेना। – स्लाइड 1
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इसलिए याकूब ने हारान के उत्तर की लंबी यात्रा पर प्रस्थान किया जहाँ लाबान और उसका परिवार रहता था। – स्लाइड 2
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वह अपनी यात्रा में रात को रुका, क्योंकि सूर्य अस्त हो गया था। एक बड़ा पत्थर लेकर उसने उसे अपने सिर के नीचे रख लिया और सोने के लिए लेट गया। – स्लाइड 3
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उसने स्वप्न में देखा कि एक सीढ़ी पृथ्वी पर टिकी हुई है, और उसका सिरा स्वर्ग तक पहुंचता है, और परमेश्वर के दूत उस पर चढ़ते और उतरते हैं। वहाँ उसके ऊपर यहोवा खड़ा था। – स्लाइड 4
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यहोवा ने कहा, 'मैं यहोवा, इब्राहीम और इसहाक का परमेश्वर हूँ। जिस भूमि पर तू लेटा है, उसे मैं तुझे और तेरे वंश को दूंगा। तेरा वंश भूमि की धूल के समान होगा, और तू चारों ओर फैल जाएगा। तेरे और तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सब लोग आशीष पाएंगे। मैं तेरे संग रहूंगा, और जहां कहीं तू जाए वहां तेरी रक्षा करूंगा, और तुझे इस देश में लौटा ले आऊंगा। मैं तुम्हें तब तक नहीं छोडूंगा जब तक मैं अपने वचन को पूरा नहीं कर लेता।' – स्लाइड 5
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जब याकूब उठा तो उसने सोचा, 'यहोवा इस स्थान पर है, और मैं इस बात को न जानता था।' वह ड़रकर कहने लगा, यह स्थान क्या ही अदभु है यह परमेश्वर का घर है औ स्वर्ग का द्वार है।' – स्लाइड 6
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अगले दिन सवेरे याकूब ने उस पत्थर को ले लिया जिसे उसने अपने सिर के नीचे रखा था, और उसका खम्भा खड़ा किया, और उसके ऊपर तेल डाल दिया। – स्लाइड 7
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उसने उस स्थान को बेतेल कहा जिसका अर्थ है ‘परमेश्वर का घर।’ – स्लाइड 8
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याकूब ने एक मन्नत माँगा कि यदि परमेश्वर मेरे साथ रहे और मुझे पहनने के लिए वस्त्र और खाने के लिए भोजन दे और  मैं अपने पिता के घराने मे सुरक्षित लौट आऊं तो प्रभु मेरा परमेश्वर होगा। – स्लाइड 9
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याकूब ने कहा, 'यह पत्थर, जिसे मैं ने खम्भा खड़ा किया है, परमेश्वर का भवन ठहरेगा, और जो कुछ तू मुझे देगा उसका दशमांश मैं तुझे दूंगा।' – स्लाइड 10
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फिर याकूब हारान को अपनी मामा लाबान के साथ रहने के लिए फिर से अपनी यात्रा पर चला गया। – स्लाइड 11
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