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आग की भट्टी

मेशक, शद्रक, अबेदनगो और धधकती भट्टी।
योगदानकर्ता मूडी पब्लिशर्स
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राजा नबूकदनेस्सर सारे बेबिलोन साम्राज्य पर राज करता था। वह एक शक्तिशाली सम्राट था। – स्लाइड 1
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राजा नबूकदनेस्सर के महल मे बहुत से देशो और संस्कृतियों के लोग कार्य करते थे, उन्हें नबूकदनेस्सर ने उनके देश पर चढ़ाई करके जीत लिया था। – स्लाइड 2
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एक दिन राजा नबूकदनेस्सर ने अपने राज्य के सारे शासकों और प्रांतों के राज्यपालों को इकट्ठा होने का आदेश दिया। वह उन्हें अपने महल के आंगन में एकत्रित होते हुए देख रहा था। यह एक खास मौका था और किसी की न आने का साहस नहीं था। – स्लाइड 3
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राजा उठ खड़ा हुआ। विशेष घड़ी आ चुकी थी। – स्लाइड 4
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तुरहियाँ बजाई गई। – स्लाइड 5
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और सन्देशवाहक अपने हाथ में एक बड़ा घोशणा पत्र लिए हुए आया। – स्लाइड 6
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राजा की घोषणा सुनने के लिए कप्तान, राजकुमार और राज्यपाल सभी चुपचाप खड़े रहे। – स्लाइड 7
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ढिंढोरिये ने ऊंचे शब्द से पुकार कर कहा, हे देश-देश और जाति-जाति के लोगों, और भिन्न भिन्न भाषा बोलने वालों, तुम को यह आज्ञा सुनाई जाती है, कि राजा ने यह मूर्ति अपनी समानता में खड़ी कराई है। – स्लाइड 8
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(यह मूर्ति 90 फुट ऊॅंची थी) जिस समय तुम नरसिंगे, बांसुरी, वीणा, सारंगी, सितार, शहनाई आदि सब प्रकार के साजों का शब्द सुनो, तुम उसी समय गिर कर नबूकदनेस्सर राजा की खड़ी कराई हुई सोने की मूरत को दंडवत् करना। – स्लाइड 9
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आगे सन्देशवाहक ने दिल दहलाने वाली घोषणा करते हुए कहा, ‘जो कोई गिरकर दण्डवत न करेगा व उसी घड़ी धधकते हुए भट्ठे में डाल दिया जाएगा।’ – स्लाइड 10
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इसलिए जब सारे साज बजाए गए.......... – स्लाइड 11
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..........लोगों ने राजा की आज्ञा के अनुसार भूमि पर गिरकर सोने की मूर्ति को दंडवत किया। – स्लाइड 12
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दो कसदी एक साथ दंडवत कर रहे थे। उनमें से एक ने एक अजीब बात देखी और दूसरे को हाथ मारकर उससे कुछ कहने लगा। – स्लाइड 13
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कसदी ने कहा, ‘देख, ये वैसा ही है जैसा हमने सोचा था। वे तीनों मूर्ति के सामने झुकने से मना कर रहे हैं।’ – स्लाइड 14
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कसदी सही था। तीन युवा राजकुमार, राजधानी के शासक ही खुले तौर पर राजा की अवज्ञा कर रहे थे। – स्लाइड 15
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तीनों को यहूदा के दूर देश से बंदी बनाकर लाया गया था। उनके नाम उनकी योग्यातानुसार बदल दिये गये थे उन्हें राज्य में ऊँचा पद दिया गया था। – स्लाइड 16
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हनन्याह का अर्थ है 'ईश्वर का प्रिय', जिसका नाम बदलकर शद्रक या सूर्य की परिक्रमा करने वाला के रूप में बदल दिया गया। – स्लाइड 17
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मीशाएल का प्रिय नाम 'वह जो परमेश्वर के सामान है' से बदलकर अन्यजातियों का नाम मेशक रख दिया गया जिसका अर्थ है 'सूर्य देवता' – स्लाइड 18
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और अजर्याह जिसके नाम का अर्थ था 'यहोवा मेरा सहायक है' बदलकर अबेदनगो 'वाणिज्य के देवता' के रूप में रख दिया गया। नबूकदनेस्सर ने भले ही उनका नाम बदल लिया हो लेकिन उनके दिल वही रहे। ये लोग सर्वशक्तिमान परमेश्वर में विश्वास करते थे और एक मूर्ति के सामने झुकना कुछ ऐसा था जिसे परमेश्वर ने उन्हें कभी नहीं करने के लिए कहा था। – स्लाइड 19
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दोनों कसदियों ने समय नष्ट न करते हुए सारा हाल राजा नबूकदनेस्सर को सुना दिया। वे शद्रक, मेशक और अबेदनगो से ईर्ष्या करते थे। – स्लाइड 20
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इसलिए उन्होंने चालाकी से राजा को याद दिलाया कि जिन लोगों ने झुकने से इनकार कर दिया था, वे वही आदमी थे जिन्हें राजा ने बाबुल के मामलों के ऊपर नियुक्त किया था। – स्लाइड 21
