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मूसा - पहले के 40 साल

मूसा मिस्र के राजकुमार के रूप में बड़ा हुआ।
योगदानकर्ता योमिनिस्ट्री
CC BY-NC-ND
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मिस्र में एक नया राजा गद्दी पर बैठा जो यूसुफ को नहीं जानता था।और उसने अपनी प्रजा से कहा, देखो, इस्राएली हम से गिनती और सामर्थ्य में अधिक बढ़ गए हैं। इसलिये आओ, हम उनके साथ बुद्धिमानी से बर्ताव करें, कहीं ऐसा न हो कि जब वे बहुत बढ़ जाएं, और यदि संग्राम का समय आ पड़े, तो हमारे बैरियों से मिलकर हम से लड़ें और इस देश से निकल जाएं। निर्गमन 1:8-10 – स्लाइड 1
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इसलिये उन्होंने उन पर बेगारी कराने वालों को नियुक्त किया कि वे उन पर भार डाल डालकर उन को दु:ख दिया करें l पर ज्यों ज्यों वे उन को दु:ख देते गए त्यों त्यों वे बढ़ते और फैलते चले गए l यहां तक ​​कि वे इस्राएल के पुत्रों से डरने लगे। मिस्रियों ने इस्राएल के पुत्रों को कठोर परिश्रम करने के लिए विवश किया; और उनके जीवन को गारे, ईंट और खेती के भांति भांति के काम की कठिन सेवा से दु:खी कर डाला l निर्गमन 1:11–14 – स्लाइड 2
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इस्राएल के पुत्रों को इब्री भी कहा जाता था। मिस्री लोग इब्रानियों से डरते थे, सो फिरौन ने अपनी सारी प्रजा के लोगों को आज्ञा दी, कि इब्रियों के जितने बेटे उत्पन्न हों उन सभों को तुम नील नदी में डाल देना, और सब बेटियों को जीवित रख छोड़ना l निर्गमन 1:22 – स्लाइड 3
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इस समय एक इब्रानी परिवार में एक पुत्र उत्पन्न हुआ l मां ने बच्चे को जान से मारने के डर से छिपाने की कोशिश की। और जब वह उसे और छिपा न सकी तब उसके लिये सरकंड़ों की एक टोकरी ले कर, उस पर चिकनी मिट्टी और राल लगाकर, उस में बालक को रखकर नील नदी के तट पर कांसों के बीच छोड़ आई। उस बालक कि बहिन दूर खड़ी रही, कि देखे इसका क्या हाल होगा। निर्गमन 2:3 – स्लाइड 4
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तब फिरौन की बेटी नहाने के लिये नदी के तट पर आई; उसकी सखियां नदी के तीर तीर टहलने लगीं; तब उसने कांसों के बीच टोकरी को देखकर अपनी दासी को उसे ले आने के लिये भेजा। तब उसने उसे खोल कर देखा, कि एक रोता हुआ बालक है; तब उसे तरस आया और उसने कहा, यह तो किसी इब्री का बालक होगा। तब बालक की बहिन ने फिरौन की बेटी से कहा, क्या मैं जा कर इब्री स्त्रियों में से किसी धाई को तेरे पास बुला ले आऊं जो तेरे लिये बालक को दूध पिलाया करे? फिरौन की बेटी ने कहा, जा। तब लड़की जा कर बालक की माता को बुला ले आई। निर्गमन 2:5–8 – स्लाइड 5
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फिरौन की बेटी ने उससे कहा, तू इस बालक को ले जा कर मेरे लिये दूध पिलाया कर, और मैं तुझे मजदूरी दूंगी। तब वह स्त्री बालक को ले जा कर दूध पिलाने लगी।जब बालक कुछ बड़ा हुआ तब वह उसे फिरौन की बेटी के पास ले गई, और वह उसका बेटा ठहरा; और उसने यह कहकर उसका नाम मूसा रखा, कि मैं ने इस को जल से निकाल लिया l निर्गमन 2:9–10 – स्लाइड 6
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उन दिनों में ऐसा हुआ कि जब मूसा जवान हुआ, और बाहर अपने भाई बन्धुओं के पास जा कर उनके दु:खों पर दृष्टि करने लगा; तब उसने देखा, कि कोई मिस्री जन मेरे एक इब्री भाई को मार रहा है। जब उसने इधर उधर देखा कि कोई नहीं है, तब उस मिस्री को मार डाला और बालू में छिपा दिया l<br/>निर्गमन 2:11–12 – स्लाइड 7
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किसी ने मूसा को मिस्री को मारते देखा। इस बात का समाचार फिरौन को मिला और वह मूसा को मारना चाहता था। मूसा को अपने घर से भागना पड़ा और अपने इब्रानी और मिस्री परिवारों को छोड़ना पड़ा। लगभग चालीस वर्ष की अवस्था में वह फिरौन से छिपने के लिए अकेले ही दूर देश में गया। (निर्गमन 2:13–15) – स्लाइड 8
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मूसा मिद्यान नामक देश में भाग गया। वहाँ एक परिवार ने उसका स्वागत किया जहाँ वह अपनी पत्नी जिप्पोरा से मिले। उनके दो पुत्र हुए, गेर्शोम और एलीएजेर। मूसा मिद्यान में बस गया और कई वर्षों तक एक चरवाहे के रूप में काम करता रहा।<br/> (निर्गमन 2:15–22) – स्लाइड 9
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