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एस्तेर की कहानी: भाग 2- एस्तेर का यहूदियों को बचाने की योजना बनाना

रानी एस्तेर और यहूदी उपवास करते हैं और छुटकारे के लिए प्रार्थना करते हैं।
योगदानकर्ता स्वीट पब्लिशिंग
CC BY-SA
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अध्याय 4: जब यहूदियों ने कानून के बारे में सुना कि बारहवें महीनें के तेरहवें दिन, उन्हें मार ड़ाला जाएगा तो वे रोने और छाती पीटने लगे। बहुत से लोग शोक प्रकट करने के लिए टाट ओढ़कर राख में बैठ गए। – स्लाइड 1
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जब मोर्दकै ने हामान की यहूदियों को मारने की योजना के बारे में सुना तो उसने अपने वस्त्र फाड़ ड़ाले और वह अपने सिर पर राख ड़ाले और टाट ओढ़े हुए सारे नगर में छाती पीटता हुआ घूमने लगा। – स्लाइड 2
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जब एस्तेर ने मोर्दकै के विलाप के बारे में सुना तो उसने राजा के सेवक हाताक के हाथों उसके पास वस्त्र भिजवाए ताकि वह टाट के बदले उन्हें पहने। लेकिन उसने उन्हें पहनने से मना कर दिया। – स्लाइड 3
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हाताक को एस्तेर ने दोबारा भेजा ताकि वह मोर्दकै की चिंता का कारण पता कर सके। मार्दकै ने हाताक के हाथ में हामान का आज्ञा पत्र थमा कर उसे बताया कि हामान ने यहूदियों को मारने के लिए राजा के खजाने में कितना धन जमा कराने की प्रतिज्ञा की है। उसने हाताक से कहा कि वह एस्तेर से कहे कि वह राजा के सामने यहूदियों के जीवन की भीख मांगने के लिए जाए। – स्लाइड 4
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हाताक ने सारा समाचार एस्तेर को सुनाया। ‘जो कोई राजा के भीतरी कमरे में बिना बुलाए जाता था उसे राजा मरवा देता है, केवल राजा के सोने का राजदंड उसकी ओर बढ़ाने पर ही उसे छोड़ा जाता था। एस्तेर ने मोर्दकै से कहा कि राजा ने मुझे 30 दिनों से अपने पास नहीं बुलाया है।' – स्लाइड 5
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एस्तेर का संदेश मोर्दकै के पास पहुंचाया गया। उसने उसके पास एक और संदेश भेजा। ‘तू यह न सोचना कि तू महल में रहने के कारण सारे यहूदियों में से बच जाएगी।’ अगर तू चुप रही तो यहूदी नष्ट हो जाएंगे। कौन जानता है कि तुझे इस समय हमारी सहायता करने के लिए ही रानी चुना गया हो? – स्लाइड 6
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एस्तेर ने मोर्दके के पास उत्तर भिजवाया, ‘सारे यहूदियों को शूशन में एकत्रित कर और तीन दिन तक मेरे लिए उपवास करना और प्रार्थना करना और कुछ न खाना मैं भी तेरे संग प्रार्थना और उपवास करूंगी। इसके बाद मैं राजा के पास बिना बुलाए ही जाऊॅंगी और यदि मैं मरुँ तो मर जाऊॅं। – स्लाइड 7
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अध्याय 5: तीसरे दिन एस्तेर अपने राजकीय वस्त्र पहनकर राजा के भीतरी आंगन के सामने खड़ी हो गई। जब राजा ने उसे देखा तो वह प्रसन्न हो गया और उसकी जान बख्शने के लिए अपना सोने का राजदंड उसकी ओर बढ़ा दिया। – स्लाइड 8
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राजा ने कहा, ‘तुझे क्या चाहिए ? यदि तू मेरा आधा राज्य भी मांगेगी तो तुझे दिया जाएगा। एस्तेर ने कहा, मैं राजा और हामान को एक विशेष भोज के लिए आमंत्रित करना चाहूॅंगी। – स्लाइड 9
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इसलिए राजा और हामान एस्तेर के तैयार किए हुए भोज में गए। राजा ने पूछा, ‘तेरी क्या विनती है?’ – स्लाइड 10
