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दानियेल शेरों की मांद में

दानियेल प्रार्थना करता रहता है और सिंहों की मांद में डाल दिया जाता है।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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दानियेल बाबुल में एक यहूदी था जब मादियों और फारसियों ने इस्राएल पर अधिकार कर लिया था। दानियेल प्रतिदिन अपने देश में यरूशलेम की ओर मुंह करके प्रार्थना करता था। – स्लाइड 1
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दानियेल राजा दारा के 120 कर्मचारियों के ऊपर नियुक्त किए राज्यपालों में से एक था। – स्लाइड 2
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दानियेल ने राजा को अन्य राज्यपालों से बेहतर काम करके दिखाया इसलिए राजा ने उन सबके ऊपर उसे सारे साम्राज्य का प्रभारी नियुक्त कर दिया। – स्लाइड 3
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दूसरे राज्यपाल उससे ईर्ष्या रखने लगे और उसकी कमियां ढूँढने लगे। लेकिन वे ढूंढ न सके क्योंकि दानियेल भरोसेमंद और ईमानदार था। – स्लाइड 4
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वे कहने लगे, ‘हम दानियेल मे कोई कमी नहीं ढूंढ़ सकते इसलिए हमें उसे उसके परमेश्वर के आराधना के विषय में ही फँसाना होगा। – स्लाइड 5
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इसलिए वे राजा से मिलने पहुंचे और उससे कहा, ‘राजा दारा तेरे राज्य के सारे प्रधान ये चाहते है कि आप एक आदेश दें जिसक अतंर्गत 30 दिनों तक आपके अलावा किसी और ईश्वर की आराधना न की जाए। और जो कोई इस आज्ञा का उल्लंघन करे वह शेरों की मांद में ड़ाला जाए। राजा दारा ने आदेश पर हस्ताक्षर कर दिये ओर मादियों और फारसियो के कानून को बदला नहीं जा सकता था। – स्लाइड 6
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जब दानियेल ने इन बातों के बारे में सुना तो वह अपने घर पर गया और ऊपर जाकर खिड़की खोली और यरूशलेम की ओर मुंह करके प्रार्थना करने लगा वह दिन में तीन बार परमेश्वर से प्रार्थना किया करता था। – स्लाइड 7
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दानियेल के शत्रु राजा के पास पहुंचे और उससे कहा, ‘हे राजा, दानियेल तेरी आज्ञा को नही मानता। और प्रतिदिन तीन बार अपने परमेश्वर से प्रार्थना करता है। उसे अवश्य ही शेरों के मांद में फिकवाया जाना चाहिए। – स्लाइड 8
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जब राजा ने ये सुना तो वह दुखी हो गया और शाम तक दानियेल को बचाने का उपाय सोचता रहा। लेकिन मादियों और फारसियों के कानून को बदला नहीं जा सकता था। – स्लाइड 9
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इसलिए अंत में राजा ने दानियेल को शेरों की मांद में फिकवाने का आदेश दिया। उसने दानियेल से कहा ‘काश तेरा परमेश्वर जिसकी तू आराधना करता है तुझे शेरों से बचाए। इसके बाद गुफा के मुंह को पत्थरों से ढ़क दिया गया और उस पर राजकीय मोहर लगा दी गई ताकि कोई दानियेल को बचा न सके। राजा दारा अपने महल मे चला गया और रात भर जागता रहा। – स्लाइड 10
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भोर होते ही राजा दारा उठा और दौड़कर गुफा तक पहुंचा। वह चिल्लाया, ‘हे दानियेल जीवित परमेश्वर के दास, क्या उस परमेश्वर ने तुझे बचाया है जिसकी तू आराधना करता है? – स्लाइड 11
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दानियेल ने उत्तर दिया। ‘राजा चिरंजीवी रहे! परमेश्वर ने अपने स्वर्गदूत को भेजकर शेरों के मुंह को बंद कर दिया ताकि मुझे कोई हानि न पहुंचे उसने ऐसा इसलिये किया क्योंकि मैं निर्दोष हूॅं। राजा प्रसन्न हो उठा और दानियेल को गुफा से बाहर निकालने की आज्ञा दी। – स्लाइड 12
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इसके बाद राजा ने दानियेल पर आरोप लगाने वालों को शेरों के मांद में फिकवा दिया। शेरों ने उन्हें फाड़ ड़ाला और उनके हड्डियां तक चबा गए। – स्लाइड 13
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राजा दारा ने सारे देशों के लोगो को लिखवा भेजा, ‘मै आज्ञा देता हूँ कि हर कोई दानियेल के परमेश्वर का भय माने और आदर करे। क्योंकि वह जीवित परमेश्वर है और वह सदा राज्य करेगा उसके राज्य का कभी अंत न होगा, उसकी सामर्थ कभी खत्म न होगी, वह बचाता और आश्चर्यकर्म करता है। उसने दानियेल को शेरों से बचाया। – स्लाइड 14
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