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शेरों की मांद में दानिय्येल

दानिय्येल आज्ञा मानना ​​और प्रार्थना करना चुनता है।
योगदानकर्ता योमिनिस्ट्री
CC BY-NC-ND
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यहोवा का जो वचन यिर्मयाह नबी के पास पहुंचा, और जिसे यिर्मयाह नबी ने सब यहूदियों के सब निवासियों से कहा, वह यह है: कि अपनी अपनी बुरी चाल और अपने अपने बुरे कामों से फिरो: तब जो देश यहोवा ने प्राचीनकाल में तुम्हारे पितरों को और तुम को भी सदा के लिये दिया है उस पर बसे रहने पाओगे और दूसरे देवताओं के पीछे हो कर उनकी उपासना और उन को दण्डवत मत करो l यिर्मयाह 25:1,5-6 – स्लाइड 1
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यह सुनने पर भी तुम ने मेरी नहीं मानी, वरन अपनी बनाई हुई वस्तुओं के द्वारा मुझे रिस दिलाते आए हो जिस से तुम्हारी हानि ही हो सकती है, यहोवा की यही वाणी है। सारी जातियों का यह देश उजाड़ ही उजाड़ होगा, और ये सब जातियां सत्तर वर्ष तक बाबुल के राजा के आधीन रहेंगी। <br/>यिर्मयाह 25:7,11 – स्लाइड 2
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बाबुल के राजा नबूकदनेस्सर ने यहूदा पर विजय प्राप्त की,  फिर वह पूरे यरूशलेम को अर्थात सब हाकिमों और सब धनवानों को जो मिल कर दस हजार थे, और सब कारीगरों और लोहारों को बन्धुआ कर के ले गया, यहां तक कि साधारण लोगों में से कंगालों को छोड़ और कोई न रह गया। <br/>2 राजा 24:14 – स्लाइड 3
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राजा नबूकदनेस्सर ने अपनी व्यक्तिगत सेवा के लिए सुंदर और बहुत बुद्धिमान यहूदी युवकों को चुना। दानिय्येल चुने गए लोगों में से एक था। राजा नबूकदनेस्सर दानिय्येल की सेवा की बहुत कदर करता था। राजा ने सब से अधिक दानिय्येल और उसके परमेश्वर की स्तुति कीl<br/>(दानिय्येल 1और 2) – स्लाइड 4
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परमेश्वर की इच्छा और शक्ति से, यहूदी लोगों ने बाबुल राष्ट्र की सेवा की और उन्हें एक सच्चे परमेश्वर के बारे में सिखाया। जैसे-जैसे साल बीतते गए, दानिय्येल राजा नबूकदनेस्सर और उन राजाओं की भी सेवा करता रहा जिन्होंने उसकी जगह ली। <br/>(दानिय्येल 3 और 5) – स्लाइड 5
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दारा मादी जब बासठ वर्ष का था, तब वह शासन करना शुरू करता है l दारा को यह अच्छा लगा कि अपने राज्य के ऊपर एक सौ बीस ऐसे अधिपति ठहराए, जो पूरे राज्य में अधिकार रखें। और उनके ऊपर उसने तीन अध्यक्ष, जिन में से दानिय्येल एक था l <br/>दानिय्येल 5:31, 6:1-2 – स्लाइड 6
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तब अध्यक्ष और अधिपति राजकार्य के विषय में दानिय्येल के विरुद्ध दोष ढूंढ़ने लगे; और उसके काम में कोई भूल वा दोष न निकला। तब वे लोग कहने लगे, हम उस दानिय्येल के परमेश्वर की व्यवस्था को छोड़ और किसी विषय में उसके विरुद्ध कोई दोष न पा सकेंगे l<br/>दानिय्येल 6:4-5 – स्लाइड 7
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उन्होंने राजा दारा से कहा:  राज्य के सारे अध्यक्षों ने, और हाकिमों, अधिपतियों, न्यायियों, और गवर्नरों ने भी आपास में सम्मति की है, कि राजा ऐसी आज्ञा दे और ऐसी कड़ी आज्ञा निकाले, कि तीस दिन तक जो कोई, हे राजा, तुझे छोड़ किसी और मनुष्य वा देवता से बिनती करे, वह सिंहों की मान्द में डाल दिया जाए। <br/>दानिय्येल  6:7 – स्लाइड 8