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एस्तेर ने कहा, ‘मैं राजा और हामान को कल भी भोज में बुलाना चाहती हूॅं और इसके बाद मैं इस प्रश्न का उत्तर दूॅंगी।‘ – स्लाइड 11
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हामान खुश होता हुआ महल के बाहर चला गया लेकिन जब उसने मोर्दकै को उसके सामने न झुकते हुए देख तो वह आग-बबूला हो गया। – स्लाइड 12
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हामान अपने मित्र और उसकी पत्नी जेरेश के पास जाकर अपने धन और पुत्रों की बड़ाई करने लगा और बताने लगा कि राजा ने किस प्रकार उसे सम्मान दिया था। वह बोला, मुझे राजा और रानी ने कल भोज में आमंत्रित किया है। लेकिन जब तक मोर्दकै राजा के फाटक पर बैठता रहेगा मैं आनंदित नहीं हो सकता। – स्लाइड 13
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उसके मित्र और उसकी पत्नी ने उसे एक सुझाव दिया कि, वह एक खंभा खड़ा करवाया और राजा से मोर्दकै को उस पर लटकाने की विनती करे। हामान को सुझाव अच्छा लगा उसने 75 फुट ऊॅंचा खंभा खड़ा करवा दिया। – स्लाइड 14
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अध्याय 6: उस रात राजा सो नहीं सका उसने अपने राज्य के इतिहास की पुस्तक मंगवाई, पुस्तक उसके सामने पढ़ी गई। जब राजा को पढ़कर सुना गया कि कैसे मोर्दकै राजा की हत्या के षड़यंत्र को उजागर किया था तो उसने पूछा, मोर्दकै को इस कार्य के लिए किस प्रकार सम्मान दिया गया था? – स्लाइड 15
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सेवकों ने उत्तर दिया, ‘उसके लिए कुछ भी नहीं किया गया। राजा ने पूछा, शाही आंगन में कौन खड़ा हुआ है। उन्होंने कहा हामान आंगन में खड़ा हुआ है। (हामान मोर्दकै को खंभे पर लटकाने की अनुमति लेने के लिए आया हुआ था।) राजा ने आज्ञा दी, ‘हामान को अंदर बुलाओ।’ – स्लाइड 16
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राजा ने हामान से पूछा? ‘यदि राजा किसी का आदर करना चाहे तो उसे क्या करना चाहिए?’ उसने सोचा कि राजा उसका सम्मान करना चाहता है, इसलिए हामान ने कहा, ‘उस मनुष्य को शाही वस्त्र पहनाएं जाएं जो राजा पहनता है और उसे उस घोड़े पर बिठाया जाये जिसकी सवारी राजा ने की हो। – स्लाइड 17
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इसके बाद राजा का सबसे उत्तम सेवक घोड़े को सारे नगर में यह कहकर घुमाए। कि जिसकी प्रतिष्ठा राजा करना चाहे उसके साथ ऐसा ही किया जाएगा।’ – स्लाइड 18
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‘राजा ने आज्ञा दी जा जाकर एक वस्त्र और घोड़ा ले आ। और जैसा तूने सुझाव दिया है वैसा ही मोर्दकै यहूदी के साथ कर जो मेरे फाटक पर बैठता है। एक भी बात छूटने न पाए। – स्लाइड 19
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इसलिए हामान ने मोर्दकै को शाही वस्त्र पहनाए और उसे घोड़े पर बिठाया और उसके आगे-आगे सारे नगर में यह कहता हुआ चला कि, ‘जिसकी प्रतिष्ठा राजा करना चाहे उसके साथ ऐसा ही किया जाएगा।’ – स्लाइड 20
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तिरस्कृत होकर हामान दुख के मारे अपने घर आया और सारा समाचार अपनी पत्नी और मित्रों को कह सुनाया। उन्होंन कहा, ‘मोर्दकै तेरे लिए ठोकर का कारण तू उसके विरोध में खड़ा नहीं हो सकता, तू बर्बाद हो जाएगा।’ – स्लाइड 21
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उसी क्षण राजा के सेवक हामान को एस्तेर के भोज में लेने के लिए आ गए, जो एस्तेर ने राजा और हामान के लिए तैयार करवाया था। – स्लाइड 22
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