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राजा चिल्लाया, ‘इनका इतना दुस्साहस, उन्हें पकड़कर मेरे सामने ले आओ।’ – स्लाइड 22
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शद्रक, मेशक और अबेदनगो को पकड़कर राजा के महल में लाया गया और जब उनसे पूछा गया कि वे सच मे मूर्ति के सामने नहीं झुके, इस पर उन्होंने कहा कि यह बात सत्य है। – स्लाइड 23
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इसलिए बेबीलोन साम्राज्य के घंमडी और शक्तिशाली शासक ने पुरुषों को मूर्ति के सामने झुकने का दूसरा मौका देने का फैसला किया। अगर उन्होंने किया तो वह उन्हें माफ कर देंगे। – स्लाइड 24
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बहादुर नौजवानों ने उत्तर दिया, 'हमारा परमेश्वर हमें छुड़ाने में सक्षम है, लेकिन अगर वह ऐसा नहीं करना चाहता है, तो भी हम कभी भी आपके देवताओं की सेवा नहीं करेंगे या सोने की मूर्ति की पूजा नहीं करेंगे। – स्लाइड 25
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तब नबूकदनेस्सर झुंझला उठा, और उस ने आज्ञा दी, कि भट्ठे को सातगुणा और धधकाया जाए। – स्लाइड 26
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फिर उसने आज्ञा दी, कि शद्रक, मेशक और अबेदनगो को बांधकर उन्हें धधकते हुए भट्ठे में डाल दिया जाए। – स्लाइड 27
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आग के भट्ठे को सात गुना अधिक धधका दिया गया। – स्लाइड 28
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तीनों यहूदी पुरूशों, शद्रक, मेशक और अबेदनगो को बांध दिया गया। – स्लाइड 29
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एक-एक करके तीनों को आग के भट्ठे में फेंक दिया गया। – स्लाइड 30
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शद्रक, जिसका असली नाम 'परमेश्‍वर का प्रिय' था, आग में झोंक दिया गया। – स्लाइड 31
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मेशक, जिसके यहूदी नाम का अर्थ है 'परमेश्‍वर के तुल्य', भट्ठे में फेंक दिया गया। – स्लाइड 32
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अबेदनगो, जिनके असली नाम का अर्थ था 'यहोवा मेरा सहायक है', उनके साथ हो लिया। – स्लाइड 33
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जब सैनिकों ने उन्हें भट्ठे में फेंक दिया तो वे भयानक गर्मी से बचने के लिए मुड़कर दौड़ने लगे। – स्लाइड 34
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लेकिन आग की जलती हुई लपटों ने उन्हें भस्म कर दिया। – स्लाइड 35
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तब नबूकदनेस्सर राजा अचम्भित हुआ और घबरा कर उठ खड़ा हुआ। वह अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पा रहा था। – स्लाइड 36
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वह अपना औहदा भूलकर सभी लोगों के बीच में गया – स्लाइड 37
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उसने लोगों से पूछा, क्या तुम लोग भी वही देख रहे हो – स्लाइड 38
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क्या हम ने उस आग के बीच तीन ही पुरुष बन्धे हुए नहीं डलवाए? – स्लाइड 39
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अब मैं देखता हूँ कि चार पुरूष आग के बीच खुले हुए टहल रहे हैं, चौथे पुरूष का स्वरूप परमेश्वर के पुत्र के सदृश है। – स्लाइड 40
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राजा नबूकदनेस्सर अपने हृदय में जानता था कि सर्वशक्तिमान प्रभु परमेश्वर ही सच्चा और जीवित परमेश्वर है। उसने शद्रक, मेशक और अबेदनगो को आग से बाहर आने के लिए कहा। – स्लाइड 41
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जब तीन इब्रानी लड़के भट्ठे से सकुशल बाहर निकल आए तो लोग चकित रह गए। – स्लाइड 42
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एक बाल भी नहीं जला और उनमें से धुएं की गंध भी नहीं आ रही थी। – स्लाइड 43
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राजा नबूकदनेस्सर अपने घुटनों पर गिर पड़ा और कहा, 'धन्य है शद्रक, मेशक और अबेदनगो का परमेश्वर जिसने अपने उन सेवकों को बचाया है जिन्होंने उस पर भरोसा किया था।' – स्लाइड 44
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कुछ ही समय बाद नबूकदनेस्सर के शासन के अधीन सभी राष्ट्रों को एक नया आदेश पढ़कर सुनाया गया। किसी को भी तीन बहादुर यहूदी पुरुषों के परमेश्वर के खिलाफ नहीं बोलना था। – स्लाइड 45
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तब राजा ने बेबिलोन के प्रान्त में शद्रक, मेशक, अबेदनगो का पद और ऊँचा किया लेकिन उनका सच्चा आनंद तो परमेश्वर की आराधना में ही था। – स्लाइड 46
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