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यूसुफ अपने भाइयों से मिलता है

यूसुफ के भाइयों ने यूसुफ के सामने घुटने टेके।
योगदानकर्ता योमिनिस्ट्री
CC BY-NC-ND
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भयानक अकाल पड़ा था l तब याकूब ने अपने पुत्रों से कहा, ‘तुम एक दूसरे का मुंह क्यों देख रहे हो। फिर उसने कहा, मैं ने सुना है कि मिस्र में अन्न है; इसलिये तुम लोग वहां जा कर हमारे लिये अन्न मोल ले आओ, जिस से हम न मरें, वरन जीवित रहें।’<br/>उत्पत्ति 42:1-2 – स्लाइड 1
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इस्राएल के पुत्र अन्न मोल लेने मिस्र को गएl यूसुफ तो मिस्र देश का अधिकारी था, और उस देश के सब लोगों को वही अन्न बेचता था; इसलिये जब यूसुफ के भाई आए तब भूमि पर मुंह के बल गिर के दण्डवत किया। उत्पत्ति 42:6 – स्लाइड 2
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यूसुफ ने तो अपने भाइयों को पहिचान लिया, परन्तु उन्होंने उसको न पहिचाना। तब यूसुफ अपने उन स्वप्नों को स्मरण करके जो उसने उनके विषय में देखे थे, उन से कहने लगा, तुम भेदिए हो; इस देश की दुर्दशा को देखने के लिये आए हो। उत्पत्ति 42:8–9 – स्लाइड 3
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उन्होंने उससे कहा, नहीं, नहीं, हे प्रभु, तेरे दास भोजनवस्तु मोल लेने के लिये आए हैं। हम सब एक ही पिता के पुत्र हैं, हम सीधे मनुष्य हैं, तेरे दास भेदिए नहीं। उन्होंने कहा, हम तेरे दास बारह भाई हैं, और कनान देशवासी एक ही पुरूष के पुत्र हैं, और छोटा इस समय हमारे पिता के पास है, और एक अब नहीं रहा। उत्पत्ति 42:10-11 और 13 – स्लाइड 4
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इससे पहले कि यूसुफ उन्हें अन्न बेचता, उसने अपने भाइयों की परीक्षा लेने का निश्चय किया। वह उनसे सख्ती से बात करता था और बार-बार उन पर भेदिए होने का आरोप लगाता था। फिर तीन दिन के लिए उसने उन्हें बन्दीगृह में डाल दिया। इस बीच उसने वह अन्न तैयार किया जिसे वे खरीदना चाहते थे। उत्पत्ति 42:14-17 – स्लाइड 5
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यूसुफ ने उन से कहा, एक काम करो तब जीवित रहोगे; क्योंकि मैं परमेश्वर का भय मानता हूं; यदि तुम सीधे मनुष्य हो, तो तुम सब भाइयों में से एक जन इस बन्दीगृह में बन्धुआ रहे; और तुम अपने घर वालों की भूख बुझाने के लिये अन्न ले जाओ। और अपने छोटे भाई को मेरे पास ले आओ; इस प्रकार तुम्हारी बातें सच्ची ठहरेंगी, और तुम मार डाले न जाओगे। <br/>उत्पत्ति 42:18-20 – स्लाइड 6
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उन्होंने आपस में कहा, नि:स्न्देह हम अपने भाई के विषय में दोषी हैं, क्योंकि जब उसने हम से गिड़गिड़ा के बिनती की, तौभी हम ने यह देखकर, कि उसका जीवन कैसे संकट में पड़ा है, उसकी न सुनी; इसी कारण हम भी अब इस संकट में पड़े हैं। उत्पत्ति 42:2 वे नहीं जानते थे कि यूसुफ उनकी बातों को समझ गया है तब वह उनके पास से हटकर रोने लगा; उनके जाने से पहले यूसुफ ने शिमोन को वापस बन्दीगृह में डाल दिया। – स्लाइड 7
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सराय में जब एक ने अपने गदहे को चारा देने के लिये अपना बोरा खोला, तब उसका रूपया बोरे के मोहड़े पर रखा हुआ दिखलाई पड़ा। तब उसने अपने भाइयों से कहा, मेरा रूपया तो फेर दिया गया है, देखो, वह मेरे बोरे में है; तब उनके जी में जी न रहा, और वे एक दूसरे की और भय से ताकने लगे l उत्पत्ति 42:27-28 – स्लाइड 8
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जब वे घर पहुँचे तो उन्होंने अपने पिता को अन्न प्राप्त करने के संघर्ष के बारे में बताया। और मिस्री चाहता हैं कि वे बिन्यामीन के साथ लौट आएं : तब उनके पिता याकूब ने उन से कहा, मुझ को तुम ने निर्वंश कर दिया, देखो, यूसुफ नहीं रहा, और शिमोन भी नहीं आया, और अब तुम बिन्यामीन को भी ले जाना चाहते हो: ये सब विपत्तियां मेरे ऊपर आ पड़ी हैं। <br/>उत्पत्ति 42:36 – स्लाइड 9
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