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इसलिये अब हे राजा, ऐसी आज्ञा दे, और इस पत्र पर हस्ताक्षर कर, जिस से यह बात मादियों और फारसियों की अटल व्यवस्था के अनुसार अदल-बदल न हो सके। तब दारा राजा ने उस आज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर कर दियाl<br/>दानिय्येल 6:8–9 – स्लाइड 9
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जब दानिय्येल को मालूम हुआ कि उस पत्र पर हस्ताक्षर किया गया है, तब वह अपने घर में गया जिसकी उपरौठी कोठरी की खिड़कियां यरूशलेम के सामने खुली रहती थीं, और अपनी रीति के अनुसार जैसा वह दिन में तीन बार अपने परमेश्वर के साम्हने घुटने टेक कर प्रार्थना और धन्यवाद करता था, वैसा ही तब भी करता रहा। <br/>दानिय्येल 6:10 – स्लाइड 10
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तब उन्होंने राजा से कहा, यहूदी बंधुओं में से जो दानिय्येल है, उसने, हे राजा, न तो तेरी ओर कुछ ध्यान दिया, और न तेरे हस्ताक्षर किए हुए आज्ञापत्र की ओर; वह दिन में तीन बार बिनती किया करता है l यह वचन सुनकर, राजा बहुत उदास हुआ l<br/>दानिय्येल 6:13–14 – स्लाइड 11
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तब राजा ने आज्ञा दी, और दानिय्येल लाकर सिंहों की मान्द में डाल दिया गया। उस समय राजा ने दानिय्येल से कहा, तेरा परमेश्वर जिसकी तू नित्य उपासना करता है, वही तुझे बचाए! तब एक पत्थर लाकर उस गड़हे के मुंह पर रखा गया l<br/>दानिय्येल 6:16–17 – स्लाइड 12
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तब राजा अपने महल में चला गया, और उस रात को बिना भोजन पड़ा रहा; और उसके पास सुख विलास की कोई वस्तु नहीं पहुंचाई गई, और उसे नींद भी नहीं आई l<br/>दानिय्येल 6:18 – स्लाइड 13
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भोर को पौ फटते ही राजा उठा, और सिंहों के गड़हे की ओर फुर्ती से चला गया। जब राजा गड़हे के निकट आया, तब शोक भरी वाणी से चिल्लाने लगा और दानिय्येल से कहा, हे दानिय्येल, हे जीवते परमेश्वर के दास, क्या तेरा परमेश्वर जिसकी तू नित्य उपासना करता है, तुझे सिंहों से बचा सका है? दानिय्येल 6:19,20,20 – स्लाइड 14
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तब दानिय्येल ने राजा से कहा, हे राजा, तू युगयुग जीवित रहे! मेरे परमेश्वर ने अपना दूत भेज कर सिंहों के मुंह को ऐसा बन्द कर रखा कि उन्होंने मेरी कुछ भी हानि नहीं की; इसका कारण यह है, कि मैं उसके साम्हने निर्दोष पाया गया; और हे राजा, तेरे सम्मुख भी मैं ने कोई भूल नहीं की।<br/>दानिय्येल 6:21–22 – स्लाइड 15
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तब राजा ने बहुत आनन्दित हो कर, दानिय्येल को गड़हे में से निकालने की आज्ञा दी। सो दानिय्येल गड़हे में से निकाला गया, और उस पर हानि का कोई चिन्ह न पाया गया, क्योंकि वह अपने परमेश्वर पर विश्वास रखता था। (दानिय्येल 6:23) <br/>दानिय्येल 6:25-26 पढ़िए। – स्लाइड 16
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