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दो पुत्रों का दृष्टांत

एक बेटा अपने पिता को अपने पथभ्रष्ट भाई का स्वागत करते हुए देख नाराज होता है।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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यीशु को सुनने के लिए अक्सर चुंगी लेनेवाले और नामी लोग आया करते थे इससे शास्त्री और फरीसी उस  से शिकायत करने लगे कि तू  पापियों से क्यों मिलता है। – स्लाइड 1
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इस बात पर यीशु न उनसे एक दृष्टांत कहा, किस मनुष्य के दो पुत्र थे उन में से छोटे ने पिता से  कहा कि ‘हे पिता संपत्ति मे से जो भाग मेरा हो, व मुझे दे दीजिए। उस ने उसको अपनी संपत्ति बांट दी।’ – स्लाइड 2
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'कुछ दिनों बाद छोटे बेटे ने अपना सारा सामान समेटा और दूर देश चला गया। – स्लाइड 3
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‘उसके पास धन था इसलिए उसने बहुत से  मित्र बना लिए। – स्लाइड 4
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उसने अपने धन को स्वार्थ मे खर्च कर दिया... – स्लाइड 5
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और वहां कुकर्म में अपना  संपत्ति उड़ा दी। – स्लाइड 6
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'जब उसका रूपया समाप्त हुआ, तब देश में बड़ा अकाल पड़ा, और वह भूका मरने  लगा। – स्लाइड 7
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उसके मित्र उसका हाल तक नहीं जानना चाहते थे। – स्लाइड 8
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'उसने सूअरों को चराने के लिए एक स्थानीय किसान को काम पर रखने के लिए राजी किया। वह इतना भूखा था कि जो फली वह सूअरों को खिला रहा था, वह भी उसे अच्छी लग रही थी। लेकिन किसी ने उसे कुछ नहीं दिया। – स्लाइड 9
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'उसने मन ही मन सोचा, 'घर में तो भाड़े के नौकरों को भी भरपेट खाना मिलता है, और यहाँ तो मैं भूख से मर रहा हूँ!' – स्लाइड 10
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'मैं अपने पिता के पास घर जाऊँगा और कहूँगा, 'पिताजी, मैंने स्वर्ग और आपके दोनों के विरुद्ध पाप किया है, और अब मैं आपका पुत्र कहलाने के योग्य नहीं हूँ। कृपया मुझे एक किराए के नौकर के रूप में ले लो। – स्लाइड 11
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'तो वह अपने पिता के पास घर लौट आया। वह अभी दूर ही था कि उसके पिता ने उसे आते देख लिया। प्रेम और करुणा से भरकर, वह अपने बेटे के पास दौड़ा, उसे गले लगाया और उसे चूमा। – स्लाइड 12
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'उसने सिसक कर कहा, 'पिताजी, मैंने स्वर्ग और आपके विरुद्ध पाप किया है, और अब मैं आपका पुत्र कहलाने के योग्य नहीं रहा। – स्लाइड 13
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'लेकिन उसके पिता ने नौकरों से कहा, 'जल्दी करो! उत्तम से उत्तम वस्त्र घर में लाकर उसे पहना देना। उसकी उँगली में अँगूठी और पाँव में जूतियाँ ले आओ। उस बछड़े को मार डालो जिसे हम पाल रहे हैं। हमें आनन्द मनाना चाहिए, क्योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, अब जी गया है। वह खो गया था, परन्तु अब वह मिल गया है।” – स्लाइड 14
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इस दौरान बड़ा बेटा खेत में काम कर रहा था। जब वह घर लौटा, तो उसने घर में संगीत और नृत्य सुना। जब उसे पता चला कि उसका भाई लौट आया है और उसके आने का जश्न मनाया जा रहा है, तो वह बहुत क्रोधित हुआ। – स्लाइड 15
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'उसके पिता ने उसे उत्सव में शामिल होने के लिए विनती की, लेकिन उसने जवाब दिया, 'इतने सालों में मैंने तुम्हारे लिए कड़ी मेहनत की है। – स्लाइड 16
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' 'और उस पूरे समय में तुमने मुझे कभी अपने दोस्तों के साथ दावत नहीं दी। फिर भी जब मेरा भाई धन उड़ाकर लौटता है, तब तुम पाले हुए बछड़े को कटवाया।” – स्लाइड 17
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उसके पिता ने उस से कहा, तू सदा मेरे पास रहा है, और जो कुछ मेरा है वह सब तेरा है। हमें यह खुशी का दिन मनाना था। क्योंकि तेरा भाई मर गया था, फिर जी उठा है! वह खो गया था, परन्तु अब मिल गया है!’” – स्लाइड 18
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