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मूसा और मिस्र की महामारियां भाग -2

मूसा और मिस्र पर अन्तिम तीन विपत्तियाँ।
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निर्गमन 10 परमेश्वर ने मिस्रियों पर सात विपत्तियां भेजी थीं। फिरौन के लिए मूसा की एक और चेतावनी थी। 'यदि तुम परमेश्वर के लोगों को जाने से मना करते हो तो वह देश पर टिड्डियों का कहर लाएगा - जिसे तुम्हारे माता-पिता और पूर्वजों ने कभी नहीं देखा होगा।' फिरौन के अधिकारियों ने उसे परमेश्वर के लोगों को जाने देने की सलाह दी। – स्लाइड 1
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परन्तु जब फिरौन को पता चला कि सभी इब्रानी दास जाने वाले हैं, तो उस ने केवल पुरूषों को जाकर परमेश्वर की उपासना करने की आज्ञा दी। तब उसने मूसा और हारून को उसके साम्हने से निकल जाने को कहा। – स्लाइड 2
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इसलिए मूसा ने मिस्र के ऊपर अपनी लाठी उठाई। सारी रात पुरवाई चलती रही और टिड्डियों का दल मिस्र पहुँच गया। उन्होंने सभी हरी पत्तियों और यहाँ तक की घास को भी खा लिया कि जमीन काला दिखने लगा। – स्लाइड 3
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फिरौन ने मूसा से कहा, 'मैंने परमेश्वर के विरुद्ध पाप किया है।' 'मुझे एक बार फिर क्षमा करें और इस घातक प्लेग को दूर करने के लिए ईश्वर से प्रार्थना करें।' – स्लाइड 4
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जब मूसा ने फ़िरौन के पास से प्रार्थना की, तब पवन ने अपनी दिशा बदल ली, और पच्छिम से टिड्डियां उड़ाकर लाल समुद्र में चली गईं। – स्लाइड 5
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फिरौन फिर से जिद्दी हो गया, उसने अपना वादा तोड़ दिया और परमेश्वर के लोगों को जाने और परमेश्वर का आराधना करने से मना कर दिया। – स्लाइड 6
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मूसा ने अपने हाथ फैलाए और देश में तीन दिन तक घोर अन्धकार छाया रहा। केवल गोशेन में, जहां इब्रानी दास रहते थे, उजियाला था। – स्लाइड 7
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मिस्रवासी न तो किसी को देख सकते थे और न ही चल-फिर सकते थे। – स्लाइड 8
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फिरौन ने मूसा को बुलाया। 'जाओ और परमेश्वर का आराधना करो। अपनी स्त्रियों और बच्चों को भी ले जाओ, परन्तु अपने पशुओं को पीछे छोड़ देना।’ मूसा ने आग्रह किया, ‘हमारे पशुओं को हमारे साथ चलना चाहिए। 'परमेश्‍वर को बलिदान चढ़ाने के लिए कुछ की ज़रूरत होती है।' – स्लाइड 9
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'मेरी दृष्टि से दूर हो जाओ,' फिरौन ने आदेश दिया। 'फिर कभी मेरे सामने मत आना। यदि तुम ऐसा करते हो, तो तुम मारे जाओगे।' – स्लाइड 10
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'जैसा आप कहते हैं,' मूसा ने उत्तर दिया। 'मैं आपके सामने दोबारा पेश नहीं होऊंगा। लेकिन परमेश्वर के पास भेजने के लिए एक और विपत्ति है। आधी रात के लगभग हर परिवार और जानवर का पहलौठा मर जाएगा और हर जगह रोना धोना होगा - परमेश्वर के लोगों को छोड़कर। 'निर्गमन 11। – स्लाइड 11
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मूसा गुस्से से लाल हो गया। 'तब तुम्हारे अधिकारी आएंगे और मेरे सामने झुकेंगे और हमें जाने के लिए कहेंगे। उसके बाद मैं चला जाऊंगा।’ तब मूसा मुड़ा और महल से बाहर चला गया। – स्लाइड 12
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तब यहोवा ने मूसा से कहा कि वह अपने लोगों से कह दे कि महीने के दसवें दिन को हर एक पुरूष जो एक परिवार का मुखिया हो, एक मेम्ने की बलि चढ़ाए। जो एक मेमना नहीं दे सकते थे उन्हें उस परिवार में शामिल होना चाहिए जिसके पास एक मेमना है। मेमनों को बिना किसी दोष के एक वर्ष का नर होना चाहिए। – स्लाइड 13
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परमेश्वर के लोगों ने आज्ञा मानी और प्रत्येक परिवार ने एक मेमने की बलि दी। तब परमेश्वर ने उनसे कहा कि वे उस वध किए हुए मेमने के लहू में से कुछ एक कटोरे में डालें। फिर खून में डूबा हुआ जूफा का गुच्छा लेकर जिस घर में वे मांस खाने जा रहे हों, उस घर के चौखट के ऊपर और दोनों अलंगों पर धब्बा लगाना चाहिए। – स्लाइड 14
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परमेश्वर ने समझाया कि उस रात वह न्याय लाने के लिए देश से होकर जाने वाला था। लेकिन अगर वह किसी घर के दरवाजे की चौखट पर खून देखता है तो वह पार हो जाता है और जो अंदर हैं उन्हें बख्श दिया जाता है। अत: इब्रानियों ने वैसा ही किया जैसा परमेश्वर ने निर्देश दिया था। – स्लाइड 15
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उस शाम, परमेश्वर के लोग मिस्र छोड़ने के लिए तैयार हो गए और भोजन के लिए बैठ गए जिसे वे बाद में फसह कहेंगे (क्योंकि परमेश्वर उन्हें बख्श देगा)। – स्लाइड 16
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मूसा ने समझाया कि हर साल फसह का खाना मनाया जाना चाहिए। और जब बच्चें पूछे कि इसका क्या अर्थ है तो उन्हें इसका अर्थ समझाना था और बताना था कि कैसे परमेश्वर ने मेमने के लहू से ढके उन घरों को बख्श दिया और अपने लोगों को आज़ाद कर दिया। – स्लाइड 17
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आधी रात को यहोवा देश के ऊपर से गुजरा, और फिरौन से लेकर मिस्र के सभी पहलौटे पुत्र मारे गए यहाँ तक कि हर जानवर का पहलौठा भी मारा गया। – स्लाइड 18
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उन घरों को छोड़कर जिनकी चौखटों पर खून लगा हुआ था, बाकी घरों में रोना-पीटना मच रहा था। – स्लाइड 19
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उसी रात फिरौन ने मूसा और हारून को बुलवाकर कहा, 'उठो। मेरे लोगों को छोड़ दो और जाओ और परमेश्वर की आराधना करो। अपने परिवारों और जानवरों को अपने साथ ले जाओ। कृपया मुझे आशीर्वाद दें।' – स्लाइड 20
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परमेश्वर के लोगों ने अपना सामान बांध लिया। मिस्रियों ने, इस डर से कि वे सब मर न जाएँ, उन्हें चाँदी और सोने के उपहार दिए। 'जल्दी करो और निकलो,' उन्होंने आग्रह किया। – स्लाइड 21
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परमेश्वर के लोग इतनी जल्दी भाग गए कि उन्हें रोटी के लिए बनाए गए आटे में खमीर मिलाने का समय नहीं मिला। वे 430 साल तक गुलाम रहे और अब आजाद थे। जैसा परमेश्वर ने वादा किया था। – स्लाइड 22
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